मीडिया और नेता दोनों एक-दूसरे पर जिंदा हैं

संपादकीय
23 नवम्बर 2018


कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता कहे जाने वाले, राजस्थान के सीपी जोशी ने ऐन चुनाव के वक्त अपनी बकवास से पार्टी, और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों के लिए शर्मिंदगी जुटा दी है। और यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस का कोई बड़ा नेता किसी नाजुक मौके पर ऐसी हरकत करे। कम से कम आधा दर्जन नेता तो ऐसे हैं जो ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं कि जब पार्टी के लिए सब कुछ अच्छा चल रहा हो, तो मानो उसे नजर लग जाती है, और ये लोग अपना मुंह खोलकर राहुल गांधी की पकाई खीर में चार चम्मच फिनाईल डाल देते हैं। कभी मंदिर के नाम पर, कभी शिवलिंग पर बिच्छू और चप्पल के नाम पर, कभी मोदी को नीच कहकर, तो कभी ओसामा को जी कहकर देश की बहस को सरकार की नाकामयाबी से दूर घसीटकर ले जाने का काम करने में कांग्रेस के नेताओं को महारथ हासिल है। दूसरी तरफ भाजपा और उससे जुड़े हुए संगठनों के लिए यह एक नियमित और आम बात है, और रेप से लेकर महिलाओं के कपड़ों तक, और अल्पसंख्यकों के संदर्भ में कुत्ता और पिल्ला कहने तक किस्म-किस्म की बातें भाजपा के नेता कुछ इस तरह कहते हैं कि ऐसा लगता है कि वे देश की जनता का बर्दाश्त टटोलते रहते हैं कि और कितनी हिंसक, और कितनी साम्प्रदायिक बात कहकर भी बचा जा सकता है। 
दिक्कत यह है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मेहरबानी से कुछ सेकेंड में कही गई घटिया से घटिया बात का वीडियो, हिंसक से हिंसक धमकी की रिकॉर्डिंग देश के सबसे जरूरी मुद्दों को लात मारकर टीवी स्टूडियो के बाहर कर देती हैं, और गले में फंदा डालकर हौसला जुटाता हुआ किसान यह देखकर हैरान रह जाता है कि किस तरह टीवी चैनल की एंकर नापसंद पार्टी के नेता को जुबान से नंगा करने की धमकी देती है, और ऐसा वीडियो टीवी प्रसारण से परे भी चारों तरफ फैलने लगता है। दुनिया के कुछ सभ्य देशों के परिपक्व समाचार चैनलों को देखें, तो लगता है कि वे ईमानदारी से रिपोर्टिंग का काम करते हुए जिंदा कैसे रहते होंगे, और शायद तभी तक जिंदा रह सकेंगे जब तक हिन्दुस्तान के कुछ घटिया समाचार चैनल वहां पहुंचकर उनके मुंह का कौर न छीन लें। हालत यह है कि अलग-अलग धर्मों के नाम पर बदबूदार और तेजाबी बकवास करने वाले कुछ चेहरे, मस्जिद का नाम बदलकर हिन्दू देवता के नाम पर कर देने की धमकी देने वाले राष्ट्रीय प्रवक्ता, और समाचार चैनलों की प्रायोजित नूरा कुश्ती में अनायास दिखती झड़प, ये सब एक-दूसरे के साथ मिलकर जीते हैं, और एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं। अधिकतर समाचार चैनल इस फेर में रहते हैं कि वे दूसरे चैनल के मुकाबले कैसे अधिक घटिया हो सकें, ताकि उनकी दर्शक संख्या की टीआरपी बढ़ सके। 
हिन्दुस्तान के टीवी समाचार दर्शकों की जिंदगी का जितना हिस्सा वे इस बक्से के सामने गुजारते हैं, उतना ही वे देश की हकीकत से दूर भी होते जाते हैं। अधिकतर समाचार चैनल लोगों को सच और हकीकत से ठीक वैसे ही दूर ले जाते हैं, जिस तरह धर्म लोगों को अहिंसा से दूर ले जाते हैं। इन दोनों ही मामलों में लोगों को इन बातों का अहसास भी नहीं होता। आज की बाजार व्यवस्था में इश्तहार देने के पहले विज्ञापन एजेंसियां और विज्ञापनदाता यह तौलते हैं कि किस चैनल को कितने लोग देखते हैं, या किस वेबसाइट पर कितने लोग जाते हैं। वे यह नहीं देखते कि लोग इन जगहों पर किस तरह का कूड़ा देखते हैं, किस तरह की गंदगी देखते हैं। अभी दो दिन पहले एक किसी बड़ी समाचार वेबसाइट पर एक खबर की सुर्खी पेज पर दिख रही थी- अपने मंगेतर को छोड़ यह किसके साथ पेरिस में घूम रही है प्रियंका चोपड़ा, देखें तस्वीरें। अब इस हैडिंग को देखकर पहली नजर में लगेगा कि प्रियंका बेवफा हो गई है, और मंगेतर को घर बिठा किसी यार के साथ पेरिस में ऐश कर रही है। लेकिन जब इस हैडिंग पर क्लिक करके लोग प्रियंका की सनसनीखेज तस्वीरें देखते हैं, तो दिखता है कि वह अपनी मां के साथ पेरिस में खरीददारी कर रही है। सनसनी का यह अंदाज परले दर्जे की बेईमानी और धोखाधड़ी है, लेकिन आज बाजार उसी का है। इसी तरह बहुत से नेता इस्तेमाल किए गए कंडोम गिनने जैसे बयान देकर खबरों में बने रहते हैं, और जो लोग किसी मकसद से ऐसा नहीं करते, उनमें भी सीपी जोशी जैसे लोग हैं जो कि अपनी पार्टी की परवाह किए बिना बेवजह ऐसी बेतुकी बात करते हैं कि पार्टी की शर्मिंदगी हो, और उसे चुनाव में बड़ा नुकसान झेलना पड़े। आज का मीडिया और आज के नेता दोनों एक-दूसरे पर इस तरह जिंदा हैं। (Daily Chhattisgarh)

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