संपादकीय
26 नवम्बर 2018

चीन ने दावा किया है कि उसके वैज्ञानिकों ने ऐसा डिजाइनर बेबी बना लिया है जिसे कभी एचआईवी संक्रमण नहीं होगा। जीन्स की एडिटिंग से वैज्ञानिकों ने ऐसा कर दिखाया है। विज्ञान कथाओं में आधी सदी पहले से ऐसी कल्पना की जा रही थी और पिछले एक-दो दशक से जेनेटिक एडिटिंग की शुरूआत हो रही थी जो आज इस मुकाम तक पहुंची बताई जाती है। दूसरी तरफ विज्ञान कथाओं के कुछ विख्यात लेखकों के उपन्यास देखें तो उनमें ऐसी कल्पना भी दिखती है कि लोगों को ब्रेनवॉश करके उनकी सोच को किसी खास तरफ मोड़ा जा सकता है। ऐसे एक उपन्यास में डॉक्टरों को तफरीह के लिए एक दवा कंपनी एक सैलानी-जहाज पर ले जाती है, और वहां उनका बे्रनवॉश करके उन्हें इस कंपनी की दवाएं मरीजों को लिखने के लिए पेे्ररित किया जाता है।
अब ऐसी तकनीक के हिंदुस्तान में भी कई तरह के उपयोग हो सकते हैं। किसी कमरे में बैठे हुए तमाम लोगों को अगर किसी किस्म की तरंगों से प्रभावित किया जा सके, तो राजनीतिक दल उन्हें अपनी तरफ करने के लिए बे्रनवॉश कर सकते हैं। दूसरी तरफ जिस मोबाइल कंपनी के फोन हिंदुस्तान में सबसे अधिक हाथों में पहुंच गए हैं, वह कंपनी मोबाइल कॉल पर आवाज के साथ-साथ ऐसे सिग्नल भी भेज सकती है जिससे आम वोटर किसी एक खास नेता के भक्त बनते चलें। ऐसे में मोबाइल पर मुफ्त कॉल की सुविधा बड़ी काम की होगी, और जो लोग जितने अधिक देर तक फोन पर बात करेंगे, वे उतने ही अधिक कट्टर भक्त होते चलेंगे। फिर इसी तरह आधार कार्ड के आधार पर हर इलाज का रिकॉर्ड निकाला जा सकेगा, और जब उस मरीज को अस्पताल में अगली बार बुलाया जाएगा, तब दवा के साथ-साथ ऐसी जींस-थेरेपी भी हो सकेगी जिससे उसकी आस्था मंदिर या मस्जिद में से किसी एक के लिए बढ़ाई जा सकेगी, अगले इलाज के दौरान उसकी आक्रामकता बढ़ाई जा सकेगी, और इलाज लंबा चला तो उसके दिल-दिमाग में ऐसा अहसास भी डाला जा सकेगा जिससे उसे हर दिन अच्छा दिन दिखने और लगने लगेगा।
जेनेटिक एडिटिंग और बे्रनवॉश की संभावनाएं अनंत हैं। बाजार तो लोगों में अपने ब्रांड और अपने सामान के लिए पसंद पैदा कर ही सकेगा, उसके अलावा राजनीतिक दल, साम्प्रदायिक संगठन भी लोगों को अपनी तरफ खींच सकेंगे। आज मुंबई में उत्तर भारतीयों को पीटने वाली शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे उत्तर भारत के सबसे जलते-सुलगते तीर्थ, अयोध्या हो आए, और वहां मुंबई में मार खाए हुए किसी ने उन्हें एक पोस्टर तक नहीं दिखाया। ऐसा लगता है कि उद्धव ठाकरे के पास लोगों को बे्रनवॉश करने की कोई तकनीक आ चुकी है। यह भी लगता है कि पाकिस्तान में नवाज शरीफ के पास ऐसी ही कोई तकनीक थी जिसका इस्तेमाल उन्होंने नरेन्द्र मोदी पर ऐसा किया था कि वे दूसरे देश से हिंदुस्तान लौटते हुए बिना बुलाए, बिना तय किए हुए सीधे पाकिस्तान में उतर गए थे, और नवाज शरीफ के घर उनकी सालगिरह पर पहुंच गए थे, जाकर अम्मा के पांव छू लिए थे, शादी के घर में दुल्हन को तोहफा दे दिया था, और फिर हक्का-बक्का भारत लौट आए थे। इस तरह चिकित्सा विज्ञान से दुनिया को मोडऩे का बहुत बड़ा औजार मिल सकता है। और आज चीन में जिस तरह ऐसा बच्चा तैयार कर लिया है जिसे कभी एचआईवी नहीं होगा, उसी तरह हिंदुस्तान में ऐसे बच्चे तैयार किए जा सकते हैं जो कभी सवाल न करें, महज कीर्तन करें। लोगों को बच्चों से ऐसी कल्पना पर निबंध लिखवाने चाहिए कि ऐसी तकनीक का क्या-क्या इस्तेमाल हो सकता है। (Daily Chhattisgarh)
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