सर्वे से खुश होकर बैठी पार्टी अपना ही नुकसान करेगी...

संपादकीय
9 नवम्बर 2018


कल देश की एक प्रतिष्ठित समाज-विज्ञान अध्ययन-शोध संस्थान सीएसडीएस का एक चुनावपूर्व सर्वे आया है जिसके मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने का आसार है, वहां सत्तारूढ़ भाजपा पर जनता की खासी नाराजगी उतरते दिख रही है। पहले की खबरें भी कुछ ऐसी ही थीं। मध्यप्रदेश में भाजपा की सीटें घटती दिख रही हैं, कांग्रेस की बढ़ती दिख रही हैं, लेकिन सत्ता पर भाजपा काबिज बनी रहेगी ऐसा अंदाज लग रहा है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ के बारे में इस सर्वे का अंदाज  है कि भाजपा की सीटें खासी बढ़ रही हैं, करीब दस-बीस फीसदी, और कांग्रेस की सीटें खासी घट रही हैं, दस-बीस फीसदी से कहीं अधिक, और जोगी-बसपा गठबंधन व अन्य मिलकर चार-छह सीटें पा सकते हैं। इन तीनों राज्यों में सबसे अधिक बेहतर संभावना छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की दिख रही है जो कि पिछले पन्द्रह बरस से यहां काबिज है। राजस्थान में हर पांच बरस में सत्ता-पलट की परंपरा के मुताबिक भाजपा को पांच बरस में ही वोटर खारिज करते दिख रहे हैं। 
छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए यह एक बड़ी खुशी की बात हो सकती है, और यह एक धोखा भी हो सकता है अगर भाजपा के लोग इस पर भरोसा करके अभी से निश्चिंत हो जाएं कि वे जीत ही रहे हैं। सच तो यह है कि छत्तीसगढ़ का यह चुनाव, मप्र-छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे अनिश्चितता भरा चुनाव होने जा रहा है क्योंकि एक बार जोगी एक अलग क्षेत्रीय पार्टी बनाकर मैदान में हैं, और वे मायावती की बसपा के साथ भी हैं। इन दोनों को मिलाकर एक ऐसी ताकत बन सकती है जो कि भाजपा और कांग्रेस किसी के भी सपने तोडऩे का काम करे। इसी सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा को 43 फीसदी, कांग्रेस को 36 फीसदी, और जोगी-बसपा को 15 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं। इस सर्वे के आंकड़ों का ही विश्लेषण करें तो भाजपा करीब 7 फीसदी आगे दिख रही है, जबकि वह पिछले चुनाव में कांग्रेस से महज पौन फीसदी आगे थी। सर्वे के इन आंकड़ों को सच भी मान लें, तो भी यह बात तो है ही कि जोगी-बसपा को मिलने वाले 15 फीसदी वोट अगर घटते हैं तो वे भाजपा और कांग्रेस के बीच का संतुलन किसी भी तरफ बिगाड़ सकते हैं। 
भाजपा को आज छत्तीसगढ़ में अगर सचमुच सरकार बनाना है,तो इस सर्वे के आंकड़ों को अधिक गंभीरता से लिए बिना उसे जमकर मेहनत करनी होगी क्योंकि छत्तीसगढ़ में हवा इस सर्वे के आंकड़ों की तरह आत्मविश्वास से भरी हुई निश्चित और निश्चिंत नहीं दिख रही है। भाजपा को ऐसे सर्वे से मिले आत्मविश्वास से बचना चाहिए क्योंकि चुनाव के माहौल में कई किस्म की लुकी-छुपी चीजें भी निकलकर बाहर आती हैं, और खेल बिगाड़ जाती हैं। आज ही सुबह भाजपा के एक सांसद का एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आया है जिसमें वह आरएसएस को कोसता हुआ और भ्रष्ट कहता हुआ दिख रहा है। इस सांसद का बेटा आज भाजपा का उम्मीदवार है, और उसकी ऐसी बातें सुनकर संघ-भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर क्या असर होगा? एक दूसरी घोषणा सामने आई है जिसमें भाजपा के कई मंत्रियों, सांसदों, और नंदकुमार साय जैसे वरिष्ठ नेता की तस्वीरें खुफिया कैमरे के एंगल से मिल गई दिखाई गई हैं, और कहा गया है कि ये सारे स्टिंग सामने आने वाले हैं। 
चुनाव के इस आखिरी पखवाड़े में जो सो गया, वह खो गया। अगर सचमुच ही ऐसे आधा दर्जन स्टिंग ऑपरेशन सामने आने हैं, तो सीएसडीएस का चुनावी सर्वे तो इनमें से किसी के भी असर का अंदाज नहीं लगाता है। सर्वे के नतीजे सामने आने के बाद ऐसे स्टिंग सामने आने शुरू हुए हैं। इसलिए कांग्रेस और भाजपा दोनों का अधिक भरोसे में रहना आत्मघाती होगा। चूंकि सर्वे के नतीजे भाजपा को भारी लीड से जीतता हुआ बताते हैं, इसलिए अधिक बड़ा खतरा भाजपा पर है कि उसके कार्यकर्ता-नेता हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएं। वैसे भी समझदार को यह मानकर भी चलना चाहिए कि कभी-कभी चुनावी सर्वे गलत भी साबित होते हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ की त्रिकोणीय चुनावी तस्वीर में न तो किसी को आत्मविश्वास खोना चाहिए, और न ही अतिआत्मविश्वासी होना चाहिए।  (Daily Chhattisgarh)

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