संपादकीय
28 नवम्बर 2018

जिन लोगों को इंसान और इंसानियत शब्दों पर बड़ा भरोसा है, और जो लोग अपने बीच के बुरे लोगों को जंगली, या जानवरों जैसा करार देने पर उतारू रहते हैं, उनके लिए कुछ बहुत भयानक, और साथ ही सुनने में भी तकलीफदेह भी, मामला सामने आया है। इंडोनेशिया में एक गांव के लोगों ने जंगल से एक मादा ओरांगुटान को पकड़ लिया, उसे एक कमरे में बांधकर रखा, चेन से जकड़ दिया, पूरे बदन के बाल हजामत करके साफ कर दिया, और फिर उस कमरे को चकलाघर बना दिया। लोग आते थे, और सौ-दो सौ रूपए देकर उसके साथ बलात्कार करते थे। धीरे-धीरे उसके मालिकों ने उसे इंसानों के साथ तरह-तरह का सेक्स सिखाया। जब 2003 में इंडोनेशिया की पुलिस उसे छुड़ाने गई, तो उससे कमाई करने वाले गांव वालों के तेवर हिंसक हो गए, और 35 हथियारबंद पुलिस वाले जाकर उसे छुड़ा पाए। गांव के लोग बंदूकें और चाकू लेकर अपनी इस कमाऊ कैदी को रोकने पर उतारू थे। इसके बाद वन्य प्राणियों के जानकारों को बलात्कार की शिकार इस ओरांगुटान की दिमागी हालत सुधारने, उसका भरोसा जीतने, और उसे दुबारा जंगल में बसने के लायक बनाने में 15 बरस लगे, और अब वह जंगल में छोड़ी जा रही है। जब उसे छुड़ाया गया था तो वह लगातार बलात्कार की वजह से जख्मी थी, और बहुत तकलीफ में थी। जब उसे उसकी मां से चुराया गया था तब वह बच्ची थी, और बरसों के ऐसे बर्ताव के बाद जब उसे छुड़ाया गया तो वह मर्दों को देखकर भी डर जाती थी, और पुरूष कर्मचारियों को उससे दूर रखा गया था। दुनिया के इस इलाके में ओरांगुटान और इस तरह की प्रजातियों के प्राणियों को दस-दस लाख रूपए तक में बेचा जाता है, और फिर उन्हें सेक्स के धंधे में डालकर कमाई की जाती है। इस दौरान ऐसे कई प्राणी मर भी जाते हैं।
जो इंसान किसी को जंगली, किसी को जानवर कहकर गाली देते हैं, उनके पास शायद इसके टक्कर की एक भी मिसाल न हो जिसमें कोई जानवर इंसानों के किसी बच्चे को उठा ले गए हों, और उससे जानवरों के बीच वेश्यावृत्ति करवाते हों। ऐसा करने की ताकत, और ऐसा करने का इंसानी हौसला केवल इंसानों में हो सकता है। इसकी और बहुत सी वजहों के अलावा एक वजह शायद यह भी है कि इंसान आज सामाजिक रूप से एक धार्मिक प्राणी बन गए हैं, और सभी धर्मों में ऐसे सभी कुकर्मों, ऐसी सभी हिंसा के बाद उसके पाप के बोझ से छुटकारा दिलाने के लिए ईश्वर, उसके दलाल, और धर्मस्थल सभी तैयार बैठे हैं। धरती पर ऐसा कोई बुरा काम नहीं है जिसके बोझ से धर्म छुटकारा न दिला दे, और लोगों की आत्मा को एक बार फिर अगले बुरे काम के लिए नई ऊर्जा से न भर दे। तमाम धर्मों में तमाम किस्म के बुरे कामों की पापमुक्ति पाने के लिए आसान नुस्खे बताए गए हैं। ईसाईयों के चर्चों में तो एक औपचारिक कन्फेशन चेम्बर रहता है जिसके एक हिस्से में बैठकर पाप के बोझ से लदे हुए पहुंचे इंसान बगल के हिस्से में बैठे पादरी को तमाम बातें बताकर पापमुक्त होकर हल्की और हंसती-खिलखिलाती आत्मा लेकर निकलते हैं, और फिर से अगले पाप में जुट जाते हैं।
इंसानों को अपनी गालियों के बारे में फिर से सोचना चाहिए। और इंसानों को इंसानियत शब्द के मायने के बारे में भी फिर सोचना चाहिए। दरअसल इंसान के भीतर ही उसके दिल-दिमाग का एक हिस्सा वह हैवान है जिसे इंसान अपने से बाहर, अपने से अलग, अपने से बिल्कुल उल्टा खलनायक साबित करने में लगे रहते हैं। यह हैवान इंसान के भीतर उसका अपना एक अपरिहार्य हिस्सा है, जिस हिस्से के बिना इंसान पूरे नहीं हो सकते। जानवरों को जोतकर इंसान खेत जोतते हैं, उन पर सामान ढोते हैं, उन्हें मारकर खा जाते हैं, उनके बच्चों के हिस्से का दूध पी जाते हैं। गाय या भैंस के बच्चे मर जाएं तो उसका दूध निकालने के लिए उसे धोखा देने को उसके बच्चों की खाल में भूसा भरकर उसके पीछे टिका देते हैं ताकि उसे अपने बच्चे को दूध पिलाने का धोखा हो, और उसका दूध दुह लिया जाए। किसी पोल्ट्री फॉर्म में मशीनों की तरह मुर्गियों को बड़ा किया जाता है, और मशीनों से उसे काटकर कारखाने के प्रोडक्शन की तरह बेच दिया जाता है। लेकिन इन सबसे परे जिस तरह जानवरों से एक संगठित वेश्यावृत्ति करवाई जा रही है, वह असल इंसानियत बताती है। इंसान को अपने इंसान होने पर बस इतना ही गर्व करना चाहिए, जितना कि ऐसे चकलाघर के मालिक कर सकते हैं। (Daily Chhattisgarh)

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