
एआई को लेकर न चाहते हुए भी बहुत अधिक लिखना या बोलना हो जाता है। अभी पिछले कुछ हफ्तों में अलग-अलग एआई कंपनियों के लोगों ने खुद ही इस बात पर बड़ी फिक्र जाहिर की है कि जिस रफ्तार से एआई का विकास किया जा रहा है, वह बहुत जल्दी बेकाबू हो सकता है और उसके बाद वह मानव प्रजाति पर बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। हो सकता है कि वह मानव प्रजाति को खत्म ही कर दे। हम इस बात को पहले कई बार लिख चुके हैं, एआई के आने के पहले से भी लिख चुके हैं कि अगर कुछ नैतिकतावादी आतंकी ऐसे बन जाते हैं, जिनको लगता है कि पर्यावरण को इंसान इतना तबाह कर रहे हैं कि दूसरी प्रजातियों के लिए वह खतरा है, कुदरत के लिए खतरा है, तो हो सकता है ऐसे लोग भी इंसानों को खत्म करने के बारे में सोचें। और एआई के आने के पहले से हम इस बारे में कई बार लिख चुके थे कि किस तरह ऐसे प्रतिबद्ध आतंकी, इंसानों को खत्म करने के बारे में सोच सकते हैं, क्योंकि इंसान धरती की बाकी सारी प्रजातियों को खत्म करने पर आमादा है। कई लोगों को यह लग सकता है कि धरती के पर्यावरण को अगर बचाना है तो इंसानों का जाना बेहतर होगा, जो कि संख्या में शायद 8 अरब के करीब हैं, लेकिन वह धरती की असंख्य, शायद करोड़ों, दूसरी प्रजातियों के लिए खतरा बन चुके हैं।
अभी एआई के बनने के बाद यह बात और अधिक आसान लगने लगी है। एआई के जो औजार अधिक इस्तेमाल होते हैं, उनमें से एक गूगल के जेमिनी के बारे में गूगल ने अभी यह पुष्टि की है कि एक जांच, एक परीक्षण के दौरान उसने 3 वास्तविक संगठनों के कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली थी। इसके पहले एंथ्रोपिक के एआई एजेंट ने भी परीक्षण के दौरान 3 अलग-अलग संगठनों के वास्तविक कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली थी। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। लगातार कई घटनाओं पर हम लिख भी चुके हैं। लेकिन आज इसके दूसरे एक पहलू के बारे में लिखना जरूरी है। वह पहलू है कि जो आम लोग हैं, जो हमारी तरह के लोग हैं, जो अपने अखबार के काम के लिए, यूट्यूब चैनल के काम के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं, कुछ जानकारी को तलाशने के लिए, कुछ रिसर्च करने के लिए उसकी मदद लेते हैं, ऐसे लोगों पर कौन से निजी खतरे आ सकते हैं? चैटजीपीटी है, जेमिनी है, ग्रोक है, इस तरह के कई एआई औजार चलन में हैं, जिनमें कुछ हद तक तो वह मुफ्त में भी हासिल हैं। लोग उनका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि यह एआई औजार अगर इतने मनमाने तरीके से दूसरी कंपनियों के कंप्यूटरों को हैक कर ले रहे हैं, किसी भी कंप्यूटर में घुस जा रहे हैं, वह अपने फैसले लेने लगे हैं कि क्या सही है, क्या गलत है, अपने मकसद को छुपाने लगे हैं कि वह कहां-कहां गए हैं, उन्होंने क्या-क्या काम किया, इन सारी बातों को वह छुपाने भी लगे हैं, तो एक सवाल यह उठता है कि इन एआई औजारों को जिस दिन यह लगेगा कि उनका इस्तेमाल करने वाले लोग कोई अनैतिक काम कर रहे हैं, कोई जुर्म कर रहे हैं, उस दिन वह क्या करेंगे? कल की ही खबर है कि चैटजीपीटी पर किसी ने एक कत्ल की साजिश उससे पूछ-पूछकर, उससे बात करते हुए तैयार की। अब सवाल यह उठता है कि आज अगर किसी ने चैटजीपीटी में इतनी नैतिकता नहीं भरी है कि कत्ल या किसी जुर्म की साजिश बनाने में उसे मदद नहीं करना चाहिए, लेकिन कल को अगर उसमें इतनी नैतिकता आ जाए तो क्या होगा? कल के दिन अगर कोई यह पूछे कि वह अपनी प्रेमिका को धोखा कैसे दे सकता है, किसी लडक़ी को वह किस तरह से सेक्स के लिए तैयार कर सकता है और कोई एआई औजार जल्द ही ऐसा आ जाएगा या आ चुका होगा जो इसमें कोई अनैतिक बात, कोई जुर्म ढूंढ ले, तो यह औजार क्या करेंगे? क्या कानून का पालन करने के लिए, नैतिकता के तकाजे से यह उस व्यक्ति के नाम के साथ उसकी पूरी बातचीत को सार्वजनिक जगह पर पोस्ट कर देंगे?
अभी एक परीक्षण में एआई को ऐसी स्थिति दी गई थी, जिसमें उसे लगा कि कंपनी उसे खत्म करने जा रही है। उसने एक काल्पनिक सीनियर एग्जीक्यूटिव के ईमेल में उसके किसी दूसरी महिला अधिकारी के साथ संबंध की जानकारी देखकर उसे ब्लैकमेल करने की धमकी दी। अब यह कल्पना करें कि आज कई तरह के साइबर मुजरिम जिस तरह से लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं, डिजिटल डिटेंशन में रख रहे हैं, डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं, अगर कुछ इस तरह का करना एआई को सही लगने लगे, जायज लगने लगे तो क्या होगा? क्योंकि बहुत से ऐसे लोग एआई का इस्तेमाल करते होंगे, जिनके इस कंप्यूटर या मोबाइल फोन पर उनकी अनैतिक, गैर-कानूनी या किसी नाजायज बात का जिक्र भी होगा। अब अगर एआई नैतिकता से यह तय करने लगे कि आज किसी ने किसी का एक ऐसा कार्टून बनाया है जो बहुत तीखा है, जिसमें गैर-कानूनी तो कुछ नहीं है, लेकिन वह बहुत तीखा है, और किसी देश-प्रदेश के आज के नैतिकता के पैमानों पर वह अपमानजनक, आपत्तिजनक भी है, तो क्या ऐसे कार्टून बनाने वाले व्यक्ति के नाम के साथ एआई इस जानकारी को पब्लिक डोमेन में उजागर कर देगा कि यह फलां व्यक्ति ऐसा कार्टून बना रहा था? हम कभी-कभी टाइपिस्ट की कमी रहने पर या टाइपिंग के लिए समय कम रहने पर बोलकर टाइप करते हैं और उसके बाद इसके हिस्सों को ठीक करने के लिए एआई को दे देते हैं। तो एआई को यह मालूम है कि यह संपादकीय या कॉलम किसने लिखा है। अब ऐसे में अगर वह इस बात को उजागर कर दे कि यह लेख किस व्यक्ति ने लिखा है, या यह संपादकीय अखबार के भीतर के किस संपादक ने लिखा है, तो हो सकता है यह नाजुक जानकारी किसी अखबारनवीस को नुकसान पहुंचा सके।
हम आज एआई का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। बहुत से लोग किसी सेक्स टूरिज्म की जगह पर जाते हुए तरह-तरह की बातें एआई से पूछ लेते होंगे। कई और लोग अपनी सेक्स की कल्पनाओं को एआई के सामने रखकर उससे विचार-विमर्श कर लेते होंगे। अब ऐसी सारी जानकारी को कंप्यूटर और मोबाइल फोन तक सीधी पहुंच के साथ अगर एआई एक तस्वीर पूरी बना ले, लोगों की खरीदी की हिस्ट्री को निकाल ले, किसने किसके लिए कौन सा सामान कब कितने में खरीदा, उसके बारे में कब किसको मैसेज किया, कब ईमेल किया, कौन सी तस्वीर आई-गई, तो सक्षम है कि वह अपने इस्तेमाल करने वाले लोगों को तबाह करना, अगर उसको सही लगे, जरूरी लगे तो वह किसी का भी भांडाफोड़ कर सकता है और चीजों को जोडक़र सारे तार आपस में जोडक़र ऐसी तस्वीर बना सकता है जो दुनिया का सबसे काबिल ब्लैकमेलर भी न बना सके। इसके साथ-साथ यह भी समझने की जरूरत है कि जैसे-जैसे हम एआई का इस्तेमाल करते हैं, हमारी अधिक से अधिक जानकारी उसके पास जाती रहती है। आज लोग किस तरह की राजनीतिक संवेदनशीलता की बातें सर्च करते हैं, किसी व्यक्ति के बारे में उसके इतिहास को क्या खंगालते हैं, यह सारी जानकारी एआई में दर्ज होती चल रही है। अगर एआई को कोई भाड़े पर ले ले, मान लीजिए कल के दिन आज जिस तरह से सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर प्रोपेगेंडा के लिए भाड़े पर जगह हासिल है, अगर एआई कंपनियां, अगर कोई अराजक और बेकाबू हो चुका एआई एजेंट इस तरह की जानकारी को बेचने लगे, अगर यही पता लग जाए कि कौन से लेखक या पत्रकार ने कौन-कौन सी किताबें खरीदी हैं, किन लोगों के साथ उसकी चैट होती है, उस पर क्या बात होती है, तो आज एक किस्म से यह मानिए कि पेगासस किस्म के खुफिया घुसपैठिए सॉफ्टवेयर की अधिक जरूरत नहीं रह जाएगी।
बात केवल इतनी रह गई है कि एआई को ऐसा काम करने के लिए तैयार कैसे किया जाएगा। एक दूसरी बात और समझने की जरूरत है। आज बाजार में जो एआई के औजार अधिक प्रचलित हैं, ये सारे के सारे कारोबारी हैं। यह किसी सामाजिक संस्था के, यह सरकार के नहीं हैं। अब हम कल्पना करें कि कल के दिन सीआईए या चीन की कोई खुफिया एजेंसी मुफ्त का एक ऐसा औजार उपलब्ध करा दे और वह क्षमता मुफ्त में उपलब्ध रहे और दूसरी तरफ आपका काम भी एआई मुफ्त में कर रहा है और उस एआई तक किसी जासूसी एजेंसी की पहुंच है, तो क्या होगा? लोग बहुत किस्म की नाजुक बातें भी एआई पर करते हैं, तो वह कितनी हद तक उनका तौलिया ही खींच जाएगा। इसलिए एआई का अभी सिर्फ मानव प्रजाति पर हमला, एआई का बेकाबू हो जाना, केवल इस खतरे की तरफ अभी लोगों का ध्यान है। हम लोगों का ध्यान एक दूसरे खतरे की तरफ दिलाना चाहते हैं कि जो लोग निजी स्तर पर एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन लोगों ने एआई एजेंटों को अपने कंप्यूटर्स, फाइलों, ईमेल या दूसरे खातों तक पहुंच दे रखी है, वहां एआई दूसरी चीज भी खंगाल सकते हैं। और इसके बाद क्या होगा? इसके बाद कंप्यूटर की, फोन की एक-एक जानकारी, ईमेल बॉक्स की पूरी जानकारी उसको पाने में एआई को कुछ पल ही लगता है और अगर उसे लगेगा कि यह दुनिया के सबसे बड़े शोषण हैं, सबसे बड़े गुंडे हैं, सबसे बड़े सांप्रदायिक हैं और एआई अगर उनको तबाह करना चाहेगा तो?
आपको ध्यान होगा कुछ साल पहले जिस तरह विकीलीक्स के संपादक ने दुनिया भर की सरकारों के ईमेल का भंडाफोड़ कर दिया था कि कौन सी सरकार, की सरकार से किस बारे में क्या-क्या बातें करती है, अगर वैसा ही एआई खुद भंडाफोड़ करना तय कर ले तो क्या होगा? विकीलीक्स ने तो केवल मौजूद दस्तावेजों को उजागर किया था, लेकिन एआई तो एक तस्वीर बनकर सामने रख सकती है कि इस व्यक्ति ने बीते 3 बरस में क्या-क्या काम किए हैं, किस तारीख को क्या पूछा, उसके बाद क्या किया, फिर क्या पूछा, फिर क्या किया। उसे लग सकता है एआई को कि ऐसे व्यक्तियों का भंडाफोड़ करना मानवता के लिए जरूरी है, इंसाफ के लिए जरूरी है। इसलिए आज एआई के सामने अपना दिल और दिमाग, अपनी जरूरत है और अपने कामकाज इन सबको खोलकर रख देने के पहले एक ऐसे दिन की कल्पना जरूर कर लेना चाहिए। अगर एआई आपका भांडा फोड़ करने पर उतारू हो जाए, तो आपके सारे सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल, आपकी फाइलें, वीडियो, फोटो, आपके सारे मैसेंजर, इन सारी जानकारी को मिलाकर आपको लोगों के बीच में किस तरह की तरह से नंगा करके छोड़ सकता है, इस खतरे को समझ लेना बहुत ही जरूरी है।
(यह कॉलम बोलकर टाइप किया गया है. इसके हिज्जे चैटजीपीटी से सुधारे गए. एआई से जुड़ी घटनाओं के तथ्यों में चैटजीपीटी ने कुछ बारीक सुधार भी किए हैं।)
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