19 अक्टूबर 2026
मुम्बई में कल एक व्यस्त इलाके में फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर दो पिस्तौलबाजों ने तमाम लोगों के बीच हमला किया, और टाइगर और उनके ड्राइवर को जख्मी कर दिया, एकदम करीब से आखिरी गोली चलाते हुए पिस्तौल फेल हो गई, और शायद उसी से टाइगर की जान बची। बाद में एक ऑडियो संदेश भेजकर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ओर से इस हमले का दावा किया गया। इसमें अपने आपको गोली चलाने वाला बताने वाले ने कहा कि सलमान खान के साथ जो भी काम करेंगे, उनका यही हाल होगा। अपने को बिश्नोई गिरोह का अनिल पंडित बताने वाले ने यह धमकी दी है कि टाइगर को पहले समझा दिया गया था कि सलमान के साथ काम न करे। उल्लेखनीय है कि लॉरेंस बिश्नोई गिरोह सलमान का इस नाम पर विरोध कर रहा है कि उस पर काले हिरण के शिकार का आरोप है। काले हिरण को बिश्नोई समुदाय पूजनीय मानता है। इसी बात को लेकर इस गिरोह ने दो बरस पहले मुम्बई में एक प्रमुख और चर्चित नेता बाबा सिद्दीकी का कत्ल किया था, और उसे भी सलमान के करीबी होने की वजह से निशाना बनाना बताया गया था। उसके कुछ अरसा पहले इसी गिरोह के लोगों ने सलमान के घर के बाहर गोलीबारी की थी। लेकिन यह गिरोह सलमान से परे भी देश-विदेश में कई तरह के जुर्म करता है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, और महाराष्ट्र में कारोबारियों से रंगदारी मांगना, कत्ल की धमकी देना, और गोलीबारी करना इस गिरोह का आम काम बताया जाता है। गिरोह का सरगना वैसे तो गुजरात की एक कड़ी हिफाजत वाली जेल में है, लेकिन जेल के बाहर इस गिरोह का काम चल ही रहा है। 2022 में पंजाब में एक विख्यात गायक सिद्धू मूसेवाला को गोली चलाकर मार डाला था, और उसमें इसी गिरोह ने जिम्मेदारी ली थी। देश की एक सबसे बड़ी जांच एजेंसी एनआईए के मुकाबले बिश्नोई गिरोह के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग जेलों में बंद रहते हुए भी मोबाइल फोन, और इंटरनेट-कॉलिंग उपकरणों के माध्यम से संपर्क में रहते हैं, और बाहर मौजूद अपने साथियों और शूटरों के माध्यम से जुर्म करते ही रहते हैं।
भारत का यह गिरोह भारत में तो जेल में बंद रहकर भी बेअसर नहीं हुआ है, लेकिन इससे परे दूसरे देशों में भी यह कत्ल और कई दूसरे तरह के जुर्म करता है। कनाडा ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन घोषित किया है। अमरीका ने इस गिरोह पर कई गंभीर संघीय अपराध करने के आरोप लगाए हैं। फ्रांस में भी इस गिरोह के एक आदमी की गिरफ्तारी हुई है। कनाडा सरकार का कहना है कि वहां पर यह गिरोह कत्ल, गोलीबारी, और आगजनी में शामिल है, इसके अलावा कारोबारियों, और प्रमुख दक्षिण एशियाई लोगों से जबरन वसूली भी करता है। कनाडा सरकार का कहना है कि धमकियों और हिंसा से यह समुदायों में दहशत पैदा करता है, इसी साल जुलाई में अमरीका ने योरप के कुछ देशों और कनाडा के साथ मिलकर एक बड़े अभियान में 24 लोगों को गिरफ्तार किया था, इनमें से कुछ को बिश्नोई गैंग से जुड़ा भी बताया गया था। अमरीकी न्याय विभाग ने बिश्नोई गैंग पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने कनाडा में सिक्ख नेता हरदीप सिंह निज्जत की 2023 में हुई हत्या की साजिश की थी। अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी, अपहरण, रंगदारी वसूली में भी अमरीका और कनाडा में यह गिरोह सक्रिय है। अमरीकी न्याय अधिकारियों के अनुसार भारतीय जेल में बंद होने के बावजूद बिश्नोई अवैध मोबाइल फोन, और इंटरनेट-कॉलिंग से अपने नेटवर्क को लीड करते रहता है। अमरीकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन में भी इस गिरोह की वसूली चल रही है।
अब भारत के कई प्रदेशों में चर्चित और लोकप्रिय लोगों पर इस तरह के हमले करना, उनका कत्ल करना, यह एक भयानक नौबत है। देश और कई प्रदेशों की सरकारें जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के सामने असहाय दिख रही हैं कि गिरोह के लोगों की शिनाख्त हो जाने के बाद भी सरकारें इनका धंधा बंद नहीं करवा पा रही हैं, जबकि दुनिया के कई देशों की सरकारें भी इनके पीछे लगी हुई हैं। जिस गुजरात की जेल में लॉरेंस बंद है, वह गुजरात भाजपा का राज है, और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से गुजरात के लिए ही जवाबदेह हैं। ऐसे में देश में इतने खतरनाक हमले करना, इतनी डरावनी धमकियां देना, यह सब जारी रहना हैरान करता है। जिन देशों के साथ भारत के अच्छे रिश्ते हैं, उनमें से पश्चिम के आधा दर्जन देशों ने लॉरेंस गैंग के खिलाफ जुर्म दर्ज हैं, या जांच रिपोर्ट मौजूद हैं। इसके बाद भी हिन्दुस्तान की जेल से जुर्म का यह चलता हुआ साम्राज्य भारत की शान के भी खिलाफ है। जिन जेलों का पूरा नियंत्रण केन्द्र और राज्य सरकार के हाथ है, वहां पर अगर लगातार इस गिरोह के लोगों को संचार-सुविधाएं हासिल हैं, तो यह सरकारों की एक बहुत बड़ी कमजोरी है, जो कि समझ से परे है। ऐसे में पश्चिम के कुछ देशों में भारत पर लगने वाले ऐसे आरोप खबरों में आते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का इस्तेमाल भारत सरकार भी दूसरे देशों में अपने, या देश के विरोधियों को खत्म करने में करती है।
कुछ दशक पहले तक भारत में मुम्बई बम धमाकों का सबसे बड़ा आरोपी, मुम्बई अंडरवल्र्ड का सबसे बड़ा डॉन, दाऊद इब्राहिम इसलिए भारत सरकार की पहुंच से परे रह पाया कि वह भारत से दुश्मनी वाले एक देश पाकिस्तान में रहकर काम करता बताया जाता था। लेकिन लॉरेंस बिश्नोई तो सरकार के काबू से बाहर रहने के मामले में दाऊद से भी बहुत आगे है कि वह भारत की जेल में रहकर भी भारत और दुनिया के कितने ही देशों में कत्ल करवा रहा है। आज जिस तरह मुम्बई में बाबा सिद्दीकी का कत्ल किया गया था, पंजाब में सिद्धू मूसेवाला का, और अब टाइगर श्रॉफ को मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी, उससे भारत में बेकाबू गैंगवार की एक झलक मिलती है, और यह वार मुजरिम गिरोह और सरकार के बीच चल रहा है। देश में रहने-जीने वाले लोगों की हिफाजत सरकार की जिम्मेदारी रहती है। अगर सलमान खान, या किसी और ने शिकार, या कोई और जुर्म किया है, तो उसकी सजा देने के लिए एक अदालती तरीका है। उससे परे अगर कोई सडक़ पर तथाकथित इंसाफ करना चाहे, और इस अंदाज में वसूली-उगाही करे, कत्ल करे, तो लोग कहां जाएंगे? महाराष्ट्र में भी भाजपा की गठबंधन सरकार है, इसलिए वहां होने वाले जुर्म को रोकने की जिम्मेदारी भी इसी सरकार पर आती है। हमें नहीं लगता कि भारत की किसी भी सरकार के विदेशों में जुर्म के ऐसे कोई काम हो सकते हैं, जिसके लिए देश के भीतर ऐसे भयानक जुर्म कर रहे गिरोह को पालने की जरूरत पड़े। फिर भी अगर दूसरे देशों की जांच एजेंसियों, और वहां के न्याय अधिकारियों को लॉरेंस गिरोह, और सरकार के बीच कोई रिश्ता बताना जायज लगता है, सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह कम से कम अपने देश को ऐसे जुर्म से बचाने असरदार कार्रवाई करे। देश-विदेश दोनों ही जगह पर भारत, और इसके प्रदेशों की सरकारों की साख पर जो बट्टा लग रहा है, उसे संभालना चाहिए। सरकारें पूरी तरह अपने कब्जे में, अपनी जेलों में बंद मुजरिमों के जुर्म न रोक पाए, यह हैरान भी करता है।
आज ही दिल्ली पुलिस का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वहां के एक आला अफसर मुम्बई के इस ताजा हमले के संदर्भ में लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र करते हुए कह रहा है कि इस हमले के बाद के संदेश में ‘लॉरेंस बिश्नोई ‘‘साहब’’ का जिक्र था’।
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