संपादकीय
9 सितंबर 2013
उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक हिंसा में दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए हैं, और फौज बुलाकर तैनात की गई है। कुछ दिन पहले यह तनाव तब शुरू हुआ जब हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच लड़की से छेडख़ानी को लेकर तनाव हुआ और एक समुदाय के लोगों ने दूसरे समुदाय के, लड़की के परिवार के दो युवकों को मार दिया। इसके बाद दूसरे समुदाय ने एक बड़ी जाति पंचायत रखी, और उससे लौटते हुए लोगों के साथ दूसरे समुदाय के लोगों का फिर टकराव हुआ, और आसपास के इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा दूर-दूर तक फैल गई। इसको भड़काने में, और हवा देने में वहां पर भाजपा के एक विधायक को गिरफ्तार किया गया है, जिसने अपने फेसबुक पेज पर एक फर्जी वीडियो लगाया और कहा कि देखो मुजफ्फरनगर में क्या हो रहा है। इस वीडियो का शीर्षक था- 'अपनी बहन की इज्जत बचाने की कोशिश कर रहे हिन्दू नौजवान किस तरह मुस्लिम भीड़ द्वारा मार डाले गए।Ó पुलिस का मानना है कि इस वीडियो से भी हिंसा भड़की क्योंकि लोगों ने इसे डाउनलोड करके मोबाइल फोन पर एक-दूसरे को भेजना शुरू कर दिया। और जांच में हकीकत यह निकली कि भाजपा विधायक द्वारा डाला गया यह वीडियो तीन बरस पहले का पाकिस्तान का था जिसमें वहां भीड़ ने दो भाइयों को डकैत समझकर पीट-पीटकर मार डाला था।
लेकिन उत्तरप्रदेश के इस ताजा साम्प्रदायिक दंगे को हम साम्प्रदायिक कम मानते हैं, सरकार की लापरवाही, और निकम्मेपन का नतीजा अधिक मानते हैं। उत्तरप्रदेश उन राज्यों में से है जहां पर एक कुनबे का राज अब दूसरी पीढ़ी में दाखिल हो चुका है, और एक ही परिवार के जाने कितने लोग देश की संसद से लेकर राज्य की विधानसभा तक हैं, सरकार में हैं, किसी दूसरी सरकार का सहारा बने हुए हैं, और इसी नाते किसी कड़ी कार्रवाई से सीबीआई से लेकर अदालत तक बचे हुए हैं। मुलायम सिंह यादव ने अपने अनुभवहीन बेटे अखिलेश यादव को जब सीधे मुख्यमंत्री बना दिया, तो यह संसदीय बहुमत के अहंकार का सुबूत था, न कि कोई सोचा-समझा अच्छा फैसला। और पहले दिन से लेकर अब तक जो कुछ बातें अखिलेश सरकार के बारे में साबित हुई हैं, उनमें से एक उनका निकम्मापन है, नाकाबिलीयत है, और गंभीरता की कमी है। मुलायम के कुनबे के लोग, सरकार के मंत्री, सरकार के अफसर, गंदी, अश्लील और फूहड़ बातें कैमरों के सामने करते हैं, खुलकर साम्प्रदायिकता की बातें करते हैं, और सरकार की कोई पकड़ उन पर नहीं है, न ही मुलायम की पकड़ अपने कुनबे और अपनी पार्टी पर है। जरूरत से अधिक बहुमत किस तरह किसी को तबाह कर सकता है यह देखना हो, तो मुलायम राज देखा जा सकता है। इसके अलावा जो सबसे बड़ी पहचान अखिलेश सरकार की बनी है, वह है तरह-तरह के मुजरिमों और माफिया-कारोबारियों को बचाने के लिए अच्छे अफसरों को कुर्बान कर देने की। नतीजा यह है कि उत्तरप्रदेश में अच्छे अफसरों का हौसला पस्त है, और जो खुशामदी या गलत काम करने को तैयार अफसर हैं, उनका बोलबाला है। ऐसे राज्य में जब कहीं पर साम्प्रदायिक तनाव होता है, तो इस सरकार के मुस्लिम परस्त रूख को देखते हुए कोई अफसर मुस्लिम मुजरिमों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से हिचकते हैं, नौकरी के बीच निलंबित होकर कहां जाएं। लोगों को पिछले कुछ हफ्तों की याद है जब सार्वजनिक जमीन पर एक मस्जिद की अवैध दीवार को लेकर एक अच्छी अफसर दुर्गा नागपाल को निलंबित किया गया। और लोगों को यह भी याद है कि किस तरह अखिलेश की मंत्रियों ने दुर्गा नागपाल के खिलाफ सार्वजनिक माईक पर कैमरों के सामने गालियां बकीं, उसके कुनबे के चरित्र पर गंदी बातें उछालीं। अभी कुछ दिन पहले का लोगों को याद होगा कि देश के सबसे बड़े आतंकवादियों में से एक भटकल की गिरफ्तारी के बाद किस तरह समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव यह सवाल पूछते मिला कि उसे इसलिए गिरफ्तार किया गया है कि वह मुजरिम है, या इसलिए गिरफ्तार किया गया है कि वह मुस्लिम है। इसके बाद मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी को इस मुस्लिम महासचिव को पद से हटाना पड़ा।
आज उत्तरप्रदेश की यह साम्प्रदायिक हिंसा हिन्दू और मुस्लिम समाज के बीच की हिंसा नहीं है। एक तरफ मुस्लिमों को खुश करने के लिए बदनाम समाजवादी पार्टी की बेकार सरकार है, तो दूसरी तरफ मोदी के भेजे हुए अमित शाह की अगुवाई में आज अगर उत्तरप्रदेश का भाजपा का एक विधायक ऐसे जलते हुए मौके पर एक फर्जी वीडियो को डालकर लोगों को भड़काने का जुर्म कर रहा है, तो उसे हम एक छोटा-मोटा जुर्म नहीं मानते। हमारा मानना है कि यह सोची-समझी साजिश के तहत पोस्ट किया गया एक फर्जी वीडियो है, और इतनी मौतों में इसका हाथ जरूर है, और इन मौतों से परे भी साम्प्रदायिक नफरत फैलाने का काम इसने किया है। तो एक तरफ एक ही कुनबे की नालायक सरकार, और दूसरी तरफ बहुत काबिल और गुजरात के खूनी इतिहास वाले विपक्षी अमित शाह की सक्रियता, इन दोनों ने मिलाकर राज्य में एक ऐसी नौबत ला दी है, जिसे काबू में करने की इच्छाशक्ति आज उत्तरप्रदेश में कम ही अफसरों में होगी। उत्तरप्रदेश बाकी देश में भी आने वाले महीनों में एक साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का खतरा बताता है। पाठकों को याद होगा कि कुछ ही दिन पहले केन्द्र सरकार ने राज्यों को बुलाकर दिल्ली में इस खतरे की तरफ से आगाह किया था कि साम्प्रदायिक ताकतें धार्मिक ध्रुवीकरण में लगी दिखती हैं, और इससे सावधान रहने की जरूरत है।









