साइबर अटैक की हालत में क्या होगा?

4अगस्त
संपादकीय
दुनिया की एक बड़ी इंटरनेट चौकसी एजेंसी ने अभी अपनी रिपोर्ट दी है कि किस तरह बहुत से देश, बहुत से मिलिट्री कारखानेदार कम्प्यूटर हैकिंग के शिकार हुए हैं। इनमें जिन देशों के नाम हैं, उनमें हिन्दुस्तान का भी नाम है, और अमेरिकन कनाडा, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताइवान का नाम भी है। अमरीका लगातार अपने देश के भीतर की हैकिंग भी पकड़ते रहता है, लेकिन मैकफ्री नाम की इस एजेंसी ने अभी जो हैकिंग पकड़ी है, वह शायद चीन से हुई है।
भारत में पहले भी ऐसी खबरें आती रही हैं कि उसके सरकारी ऑफिसों में हैकिंग हो रही है, यानी कहीं बैठे हुए कम्प्यूटर सेंधमार यहां के सरकारी कम्प्यूटरों की खुफिया, संवेदनशील जानकारियां चुरा रहे हैं। अमरीकी फौज के हेडक्वार्टर में हर बरस अनगिनत बार हैकिंग होती है और अमरीका ने कुछ ही महीने पहले कहा है कि अगर उस पर साइबर हमला हुआ, तो वह जवाब में फौजी हमला कर सकता है। अब ये तो आखिर तक तय ना होने लायक बात होगी कि साइबर हमला किसे माना जाएगा और कारोबारी सेंधमारी किसे। मतलब यह कि अमरीका ने अपने हाथ एक ऐसा बहाना ढूंढ निकाला है कि जिसके साथ वह किसी पर भी हमला कर सकता है।
लेकिन हमारी फिक्र हिन्दुस्तान जैसे देश को लेकर है जहां लोगों की जिंदगी के रोज के काम कुछ या अधिक दूर तक कम्प्यूटरों और इंटरनेट पर टिक गया है, लेकिन साइबर सुरक्षा की अभी भी किसी को फिक्र नहीं है। देश टेक्नालॉजी पर जितना ज्यादा टिका है, वह उतना अधिक परेशान होगा, लेकिन कुछ देश परेशानी से उबरने की ताकत रखते हैं, और उनकी दमकल गाडिय़ां इंटरनेट पर तेजी से दौड़कर साइबर आग बुझा सकेंगी। लेकिन हिन्दुस्तान में? यहां चोरी और डकैती से लोगों के टेलीफोन टेप करने में हमारी तकनीकी खूबियां चूक जा रही हैं। ऐसे अधकचरे सरकारी इंतजाम से कोई साइबर हमला थम सकेगा? उससे होने वाले नुकसान से उबरा जा सकेगा।
और बात महज सेंध लगाकर जानकारी चुराने की नहीं है। जिस दिन कोई साइबर चोर हमलावर बन जाएगा और तबाही करने लगेगा, उस दिन उसका काम चोरी से बहुत आसान रहेगा लेकिन बहुत भयानक नुकसान वाला भी रहेगा। किसी को एक बांध में लगी पूरी सीमेंट, पूरा लोहा चुराना हो, तो उसे कई साल लग जाएंगे, लेकिन बांध को उड़ा देना हो, तो शायद एक ट्रक विस्फोटक भी नहीं लगेगा। यही हाल साइबर सेंध और साइबर हमले का है। हम पहले भी एक ऐसी नौबत के बारे में लिख चुके हैं जिसमें ऐसे किसी हमले के बाद, बैंकों के, तनख्वाहों के, रेल्वे और विमान रिजर्वेशन के सारे रिकॉर्ड तबाह कर दिए जाएं। जब एटीएम नोट उगलना बंद कर देंगे, बैंक अपने कागजों के बहीखातों से काम एक फीसदी भी नहीं कर पाएंगे, तब क्या होगा? रेल्वे स्टेशनों पर एक घंटे में दंगा होने लगेगा, क्योंकि लोगों को अपनी जिम्मेदारी का और दूसरों के हक का कोई अहसास तो है नहीं। जिस तरह से गणेश को दूध पिलाने की अफवाह ने घंटे भर में ही पूरे देश की अक्ल को लकवा मार दिया था, उसी तरह लोग बैंकों पर सबसे पहले टूट पड़ेंगे और फिर बाकी जगहों पर।
क्या हिन्दुस्तान ऐसे किसी हमले के लिए तैयार है, या फिर जिस तरह भोपाल में एका-एक गैस ने लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया था, वैसा ही कुछ किसी साइबर  हमले की हालात में होगा? यह देश सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार के चलते किसी भी खतरे, नुकसान से निपटने में बहुत कमजोर साबित होगा। और अभी तो अमरीका जैसे ताकतवर और चौकस देश में भी साइबर हमलों और हैकिंग को रोका नहीं जा सक रहा है।
कम्प्यूटरों और इंटरनेट की तरफ बढ़ते चले जा रहे हिन्दुस्तान में कोई इस खतरे के बारे में बात करेगा?

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