24 सितंबर 2026
इन दिनों जापान में चल रहे एशियाई खेलों की एक खबर है जिसकी हेडिंग दिल खुश करने वाली है। ‘75 साल के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ, वो इन 3 बेटियों ने कर दिखाया’। एशियन गेम्स में भारत को निशानेबाजी के एक मुकाबले में स्कीट टीम इवेंट में पहली बार मैडल मिला है। इसके पहले स्कीट निशानेबाजी में अलग-अलग कुछ महिला खिलाड़ी मेडल पा चुकी हैं, लेकिन टीम के मैडल का यह पहला मौका था। इससे परे भी इन दिनों ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुकाबले नहीं होते हैं जिनमें भारत की लड़कियां और महिलाएं मैडल न लाती हों। अभी तो क्रिकेट से लेकर हॉकी तक, बड़े लोगों की टीम से लेकर जूनियर टीम तक जगह-जगह लड़कियां सोना-चांदी लेकर आ रही हैं। लेकिन इसी बीच देश के भीतर लड़कियों की जो आम हालत है, उस पर बराबरी का गौर करने की जरूरत है। अभी बिहार के जमुई में जिस तरह एक नाबालिग लडक़ी को भयानक हिंसा और यौन हमले का शिकार होना पड़ा, वह तो एक घटना थी जिसे ग्रामीण इलाके की कहकर टाला जा सकता है, और अगर आप बिहार में सत्तारूढ़ हैं तो आप इसे छोटी-मोटी कह सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली में, जहां केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही एक ही पार्टी की हैं, जहां पर पुलिस केंद्र सरकार के मातहत काम करती है, वहां शहर के बीचों-बीच एक मंदिर से लौटती नाबालिग कॉलेज छात्रा को पुलिस बनकर 3 लोगों ने बगीचे में रेप किया, और इसके बाद दिल्ली की कॉलेज छात्राएं जिस दहशत में हैं, वह गौर करने लायक है। दिल्ली के बीचों-बीच कालकाजी मंदिर में पूजा के लिए गई इस लडक़ी को पास के आस्थाकुंज पार्क में हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों के बलात्कारियों ने खुलेआम रेप किया। समाचार बताता है कि दिल्ली में इस महीने नाबालिग से रेप का यह तीसरा मामला है। अभी दस दिन पहले ही एक नाबालिग की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी, उसके पहले 10 बरस की बच्ची का रेप हुआ था।
आज की खबर है कि ओडिशा के एक तीर्थ स्थान जाते हुए मोटरसाइकिल सवार एक पर्यटक दंपत्ति पर यौन हमला किया गया और उसका वीडियो बनाया गया। इसके दो दिन पहले से उत्तर भारत का एक वीडियो तैर रहा है, जिसमें मोटरसाइकिल पर पीछे साड़ी पहनकर बैठी एक महिला के बदन पर कई नौजवान टूटे पड़े हैं, कुछ कपड़ों में हाथ डाल रहे हैं, कुछ वीडियो बना रहे हैं। उत्तर भारत को बहुत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटक केंद्र होने का गर्व रहता है, और ओडिशा तो एक पर्यटक राज्य है ही। इसके बाद भी अगर किसी भी बालिग या नाबालिग जोड़े पर, या अकेली लडक़ी-महिला पर ऐसे यौन हमले धड़ल्ले से जारी हैं, तो यह बात तय है कि ऐसी हर हिंसा इन प्रदेशों की पर्यटन संभावनाओं को घटाती चलेगी।
दिल्ली के बीचों-बीच एक छात्रा के साथ हुए गैंगरेप के बाद उस घने इलाके में रहकर पढ़ाई करने वाली 20 हजार छात्राएं दहशत में हैं। दिल्ली का एक प्रमुख कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज, ऐसी डरी लड़कियों के लिए ऑनलाइन क्लासेस ले रहा है, क्योंकि लड़कियों की बाहर निकलने की हिम्मत नहीं है। एक टीवी चैनल ने इस कॉलेज की बाहर की छात्राओं को उनके चेहरों सहित कैमरे पर इंटरव्यू किया तो उनका कहना था कि वे कॉलेज की दीवारों के भीतर ही सुरक्षित हैं, और जैसे ही वे बाहर निकलती हैं, कार सवार लोग उन्हें ले जाने के लिए मोल-भाव करने लगते हैं, सडक़ किनारे से शोहदे सीटियां बजाने लगते हैं और फिकरे कसने लगते हैं, और एक लडक़ी ने कैमरे पर इस बात को एक से अधिक बार कहा कि दिनदहाड़े सडक़ किनारे ऐसे लडक़े उन्हें दिखाकर हस्तमैथुन करते हैं। और यह पढ़ते हुए यह याद रखें कि यह दिल्ली है।
दिल्ली में देश के किसी भी दूसरे महानगर या उपमहानगर के मुकाबले अधिक अनुपात में पुलिस मौजूद है। महानगरों में यह अकेला है जहां पुलिस सीधे केंद्र सरकार के मातहत है। इस शहर में अंतरराष्ट्रीय आवाजाही और बसाहट हिंदुस्तान के किसी भी दूसरे महानगर के मुकाबले कई गुना अधिक है। देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए दिल्ली सबसे बड़ा केंद्र है। इसके बावजूद हाल यह है कि यहां बलात्कार की घटनाओं से परे भी लड़कियों के साथ बदसलूकी इस दर्जे की है। और यह कोई नई बात नहीं है। दिल्ली में बस और मेट्रो में सफर करने वाली लड़कियों और महिलाओं को यह मालूम है कि सफर पूरा होने के पहले कितने मर्दाने हाथ उन्हें टटोल चुके रहते हैं। दिल्ली से लेकर देश के गांवों तक महिलाओं का जो हाल है, वह बताता है कि कानून, लोकतंत्र, तथाकथित मानवता और महिला के प्रति सम्मान बहुत दूर तक खत्म हो चुका है। जिन लोगों को यह लगता है कि यह देश भारत माता माना जाता है, जगह-जगह देवी प्रतिमाओं की कई-कई दिन पूजा होती है, वहां पर महिलाओं को और किसी अतिरिक्त सम्मान की जरूरत क्या है? लेकिन दिक्कत यह है कि निर्जीव तस्वीर और प्रतिमाओं से परे जब अजन्मी या जन्मी लड़कियों या महिलाओं के साथ बर्ताव की बात आती है तो यह देश हिंसा में तालिबान को टक्कर देने लगता है। कहीं खेल संघों के पदाधिकारी लड़कियों का शोषण कर रहे हैं तो कहीं स्कूल शिक्षक ही अश्लील हरकतों में व्यस्त हैं। हमने आज की बात अंतरराष्ट्रीय खेल मुकाबलों में लड़कियों की कामयाबी से शुरू की थी, और वहां से भटकते हुए हम लड़कियों पर यौन हिंसा तक आ गए हैं। यह भटकाव सोचा-समझा है, और हम इस देश को याद दिलाना चाहते हैं कि लड़कियों को जितने तरह की हिंसा और जितने तरह के शोषण से गुजरना पड़ता है, उसे देखते हुए हैरानी होती है कि लड़कियां इतने मैडल कैसे ला पाती हैं। एक लडक़ी के रूप में जब वे लगातार खतरे में जीती हैं, तो कैसी दिमागी हालत में वे मुकाबलों में उतरती होंगी। देश की राजधानी एक बहुत बड़ी मिसाल रहती है, राजधानी को सबसे सुरक्षित माना जाता है, और वहां के सबसे नामी-गिरामी कॉलेज की लड़कियां जब घर से निकलने और कॉलेज जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहीं, तो खिलाड़ी लड़कियां भी तो ऐसे ही शहरों में खेल की तैयारी करते हुए आगे बढ़ती हैं। यह सिलसिला देश में एक परले दर्जे की अराजकता है। कहीं भीड़ की अराजक यौन हिंसा सामने आती है, तो कहीं दो-चार लोग भी मौका मिलते ही बलात्कार पर उतारू हो जाते हैं। हमारा यह भी मानना है कि यौन हिंसा की घटनाओं में से 10-20 फीसदी से अधिक की रिपोर्ट नहीं होती होगी, क्योंकि पुलिस भी शिकायतकर्ता महिलाओं से बदसलूकी के लिए बदनाम है।
किसी देश को अपनी संस्कृति पर गर्व हो सकता है, लेकिन ऐसे गर्व पर कुछ आत्ममंथन भी करना चाहिए, कुछ आत्मविश्लेषण करना चाहिए। जहां लड़कियां जुर्म और जुल्म के अंदेशे में जीती हों, उस देश को गर्व करने के लिए आईने में अपने को देखते हुए खासा मेकअप लगता होगा। समाज में लड़कियों को हिफाजत तभी मिल सकती है जब सरकारें उन पर होने वाले जुल्म और जुर्म को बड़ी कड़ी सजा दिला सकें, और अदालतें इसमें तेजी बरत सकें। आज तो हालत यह है कि जमानत पाकर बाहर निकले बलात्कारियों से अपमानित और उनकी दहशत में शिकायतकर्ता लडक़ी या महिला ही खुदकुशी कर रही हैं। इस गर्वीले देश को आईने के सामने जाते हुए पेशेवर मेकअप करने वालों से सहायता लेनी चाहिए।
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