रविशंकर को तुरंत गिरफ्तार करके राष्ट्रद्रोह का केस चले

संपादकीय
6 मार्च 2018


कल तक जो आदमी अयोध्या के मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर मध्यस्थ बनने का दावा कर रहा था, आज उसने अपना असली रंग दिखा दिया। अपने-आपको श्रीश्री कहने वाला रविशंकर अपने असली तेवरों में आया और उसने कहा कि अयोध्या विवाद अगर नहीं सुलझा, तो देश सीरिया में बदल जाएगा। लेकिन रविशंकर का यह कहना दोनों तबकों के लिए नहीं था, अगले ही वाक्य में इस आदमी ने यह साफ किया कि उसकी नीयत क्या है। रविशंकर ने कहा कि अयोध्या मुस्लिमों का धार्मिक स्थल नहीं है। उन्हें इस धार्मिक स्थल पर अपना दावा छोड़कर मिसाल पेश करनी चाहिए, वरना सत्यानाश हो जाएगा। रविशंकर ने इस मामले का निपटारा अदालत से होने से माहौल बिगडऩे की आशंका जताई है। उन्होंने समझौते का विरोध करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विवाद नहीं सुलझा तो देश में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे। 
अब पल भर के लिए यह समझने की जरूरत है कि सीरिया में हालात क्या हैं? वहां पर धर्मांध इस्लामी आतंकी आईएसआईएस के हथियारबंद लोग बच्चियों को कैद कर रहे हैं उनके साथ बलात्कार कर रहे हैं, गुलामों की मंडी लगा रहे हैं, वहां पर इन गुलाम लड़कियों की नीलामी कर रहे हैं, ऐसी भी खबरें हैं कि वे मानव शरीर से अंग निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी बिक्री कर रहे हैं, और जाहिर तौर पर महिलाओं से बलात्कार को इस्लाम के तर्क देकर जायज ठहरा रहे हैं। ऐसे सीरिया की मिसाल देकर भारत के मुस्लिमों को धमकी देने वाले इस रविशंकर की नीयत क्या है? कहने को यह सफेदपोश अपने-आपको आर्ट ऑफ लिविंग का गुरू बताता है, लेकिन वह अगर हिंदुस्तान को तबाह करने की इतिहास की सबसे बड़ी धमकी देकर मुस्लिमों से अयोध्या की विवादित जगह पर दावा छुड़वाना चाहता है, तो क्या यह राष्ट्रद्रोह नहीं है? क्या यह धमकी एक ऐसा बड़ा जुर्म नहीं है जिस पर सुप्रीम कोर्ट खुद ही नोटिस लेकर इस आदमी को जेल भिजवाए? हिंदुस्तान जैसे लोकतंत्र में यह स्वघोषित गुरू अगर सीरिया बनाने की धमकी देता है, और उस पर भी अगर सुप्रीम कोर्ट चुप रहता है तो वह अनदेखी का मुजरिम ही इतिहास में दर्ज होगा। 
ऐसा भी नहीं है कि रविशंकर की नीयत पहले से दिखती न रही हो। यह आदमी एक पूरी तरह से राजनीतिक और बल्कि चुनावी एजेंडा लेकर चलने वाला इंसान है जिसने कर्नाटक की राजधानी में बसे रहकर भी वहां के भाजपा के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की सरकार के भ्रष्टाचार के बारे में कभी मुंह भी नहीं खोला, और यूपीए के भ्रष्टाचार पर बयान देने के लिए जो दिल्ली तक चले आता था। जिसने अपने एक कार्यक्रम में यमुना तट को तबाह करते हुए देश की ग्रीन अदालत को खुली चुनौती दी, अदालती आदेशों के बावजूद अपना कार्यक्रम किया, जुर्माना भरने से मना किया, और कानून के खिलाफ इस कदर खड़ा हुआ कि देश हक्का-बक्का रह गया। ऐसा ही आदमी आज हिंदुस्तान को सीरिया बनाने की धमकी देते हुए मुस्लिमों से मस्जिद का दावा छोड़ देने को कह रहा है। यह सिलसिला भयानक है, यह हिंदुस्तानी संस्कृति के कत्ल सरीखा है, और भारत के लोकतंत्र को खुली धमकी भी है। हमारा ख्याल है कि अदालतों में जो सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रहते हैं, उन्हें बिना देर किए सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन फाईल करनी चाहिए, और रविशंकर की तुरंत गिरफ्तारी, और उस पर राष्ट्रद्रोह के मुकदमे की अपील करनी चाहिए। रविशंकर का यह बयान न सिर्फ इस देश में साम्प्रदायिकता को भड़काने वाला है, बल्कि एक पूरे समुदाय को धमकी देने वाला भी है, कानून के राज को और अदालत को खारिज करने वाला भी है। यह सिलसिला और लोकतंत्र दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते। दुनिया में जब कभी किसी एक धर्म से जुड़े मुजरिम कोई बड़ा जुर्म करते हैं, तो उस धर्म से जुड़े लोगों से यह उम्मीद की जाती है कि वे उसका विरोध भी करें। आज हिंदुस्तान में जिस तबके के हक के लिए रविशंकर ऐसा बड़ा राष्ट्रद्रोह का बयान दे रहे हैं, उस तबके को भी सोचना चाहिए कि क्या उसने अपनी ऐसी हिंसक वकालत करने का वकालतनामा रविशंकर को दिया है जो कि धर्म के नाम पर बच्चियों से बलात्कार और उनकी बिक्री की मिसाल दे रहा है? आज हिंदुस्तान में इस बहुसंख्यक हिंदू तबके के अमनपसंद लोगों को चाहिए कि वे मुंह खोलकर इस रविशंकर को खारिज करें जो कि उनका ठेकेदार बना बैठा है। (Daily Chhattisgarh)

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