संपादकीय
3 अगस्त 2018

अमरीका की सबसे बड़ी कम्प्यूटर कंपनी एप्पल दुनिया की पहली हज़ार अरब (एक ट्रिलियन) डॉलर की कंपनी बन गई है। खबरों में इस दौलत का अंदाज बताने के लिए यह कहा है कि इस एक कंपनी की दौलत टर्की या स्विटजरलैंड की पूरी अर्थव्यवस्था से अधिक है, यह देश दुनिया के सौ से अधिक देशों की अर्थव्यवस्था से बड़ी है, और इसकी दौलत से पाकिस्तान जैसी तीन अर्थव्यवस्थाएं खरीदी जा सकती हैं। अब ये तमाम मिसालें बहुत काम की इसलिए नहीं रहती हैं कि अब दुनिया में कारोबार अपने आपमें देश से बड़े हो चुके हैं, और यह कोई बहुत नई बात नहीं है। किसी एक कंपनी का इतना बड़ा विकराल आकार जरूर नई बात है, लेकिन पहले भी बहुत से कारोबार दुनिया के अधिकतर देशों से बड़े हो चुके थे।
किसी एक ब्रांड या कंपनी की कामयाबी की चर्चा का यहां एक ही मकसद है कि एप्पल को देखकर दुनिया में बाकी कारोबार, या कि बाकी किसी भी किस्म के पेशे या काम में लगे हुए लोग कुछ सीख सकते हैं। इस कंपनी के सामानों का इस्तेमाल करने वाले लोग इससे बंधे रह जाते हैं। उसके बाद वे शायद ही दूसरी कंपनी का सामान इस्तेमाल करते हों। लेकिन यह नौबत बहुत आसान नहीं रहती। कोई कंपनी लगातार अपने सामानों को, और तकरीबन हर सामान को इतना अच्छा बनाए कि बाजार में उसका कोई मुकाबला न हो तो यह छोटी बात नहीं रहती। इसके पीछे कंपनी की दो खूबियां उभरकर दिखती हैं, एक तो यह कि इसके कम्प्यूटर, फोन, या संगीत उपकरण इस्तेमाल करने वाले लोगों की जरूरतों की कल्पना से आगे बढ़कर उन्हें सामान पेश करना। और दूसरी बात यह कि उन सामानों को इतनी ऊंची क्वालिटी का बनाना कि वे बाजार में अपने दर्जे में एकाधिकार कायम कर सकें। मजे की बात यह है कि अमरीका की यह सबसे बड़ी कंपनी अपना एक भी सामान अमरीका में नहीं बनाती, और सारे सामान दूसरे देशों में बनते हैं। इसके बाद भी उनकी क्वालिटी पर इस कंपनी का कंट्रोल देखने लायक है। कल्पनाशीलता, और क्वालिटी। इन दो सरल और सहज बातों ने इस कंपनी को आसमान पर पहुंचाया हुआ है, और इसका ऊपर बढऩा जारी है। इसके मुकाबले काफी कम दाम पर फोन और कम्प्यूटर बाजार में मौजूद हैं, लेकिन इसने एक अलग ग्राहक-तबका बनाया है जो कि अधिक दाम देने को तकलीफदेह नहीं पाता।
दुनिया में ऐसे कितने ब्रांड हैं जिनके नए सामानों को जब कंपनी मीडिया के मार्फत दुनिया के सामने पेश करती है, तो पूरी दुनिया में लोग जागकर देखते हैं कि किस नए मॉडल में कौन सी नई बात रहेगी, कौन सा नया सामान रहेगा। लोगों को यह भी याद रखने की जरूरत है कि यही एप्पल कंपनी कोई दो दशक पहले दीवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन उसके बाद से इसने वह तरक्की की है कि 2007 में आई-फोन बाजार में आया था और उसके बाद से कंपनी के शेयरों में 1,100 फीसदी का उछाल आया है। पिछले साल तो शेयरों की कीमत तकरीबन एक-तिहाई तक बढ़ गई। अगर कंपनी की स्थापना के साल 1980 से अब तक शेयरों की कीमत 50,000 फीसदी तक बढ़ गई है। लेकिन यह कारोबारी तरक्की बाजार के गलत तरीकों में से कुछ के लिए भी तोहमत झेलती रही, और वहां पर आकर यह किसी भी दूसरी कामयाब कंपनी की तरह महज कारोबारी फायदा देखते हुए दूसरे देशों में सस्ते मजदूर इस्तेमाल करने के विवाद से भी घिरी रही।
लेकिन इस बारे में आज यहां पर चर्चा का मकसद यह है कि जिंदगी के किसी भी दायरे में लोग अगर कल्पनाशीलता और उत्कृष्टता, इन दोनों का ख्याल रखते हैं, उसके साथ मेहनत करते हैं, तो वे अपने आपसे आगे बढ़ सकते हैं, दूसरों से भी आगे बढ़ सकते हैं। एप्पल ने एक ऐसे बाजार में आसमान को छुआ है जिसमें उसके हर सामान के बहुत से विकल्प मौजूद थे, और उससे बहुत सस्ते भी थे। लेकिन अपनी खूबियों और अपनी क्वालिटी के चलते उसने यहां तक का सफर पूरा किया है, और इससे बाकी तमाम लोग नसीहत ले सकते हैं, सबक ले सकते हैं। (Daily Chhattisgarh)
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