औरत की पोशाक पर आदमी की मनमर्जी..

संपादकीय
31 अगस्त 2018


दुनिया की एक सबसे महान टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने एक बच्ची को जन्म देने के बाद अपनी मेडिकल जरूरतों के मुताबिक पूरे बदन को ढांकने वाली एक ऐसी पोशाक पहनना शुरू किया जिससे उनके बदन में रक्त संचार ठीक से हो सकता था, और खून में थक्के जमने का खतरा घटता था। काले रंग की पूरे बदन की इस पोशाक को फ्रांस में दुनिया के एक सबसे बड़े टूर्नामेंट, फ्रेंच ओपन, करवाने वाले अधिकारियों ने खेल के खिलाफ माना, और सेरेना पर यह बंदिश लगा दी कि वह ऐसी पोशाक पहनकर मैच नहीं खेल सकती। नतीजा यह हुआ कि उसे आखिरी वक्त में दूसरे किस्म की पोशाक पहननी पड़ी। और टेनिस के नियमों में मर्दानगी के राज के आलोचक इसे एक बुरा फैसला मान रहे हैं, और उनका कहना है कि पोशाक की ऐसी रोक-टोक महिलाओं पर ही लादी जाती है। दूसरी तरफ पूरी दुनिया के टेनिस में महिलाओं के ऐसे छोटे कपड़े पहनने पर कोई रोक नहीं है जिससे उनका बदन उघड़ा रहता है, और उनकी तस्वीरें आमतौर पर वैसे ही पल की छपती हैं जब उनके कपड़े उठे रहते हैं, या उड़ते रहते हैं। 
सेरेना विलियम्स एक अश्वेत खिलाड़ी हैं, और उन्हें अपने से हारने वाली बहुत सी गोरी खिलाडिय़ों से तरह-तरह की बुरी बातें सुनने की आदत भी पड़ी हुई है। इनमें से कुछ ने उन्हें जानवरों की तरह भी कहा है, क्योंकि वे सेरेना की ताकत का मुकाबला नहीं कर पातीं। किसी खेल में दुनिया की सबसे महान खिलाड़ी बन जाने के बाद भी, मां बनने के बाद की मेडिकल-मजबूरी को अनदेखा करके जब टेनिस के ठेकेदार इस तरह का हुक्म लादते हैं, तो उससे औरत की मर्जी के खिलाफ कुछ करने की मर्द की हसरत भी दिखती है, और एक अश्वेत के लिए हिकारत भी दिखती है। यह अलग बात है कि सेरेना ने इसके खिलाफ कोई मुद्दा बनाने से मना कर दिया है, और उनके समर्थन में ट्विटर पर किसी ने फ्रेंच ओपन के आयोजकों के लिए बड़ी खूब बात लिखी है, और कहा है कि सेरेना टेनिस खिलाड़ी नहीं हैं, वे खुद टेनिस हैं। फ्रांस की एक दूसरी टेनिस खिलाड़ी को अभी अमरीका में यूएस ओपन टूर्नामेंट के दौरान आयोजकों की ओर से एक नोटिस दिया गया क्योंकि उन्होंने गर्मी और पसीने से परेशान होकर एक ब्रेक में खुले में ही अपना टी-शर्ट ठीक करने की कोशिश की थी। लेकिन इस खिलाड़ी ने भी इस नोटिस का बुरा नहीं माना, और कहा कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने सेरेना से जो किया है, वह इससे दस हजार गुना अधिक बुरा बर्ताव है। इस फ्रेंच खिलाड़ी ने कहा कि फ्रांसीसी टेनिस अधिकारी किसी और युग में जी रहे हैं, और वे सेरेना के कपड़ों के बारे में ऐसी बेहूदी बातें कर सकते हैं। 
आज खेलों से लेकर हॉस्टलों तक लड़के और लड़कियों के अधिकार बराबर करने को लेकर पूरी दुनिया में संघर्ष चल रहा है। फ्रांस और अमरीका से दूर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में छात्राएं हड़ताल पर हैं क्योंकि वहां हॉस्टल में छात्रों को देर रात तक बाहर रहने की छूट है, और छात्राओं को उनसे घंटों पहले पहुंचने की बंदिश है। औरत और मर्द की गैरबराबरी का यह सिलसिला सदियों पुराना है, और वह आसानी से खत्म नहीं होने वाला है। अभी दो दिन पहले ही एक जैन संत ने लड़कियों को सामान बताते हुए उन्हें ही तमाम सेक्स-हमलों के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया था। दुनिया में बराबर के हक की लड़ाई जल्द खत्म होने वाली नहीं है। खेलों में भी लड़कियों की पोशाक पर जिस तरह की पुरूषवादी सोच हावी है उसके खिलाफ जगह-जगह आवाज उठनी चाहिए। सेरेना विलियम्स ने अपने लगातार चल रहे मैचों के बीच, एक देश से दूसरे देश भागते हुए, फ्रेंच टेनिस अधिकारियों के खिलाफ कुछ कहा नहीं है, लेकिन इस फैसले ने दुनिया भर से उनके लिए हमदर्दी और समर्थन जुटा दिया है। (Daily Chhattisgarh)

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