महंत की चुनौतियां

संपादकीय 
4 जून 2013
बस्तर के नक्सल हमलों में अपने दो बड़े नेताओं सहित बहुत से लोगों को खोने के बाद कांगे्रस पार्टी अब फिर छत्तीसगढ़ में काम शुरू कर रही है। इस राज्य से केंद्र में अकेले मंत्री, और यहां के अकेले कांगे्रसी लोकसभा सदस्य डॉ. चरणदास महंत को छत्तीसगढ़ कांगे्रस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ-साथ दूसरा बड़ा जिम्मा पार्टी के एक भूतपूर्व विधायक भूपेश बघेल को दिया गया है।
नक्सलियों का शिकार हुए पिछले प्रदेश कांगे्रसाध्यक्ष नंद कुमार पटेल ने अपने कार्यकाल में कांगे्रस को एक मजबूत विपक्ष बनाने की खाशी कोशिश की थी। वे भाजपा से पार पाने की तरफ तो बढ़ रहे थे लेकिन अपनी खुद की पार्टी की गुटबाजी उनकी रफ्तार के पांवों में बेडिय़ां बनी रहीं। यह शायद अकेला ऐसा प्रदेश होगा जहां कांगे्रस की गुटबाजी की खबरों में, कांगे्रस की बातचीत में, संगठन-खेमा, और जोगी-खेमा, जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं। बाकी पार्टी से बिल्कुल ही  अलग चलते हुए भूतपूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपनी पार्टी के मंचों पर भी यह साबित करते रहे कि पार्टी में उनका सोनिया गांधी के अलावा किसी से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी के बाकी नेताओं और पार्टी संगठन के लिए उनकी बेरूखी और हिकारत मंच और माइक से इतनी बार दर्ज हो चुकी है, कि उसकी हद नहीं।
एक बार पहले भी प्रदेश कांगे्रस के मुखिया रह चुके महंत को उस वक्त जोगी के आक्रामक विरोध के चलते बेवक्त और बेवजह हटाया गया था। और कांगे्रस पार्टी के ताजा मुखिया के रूप में यही मोर्चा महंत के लिए चुनौती है, भाजपा नहीं। भाजपा अपने मुख्यमंत्री की पीठ पर सवार होकर तीसरी बार भी उम्मीद से है, लेकिन बगल में तैरने की कोशिश करने जा रही कांगे्रस के पांवों को उसके अपने पंजे ही पीछे खींचने के आदी हैं। कांगे्रस इस नौबत से कैसे उबर सकती है, यह लाख रूपये का सवाल है।
डॉ. चरणदास महंत से बेहतर पसंद छत्तीसगढ़ कांगे्रस के लिए और कुछ नहीं हो सकती थी। चुनाव को वक्त चाहे कम बचा हो, अपनी पार्टी के चुनाव में लीड करने की हर खूबी उनमें है। हम उनकी जाति और अनुभव की जानी-पहचानी पुरानी बातों को यहां दुहराना नहीं चाहते, लेकिन वे आज मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेंगे। नक्सल हमले की जिम्मेदारी की वजह से राज्य में भाजपा का खासा नुकसान हुआ है। उनका जो विकास-रथ डॉ. रमन सिंह पूरे प्रदेश में ले जा रहे थे, वह थम गया है। उसके पहले भी भाजपा के बहुत से मंत्रियों और विधायकों के हारने के दावे जानकारों में चल ही रहे थे। अब ताजा हालात में कांगे्रस की चुनावी संभावनाएं भाजपा से बहुत अलग नहीं दिखतीं। देखना यह है कि चरणदास महंत को काम कितना करने दिया जाएगा। कांगे्रस, भाजपा से तो जीत सकती है, लेकिन अपने भीतर की जीत-हार के बाद उसमें कोई दमखम बचा रहेगा, तो ही।
हम चुनाव से परे भी देश-प्रदेश में मजबूत विपक्ष के हिमायती हैं। इस भ्रष्ट लोकतंत्र में अगर सवाल लेकर विपक्ष खड़ा न रहता हो, तो सत्ता बेलगाम हो जाती है। जनता के मुद्दे धरे रह जाते हैं और राज्यसभा में विपक्ष के मुखर नेता अरूण जेटली का मुंह भी क्रिकेट माफिया पर खुलना बंद हो जाता है। इसलिए देश-प्रदेश में किसी की भी सत्ता हो, मजबूत विपक्ष जरूरी है। छत्तीसगढ़ कांगे्रस को ऐसे नुकसान के बाद उबरकर मजबूत बनने के लिए हमारी शुभकामनाएं।

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