उत्तरप्रदेश से उठती साम्प्रदायिकता बाकी देश को भी झुलसाएगी...

संपादकीय
28 जनवरी 2018


उत्तरप्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस के दिन शुरू हुई हिंसा का तनाव अब तक जारी है। वहां पर हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच जवाबी तोडफ़ोड़ और आगजनी चल रही है, और पुलिस की गोली से एक हिन्दू नौजवान की मौत के बाद अस्पताल में उसकी मौत का तनाव भी कायम है। हिन्दू समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस नौजवान को शहीद का दर्जा दिया जाए। जिले के पुलिस एसपी सुनील सिंह का कहना है कि कुछ लोग बाईक पर तिरंगा रैली कर रहे थे, और एक खास जगह पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ भड़काऊ नारेबाजी की, इसके बाद बात बढ़ी। अलग-अलग समाचारों में यह कहा जा रहा है कि तिरंगे और भगवे झंडे लेकर एक हिन्दू संगठन से जुड़े सौ नौजवान मोटरसाइकिलों पर तिरंगा रैली निकाल रहे थे, जब यह रैली एक मुस्लिम इलाके में पहुंची तो वहां पर वंदे मातरम कहना होगा के नारे लगाए गए। इसके बाद दोनों पक्षों में तनाव की खबर है, और फिर पथराव हुआ, पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
इस तनाव को देखते हुए यह लगता है कि राज्य सरकार अपने इलाके में कानून कायम नहीं रख पा रही है। किसी मुहल्ले में पहुंचकर इस तरह की नारेबाजी सत्ता से जुड़े हुए संगठन के लोग करते हैं, तो इसे महज एक संगठन की जिम्मेदारी नहीं कहा जा सकता। सत्ता चलाने वाले लोगों पर अपने लोगों को काबू करने का जिम्मा भी रहता है। जब देश के आधा दर्जन से अधिक राज्यों में एक फिल्म को लेकर सत्ता से जुड़े संगठन हिंसा और आगजनी कर रहे थे, तब छत्तीसगढ़ कुछ तस्वीरों को सुलगाने से परे पूरी तरह शांत रहा, इसलिए कि सत्ता ने किसी संगठन को हिंसा की छूट नहीं दी। उत्तरप्रदेश में आज भगवाकरण के सैलाब के चलते हालत यह है कि एक साम्प्रदायिक तनाव लगातार बना हुआ है। वहां ऐसा माहौल है कि हज हाऊस के हरे रंग को भी भगवा कर दिया गया, और विवाद बढऩे पर सरकार को इसे दुबारा हरा करवाना पड़ा। ऐसे माहौल में सम्प्रदायों के बीच, जातियों के बीच तनाव बढ़ते चल रहा है, नफरत पैदा की जा रही है, सत्ता में बैठे लोग ऐसी जुबान बोल रहे हैं कि उत्तरप्रदेश मानो एक धर्मराज्य बन गया है। ऐसे माहौल के चलते सत्ता को नापसंद दूसरे धर्म के लोग अपने आपको दूसरे दर्जे का नागरिक भी मानने लगते हैं, और ऐसे माहौल में तनाव को भड़कने में अधिक वक्त नहीं लगता।
गणतंत्र दिवस के दिन जब देश में संविधान के लागू होने की सालगिरह मनाई जा रही थी, तब किसी अल्पसंख्यक मुस्लिम मुहल्ले में पहुंचकर भड़काऊ नारेबाजी करने का नतीजा हिंसा शुरू होने में होना ही था। यह सिलसिला देश को बांटकर रख देगा, अगर इसे बाकी राज्यों में भी बढ़ावा दिया जाएगा। लोकतंत्र में इस बात को समझने की जरूरत है कि बहुसंख्यक वर्ग की साम्प्रदायिकता के बाद लोकतंत्र में किसी तरह की अमन बाकी नहीं रह सकतीं। सत्ता के साथ जो जिम्मेदारी आती है उसे योगी आदित्यनाथ को सीखना और समझना होगा। आज उत्तरप्रदेश को भगवा तो रंगा जा सकता है, लेकिन ऐसे तनाव के चलते उस प्रदेश का कोई विकास नहीं हो सकता। आखिर में जाकर योगी आदित्यनाथ के नाम पर आर्थिक विकास के आंकड़े दर्ज होंगे कि उन्होंने प्रदेश को किस तरह के बदहाल में लाकर छोड़ा है। और इस प्रदेश से उठने वाली साम्प्रदायिकता बाकी देश को भी झुलसाएगी। इस बारे में भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर सोचना चाहिए, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी सोचना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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