बात महज उत्तर कोरिया के तानाशाह की नहीं है...

संपादकीय
1 जनवरी 2018


कई दशक पहले जब दुनिया में परमाणु हथियारों के खिलाफ एक आंदोलन चलता था, और बहुत से देश ऐसे निशस्त्रीकरण के खिलाफ उसमें शामिल थे, तो लोगों को इसका महत्व समझ नहीं आता था। आज जब उत्तर कोरिया का एक सनकी दिखता तानाशाह यह कहता है कि पूरे का पूरा अमरीका उसके परमाणु हथियारों की पहुंच के भीतर निशाने पर है, और परमाणु हमले की बटन उसकी मेज पर लगी हुई है, तो दुनिया एक अलग किस्म के खतरे के मुहाने पर खड़ी नजर आती है। अमरीका ने चारों तरफ से उत्तर कोरिया के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाकर देख लिया, संयुक्त राष्ट्र को उसके खिलाफ सहमत कराकर देख लिया, लेकिन न तो उत्तर कोरिया की बददिमागी पर कोई काबू पाया जा सका, और न ही उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर कोई रोक लग सकी। दूर तक मार करने वाली मिसाइलें भी साथ-साथ बनाकर उत्तर कोरिया दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे अलोकतांत्रिक परमाणु-देश बन गया है।
दुनिया में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का महज एक ही मामला इतिहास में दर्ज है, जापान में हिरोशिमा-नागासाकी पर अमरीका द्वारा गिराए गए बम का। उससे हुई तबाही ने दुनिया की चेतना को हिलाकर रख दिया था, और लोगों ने हथियार बनाने बंद तो नहीं किए थे, लेकिन वे यह जरूर समझ गए थे कि परमाणु हथियार अगर कोई तीसरा विश्व युद्ध शुरू करेंगे, तो हो सकता है कि वह दुनिया के खात्मे का दिन भी हो। और बात महज देशों के बीच परमाणु युद्धों की नहीं है, बात परमाणु हथियारों की है जिन्हें कोई आतंकी समूह, कोई कट्टरपंथी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आज पाकिस्तान जिस तरह से फौजियों और कट्टरपंथियों के दबावतले दम तोड़ता लोकतंत्र दिख रहा है, ऐसे में यह जायज सवाल उठता है कि वहां के परमाणु हथियार ऐसे समूहों के काबू के बाहर कब तक रहेंगे? कल के दिन फौज से परे भी कोई आतंकी समूह अगर ऐसे हथियारों तक पहुंच जाएं, और उनका आत्मघाती इस्तेमाल करने पर उतारू हो जाएं, तो पाकिस्तान और भारत दोनों के बीच किस तरह का परमाणु तनाव हो सकता है?
उत्तरी कोरिया अमरीका को इतने तरह के हमले की धमकियां इतने बार दे चुका है, और वह एक सचमुच का खतरा न सिर्फ अमरीका पर, बल्कि जापान और पड़ोस के दक्षिण कोरिया पर भी दिखता है। ऐसे में  उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन जितने ही युद्धोन्मादी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी दिखते हैं, और उतने ही सनकी भी दिखते हैं। ऐसे में इन दो देशों के बीच परमाणु तनाव आसपास के और किन देशों को लपेट सकते हैं, इसका पूरा अंदाज लगाना न बहुत आसान है, और न ही बहुत मुश्किल भी। ऐसे में आज एक बार फिर परमाणु हथियारों के पूरी तरह खात्मे की बात सोचने और करने का वक्त आ गया है, और इन दो जंगखोर नेताओं से परे बाकी लोगों को यह देखना होगा कि कैसे अधिक से अधिक देशों को परमाणु हथियार खत्म करने पर सहमत किया जा सकता है। अगर ये हथियार खत्म नहीं होंगे तो एक दिन यह दुनिया ही खत्म हो जाएगी। (Daily Chhattisgarh)

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