संपादकीय
10 दिसंबर 2018

वैसे तो राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर एक से बढ़कर एक गंदी बातें कही गईं, और उनमें से खासकर कांग्रेस के लोगों की कही हुई कई बातों को लेकर हमने चार-छह दिन पहले ही इसी जगह लिखा था। लेकिन देश में प्रधानमंत्री कोई एक ही हो सकते हैं, और मानो उसी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान की एक चुनावी सभा में तकरीबन पूरे का पूरा भाषण कांग्रेस के खिलाफ केन्द्रित रखा, और एक ऐसी बात कह दी जिसे लेकर देश के तमाम तबके यह कह रहे हैं कि यह बात अपने आपमें बहुत ही हिंसक और आपत्तिजनक तो है ही, देश के किसी और प्रधानमंत्री ने आज तक इतनी ओछी बात कही हो, उसकी कोई मिसाल लोगों को याद नहीं पड़ती है। और पिछले महीनों में लगातार मनमोहन सिंह सहित कई लोगों ने नरेन्द्र मोदी को याद दिलाया था कि प्रधानमंत्री की बातों का स्तर इतना नहीं गिरना चाहिए। अब इस पर भी मोदी ने राजस्थान की आमसभा में मंच से कहा कि कांग्रेस के राज में जो बेटी पैदा नहीं हुई थी, वह विधवा भी हो गई, और वह विधवा पेंशन भी लेने लग गई। कांग्रेस की वह कौन विधवा थी जिसके खाते में विधवा पेंशन जाती थी?
जाहिर तौर पर कांग्रेस में एक ऐसी महिला मुखिया है जो कि भारत के प्रचलित सामाजिक बोलचाल के मुताबिक विधवा कही जा सकती है। हम अपने अखबार में इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर नहीं करते हैं क्योंकि यह महिला और पुरूष के बीच भेदभाव करने वाला शब्द है, और पत्नी खो चुके किसी आदमी के संदर्भ में यह कभी नहीं कहा जाता कि वह एक विधुर है। यह सिर्फ महिला को बदनसीब ठहराने या उसे कमतर बताने की साजिश के तहत इस्तेमाल की जाने वाली सामाजिक भाषा है जो कि समाज के बाकी तौर-तरीकों की तरह ही अन्यायपूर्ण है। किसी महिला को विधवा कहना ही भारत में उसके अपशकुनी होने की तरफ एक इशारा होता है, उसे शुभ अवसरों पर दूर रखने का एक तरीका होता है, और किसी महिला के विधवा होने को लेकर कहावतों और मुहावरों में हजार-हजार गंदी और ओछी बातें लिखी जाती हैं, और अगर ऐसी महिला गरीब है, सामाजिक-राजनीतिक रूप से सक्षम और सुरक्षित नहीं है, तो उस पर हाथ डालना ताकतवर मर्दों का एक हक भी भारत के गांवों में, बहुत से हिस्सों में जायज माना जाता है। जो देश महिलाओं के खिलाफ इतना हिंसक है, उस देश का प्रधानमंत्री अगर कांग्रेस पार्टी पर हमला करने के लिए, कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार की तोहमत लगाने के लिए अपने सार्वजनिक भाषण में 'कांग्रेस की विधवाÓ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है तो यह स्तब्ध कर देने वाली बात है, और इस पर लिखते हुए भी दिल कांप जाता है कि अब बाकी के नेताओं की किस बात को हिंसक, अपमानजनक और अश्लील कहा जा सकेगा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बहुत से मौकों पर अपनी मां से मुलाकात, मां की सेवा, नोटबंदी में मां के बैंक जाने जैसी बातों और तस्वीरों के मार्फत खबरों में आते रहे हैं। उनके अपने निजी जीवन को लेकर, पत्नी के साथ उनके संबंधों को लेकर उनके विरोधी और आलोचकों में से कुछ लोग ओछी जुबान में बात करते रहे हैं, उसका मजाक और मखौल उड़ाते रहे हैं। ऐसे तमाम मौकों पर हमने ऐसे लोगों के खिलाफ लिखा है, लेकिन ऐसा करने वाले लोग छोटे नेता थे, या सोशल मीडिया पर सक्रिय आलोचक थे, उनमें से कोई भी देश के प्रधानमंत्री के दर्जे का व्यक्ति नहीं था। नरेन्द्र मोदी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि हिन्दुस्तान में लोगों का अपने से कम उम्र की महिला से शादी करना एक आम बात है। फिर इसके बाद महिला का शरीर अधिक संघर्ष करने वाला होता है और वह पुरूष के मुकाबले कई बरस अधिक जीती है। ऐसे में यह बात बहुत सामान्य है कि देश की शादीशुदा महिलाओं में से बहुत सी महिलाओं को आखिरी के कई बरस अपने पति के बिना गुजारने होते हैं। लेकिन उनकी ऐसी स्थिति को किसी गाली में ढाल देना बहुत ही खराब बात है। फिर कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी के साथ तो यह बात भी है कि उनके पति राजीव गांधी आतंकवादियों के हमले का शिकार होकर देश के लिए शहीद हुए थे, और उस वजह से सोनिया गांधी आज अकेली हैं। लेकिन इस पूरे सामाजिक सिलसिले को अनदेखा करके, सामाजिक न्याय की जरूरत को अनदेखा करके, और सोनिया गांधी के व्यक्तिगत दर्जे को, उनकी वैवाहिक स्थिति को अनदेखा करके अगर उनके ऊपर ऐसा हमला करने से किसी राज्य में मोदी की पार्टी को कुछ अधिक वोट मिलने की गुंजाइश है, तो यह भारतीय लोकतंत्र में एक बहुत ही तकलीफदेह नौबत है। मोदी के पास अब भी एक गुंजाइश है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर इतिहास की सबसे ओछी बात कहने के लिए वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर अपने इस गलत काम को कुछ हद तक सुधार सकते हैं। (Daily Chhattisgarh)
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