राहुल छत्तीसगढ़ का नहीं आज शाम अपना भी भविष्य तय करने जा रहे..

संपादकीय
13 दिसंबर 2018


जिन तीन राज्यों में कांग्रेस को आज मुख्यमंत्री तय करने हैं, और इन शब्दों के छपने तक जो हो सकता है कि तय हो भी चुके रहें, वहां पर कांग्रेस का काम आसान नहीं है। खासकर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जिसमें आधा दर्जन दिग्गज नेताओं के बीच से कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष चुनना है। सबसे ऊपर जिन चार नामों की चर्चा चल रही है, उनको लेकर भी एक दुविधा यह है कि इनमें से कौन ऊपर समझे जाने वाले किस पद पर किसी और की तैनाती के बाद उससे नीचे समझे जाने वाले पद पर काम करने के लिए सहमत हो, या खुश रहे। दूसरी दिक्कत यह है कि कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ में छह महीने के भीतर आम चुनाव भी लडऩे हैं, और लोकसभा में आज राज्य की 11 सीटों में से उसके पास कुल एक सीट है। इस बार विधानसभा के जो नतीजे रहे हैं, उन्हें देखते हुए कांग्रेस यह कोशिश करेगी कि लोकसभा की अधिक से अधिक सीटें उसके हाथ लगें, और इसके लिए न सिर्फ इन शुरुआती महीनों में सरकार को बहुत अच्छा चलना होगा, बल्कि संगठन को भी चुनावी तैयारियों में पहले दिन से जुट जाना होगा। और यह संतुलन आसान नहीं रहेगा, बल्कि यह चुनाव अभियान के महीनों के मुकाबले कुछ अधिक मुश्किल रहेगा। 
कांग्रेस के सामने एक पसंद यह हो सकती है कि इस राज्य के पिछले 18 बरस के इतिहास को देखते हुए कोई ऐसा मुख्यमंत्री तय करे जो कि सरकार भी चलाए, और अघोषित रूप से प्रदेश में पार्टी का मुखिया भी रहे, फिर अध्यक्ष चाहे कोई और रहे। इन 18 बरसों में जोगी और रमन सिंह मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कब-कब कौन थे, यह लोगों को ठीक से याद भी नहीं होगा। इसलिए सत्ता का घोषित मुखिया संगठन का भी अघोषित मुखिया रहते आया है, और ऐसे में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ऐसा एक मुख्यमंत्री आज बना सकती है जो कि इन दोनों जिम्मेदारियों को निभा सके, और फिर चाहे घोषित रूप से पार्टी का कोई और प्रदेश अध्यक्ष रहे। जिन आधा दर्जन नामों पर इन पदों के लिए चर्चा चल रही है, मोटे तौर पर उन्हीं के बीच से इन पर नाम तय होंगे, लेकिन कौन किसके मातहत काम करने तैयार हो, यह एक बड़ी दुविधा रहेगी, और राहुल गांधी के इन पदों पर फैसले लेने की जिम्मेदारी से रश्क नहीं किया जा सकता। यह बड़ी चुनौती रहेगी, इतनी बड़ी जीत के बाद। शायद इसीलिए एक चर्चा यह चल रही है कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, और राजस्थान में एक-एक उपमुख्यमंत्री भी बनाया जाए, और ऐसी नौबत का मतलब किसी संस्था का टॉप-हैवी हो जाना होता है। 
इसके साथ-साथ छत्तीसगढ़ में आम चुनावों के उम्मीदवार भी ध्यान में रखकर न सिर्फ इन आधा दर्जन पदों पर नाम तय होंगे, बल्कि मंत्रिमंडल के नाम तय करते हुए भी यह देखा जाएगा कि आज के 65 से अधिक विधायकों में से किनको लोकसभा का चुनाव लड़वाया जा सकता है। आज कांग्रेस के पास बहुमत इतना अधिक है कि तमाम 11 सीटों पर अगर विधायकों को लड़वाया जाए, तो भी विधानसभा में बहुमत की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ठीक ऐसी ही हालत कुचली गई भाजपा के साथ है जिसके सवा दर्जन विधायकों में से कुछ को अगर लोकसभा लड़वाया जाए, तो भी उसके अल्पमत की दुबली काया पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह हफ्ता कांग्रेस के तमाम मंत्रियों के तय हो जाने का भी रहेगा, और यह तय है कि लोकसभा चुनाव की उम्मीदवारी को ध्यान में रखकर ही यह फैसला होगा। 
जिस तरह किसी प्रदेश में जब खेतों में बम्पर क्रॉप हो जाती है, तब फसल का दाम जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़ता है। इसलिए आज छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायकों की ऐसी बम्पर क्रॉप हुई है कि मुख्यमंत्री पद के लायक समझे जाने वाले विधायकों की गिनती भी आधा दर्जन हो गई है। आज शाम छत्तीसगढ़ का भविष्य कांग्रेस पार्टी तय करने जा रही है। तीन हफ्ते पहले प्रदेश की जनता ने कांग्रेस का भविष्य तय किया था, और जिस हैरतअंगेज बहुमत के साथ कांग्रेस को छत्तीसगढ़ी जनता ने चुना है, उसने पार्टी को अधिकार तो कम दिया है, जिम्मेदारी अधिक दी है। आज से लेकर मंत्रिमंडल तय होने तक जनता यह भी देखेगी कि कांग्रेस हाईकमान उस जिम्मेदारी पर कितना खरा उतर रहा है। कांग्रेस के लिए यह मौका न सिर्फ एक बड़ी चुनौती का है, बल्कि इससे ही छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों पर खुद राहुल गांधी का भविष्य भी तय होगा। (Daily Chhattisgarh) 

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