अफसरों के बाद मंत्री, सरकार के तेज कामकाज की जरूरत

संपादकीय
24 दिसंबर 2018


छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीती आधी रात के बाद जारी एक लंबी तबादला सूची में राज्य के एक चौथाई से अधिक आईएएस अफसरों का तबादला किया है। इसके अलावा कुछ आईएफएस अफसरों को हटाया भी गया है जो कि विभाग से बाहर शासन में काम कर रहे थे। इस लिस्ट में कुछ जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण फेरबदल कई ऐसे विभागों में तैनात अफसरों का है जिन पर लंबे समय से एक ही जगह पर काम करने की तोहमत थी, और इनमें से कुछ पर बहुत मोटी कमाई करने के आरोप भी थे। खासकर स्वास्थ्य विभाग में खरीदी करने के लिए बनाए गए एक निगम में एक-एक मशीन पांच-दस गुना दाम पर भी खरीदने के सुबूत बिखरे पड़े हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की बाकी बेईमानी की तरह यह निगम भी गरीब जनता के हक को लूटने में लगा हुआ था, और आगे बारीक जांच में कई अफसरों को जेल भेजने के लिए जरूरत से अधिक सुबूत मौजूद रहेंगे। ऐसा हाल कई और विभागों में भी निकलेगा, और ऐसे अफसरों का क्या करना है, उनके ऊपर के मंत्रियों का क्या करना है, यह बात नई सरकार हमसे बेहतर जानती है, और इसलिए उसे कोई बिना मांगा मशविरा देने की जरूरत नहीं है। 
कल ही भूपेश-मंत्रिमंडल का विस्तार और शपथ ग्रहण है, और ऐसी उम्मीद की जाती है कि सभी महत्वपूर्ण विभागों को मंत्री मिल जाएंगे। अफसर अधिकतर इस लिस्ट में बदल गए हैं, और कुछ और बदल भी जाएंगे। इसके बाद सरकार को पिछली सरकार के कुकर्मों की जांच के अलावा आगे का काम भी किफायत और योजना के साथ तेजी से करना होगा क्योंकि नीतियों और कार्यक्रमों में बड़ा बदलाव आने के बाद इस नई हवा में हर किसी को अधिक तैयारी भी करनी पड़ेगी। कुछ महीनों बाद के लोकसभा चुनाव के फिर कुछ महीनों बाद पंचायत-म्युनिसिपल के चुनाव भी आ जाएंगे, और इन दोनों के नतीजों को लोग बारीकी से देखेंगे। यह एक बड़ी चुनौती इसलिए भी है कि इस मौके पर चुनावी वायदों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़े खर्च का साल भी यह रहेगा, और दो-दो चुनावों में जनता को खुश रखने का साल भी यह रहेगा। यह पहला साल इन पांच बरसों का सबसे ही चुनौती भरा साल रहेगा, फेरबदल, योजना, चुनावी प्रदर्शन, और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई। 
ऐसे में दो-चार दिन के भीतर शक्ल ले लेने वाली नई सरकार को एक बहुत मेहनतकश टीम की तरह काम करना होगा, और यह बहुत मुश्किल भी नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने पिछले पांच बरस भरपूर मेहनत की है, और उन बातों को अच्छी तरह समझा भी है जिनके चलते रमन सिंह की पन्द्रह बरस की सरकार डूब गई। इसलिए यह ताजा-ताजा तजुर्बा कांग्रेस के सामने है, और उसके मंत्रियों के पास भाजपा के मंत्रियों के मुकाबले अधिक लंबा, या कम से कम बेहतर तजुर्बा भी है। नए मुख्यमंत्री ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ बयान दिया है, और सादगी के साथ काम करने के लिए अफसरों को कहा है। भाजपा के इतने लंबे राज में पूरा प्रशासन मुख्यमंत्री-सचिवालय में केन्द्रित हो गया था, और जिलों से लेकर विभागों तक सबकी जवाबदेही इसी एक दफ्तर तक रह गई थी। कांग्रेस सरकार को जिलों और विभागों को कामकाज करने के लिए कहना चाहिए, बजाय राजनीतिक कार्यक्रमों के इंतजाम के लिए, या सत्तारूढ़ नेताओं के इर्द-गिर्द घूमने के। 
कांग्रेस के साथ एक दिक्कत यह भी है कि वह इतने बड़े बहुमत के साथ जीतकर आई है कि उसके मगरूर हो जाने का भी एक खतरा बना हुआ है। इस बार के चुनावी नतीजों का आगे के किसी भी चुनाव में इस हद तक फिर से होने की संभावना बड़ी मुश्किल बात रहेगी, और इसलिए सरकार को अपने आगे के कामकाज पर बहुत अधिक ध्यान देना होगा। वैसे एक बात यह भी है कि पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों को सामने लाकर, उनकी जांच करवाकर, उन पर कार्रवाई करके, उन्हें अदालत तक पहुंचाकर प्रदेश के नेताओं और अफसरों को एक बड़ा सबक भी दिया जा सकता है, और उससे अगले चुनाव कुछ आसान भी किए जा सकते हैं। फिलहाल इस सरकार को इस ताजा तजुर्बे के साथ आगे काम करना चाहिए कि कोई भी सरकार अमरबूटी खाकर नहीं आती, और उसके जाने के बाद बहुत सी कब्रें खुदती भी हैं। हम ऐसे भ्रष्टाचार की जांच के खिलाफ भी नहीं हैं, और इस बात को लिखते आए हैं कि  हर सरकार को पिछली सरकार के भ्रष्टाचार की जांच करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें गिनाकर ही तो कोई पार्टी चुनाव में जीत हासिल करती है। ऐसे में यह जनता के प्रति जवाबदेही की बात भी है, और संविधान की शपथ भी यह उम्मीद करती है कि जानकारी में आए हर भ्रष्टाचार की जांच की जाए, उस पर कार्रवाई की जाए।  (Daily Chhattisgarh) 

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