संपादकीय
22 दिसंबर 2018

दिल्ली की विधानसभा में एक अजीब सा विवाद शुरू हुआ है कि वहां आम आदमी पार्टी की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को देखते हुए राजीव गांधी को मरणोपरांत दिया गया भारत रत्न वापिस लिया जाए। अब इस पर शुरू हुए बवाल को देखते हुए आम आदमी पार्टी जिम्मेदारी किसी व्यक्ति पर डाल रही है, लेकिन यह बात बड़ी शर्मनाक और बड़ी असंसदीय है कि इस तरह की कोई चर्चा विधानसभा में हो। 1984 के दंगों को लेकर कांग्रेस पर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं, और हाल ही में उसके एक नेता, सज्जन कुमार, को उम्रकैद भी हुई है। यह बात भी सही है कि 1984 में इंदिरा की हत्या के बाद विचलित राजीव गांधी ने किसी बड़े पेड़ के उखडऩे पर धरती के हिलने का जो बयान दिया था, वह सही नहीं था, लेकिन अपनी मां को उस किस्म की आतंकी हत्या में खोने के तुरंत बाद एक बेटे का दिया गया वह बयान था। अब अभी पिछले बरस हुए चुनावों में जिस तरह पंजाब की जनता ने कांग्रेस पार्टी को चुना है, उससे यह जाहिर है कि सिखों के बीच कांग्रेस पार्टी द्वारा दंगों को लेकर मांगी गई माफी का असर हुआ है, और सिख समाज उससे कुछ हद तक उबर भी गया है, वरना भला कांग्रेस पंजाब में कैसे जीतती। और इसी चुनाव में नहीं, 84 के बाद और भी चुनावों में कांग्रेस वहां जीत चुकी है। बिना कोई माफी मांगे 2002 के दंगों के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वहां पर बार-बार चुनाव जीतते रहे हैं, यह एक अलग बात है कि पंजाब में सिख बहुतायत में है, और गुजरात में दंगों के शिकार मुस्लिम बहुत अल्पसंख्यक हैं। फिर भी यह फर्क तो है ही कि कांग्रेस ने औपचारिक रूप से इन दंगों के लिए माफी मांगी, और मोदी-भाजपा ने गुजरात दंगों को लेकर कोई माफी नहीं मांगी।
राजीव गांधी को भारत के खिलाफ काम करने वाले विदेशी आतंकियों ने जिस तरह मारा, उस शहादत को अनदेखा करके अगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी सिख भावनाओं को भड़काने के लिए इस तरह की हरकत कर रही है, तो यह बहुत ही ओछी बात है, और लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों के खिलाफ भी है। दिल्ली विधानसभा को भी अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए कि ऐसी भड़काऊ बातों को लेकर उसका ऐसा असंसदीय इस्तेमाल न हो। सज्जन कुमार को अदालत से मिली सजा, और 84 दंगों में भागीदारी की तोहमतें झेल रहे कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की वजह से अभी सिख भावनाएं भड़की हुई हैं, और ऐसे में आम आदमी पार्टी जिस हिंसक तरीके से उनको दुह रही है, वह एक घटिया हरकत है। राजीव गांधी की शहादत की वजह से उन्हें भारत रत्न दिया गया था, उसे 84 दंगों को याद करते हुए वापिस लेने की बात करना कुछ उसी किस्म का होगा जिस तरह कि यह कहा जाए कि 2002 के गुजरात दंगों को अनदेखा करके चुपचाप बैठे रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी से भी भारत रत्न वापिस ले लिया जाए। भारतीय लोकतंत्र में थोड़ी सी इंसानियत बाकी रहने देना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)
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