संपादकीय
5 सितंबर 2012
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में अमरीका के एक प्रमुख अखबार वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट की चर्चा भारत में आज खबरों में है। एक गोरे देश में भारत के बारे में क्या लिखा जा रहा है, क्या कहा जा रहा है, इसे लेकर हीनभावना के शिकार इस देश में चाहे जो सोचा जा रहा हो, यह बात अपनी जगह सही है कि उन बातों का महत्व दुनिया के कारोबारियों की नजर में तो होता ही है। बाहर से कौन हिंदुस्तानी कारोबार में पूंजीनिवेश चाहेंगे, इस पर ऐसी खबरों का असर होता है। इसलिए इसे देश के भीतर के लिए महत्वहीन मानते हुए भी हम देश के बाहर के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
लेकिन इस अमरीका अखबार में मनमोहन सिंह के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है जिसे पिछले दो बरस में सौ-सौ बार न लिख चुके हों। मनमोहन सिंह का सारा सम्मान अर्थशास्त्र के एक जानकार के रूप में था, और शायद एक ठीक-ठाक वित्तमंत्री के रूप में वे दुनिया की पूंजीवादी ताकतों को पसंद भी थे। ईमानदारी और सादगी की, राजनीति और महत्वाकांक्षा से परे ही अपनी छवि के चलते वे कांग्रेस के पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री बनाने के लायक भी पाए गए, और बनाए गए। लेकिन इस देश की सरकार का मुखिया बनने के बात से लगातार उन्होंने अपनी साख खोई है, और एक मुखिया के रूप में भारी नाकामायी के साथ-साथ भारी बदनामी भी पाई है। हम इस अमरीका अखबार में आज छपे ढेर से सारे नकारात्मक विशेषणों को भी सही पाते हैं, और भारत के भीतर इस सरकार के बारे में कही गई इन बातों को भी सही पाते हैं कि यह आज तक की देश की सबसे बेईमान सरकार है, और किसी के कहे बिना भी यह बात तो इतिहास में दर्ज है ही कि मनमोहन सिंह इसके मुखिया हैं।
जब भाजपा मनमोहन सिंह से इस्तीफा मांग रही है, तो इसी पखवाड़े शुरू हुई यह मांग हमारे एक-दो बरस से लगातार लिखी जा रही बात को आज दोहराना ही है। हम लगातार यह मांग करते आ रहे हैं कि मनमोहन सिंह पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करना चाहिए क्योंकि उनकी आंखों के सामने उनके मातहत लगातार भ्रष्टाचार करते रहे, और वे भ्रष्टाचार लगातार खबरों में भी आते रहे, और मनमोहन सिंह उन्हें अनदेखा करके जिम्मेदारियां मंत्रियों पर या मंत्रालयों पर डालते रहे। संविधान की शपथ अनदेखा करने के लिए नहीं ली जाती, और निजी ईमानदारी किसी भी पद के लिए कोई योग्यता नहीं है। यह तो एक बुनियादी जरूरत है जिसे हम कोई योग्यता नहीं गिनते। ऐसे में इस देश का प्रधानमंत्री अगर भ्रष्टाचार का इतिहास गढ़ा जाते देखते चले जाने का दो कार्यकाल का रिकॉर्ड बना रहा है, तो वह सिर्फ देशी-विदेशी आलोचना का हकदार नहीं है, वह अदालती कटघरे का हकदार है। हम भाजपा के संसद बहिष्कार के खिलाफ हैं, लेकिन मनमोहन सिंह का इस्तीफा इस देश के हित में, यूपीए सरकार के हित में, कांग्रेस पार्टी के हित में बिना देर किए होना चाहिए। हम यह बिल्कुल नहीं मानते कि भ्रष्ट यूपीए गठबंधन के भीतर एक भी काबिल और ईमानदार मंत्री नहीं मिलेगा जिसे कि प्रधानमंत्री बनाया जा सके। भ्रष्टाचार का गवाह बने रहना, चुप्पी बनाए रखकर देश की लूटपाट का मौका अपने साथियों को देना किसी तरह की योग्यता अगर है, तो वह जेल जाने और कैद काटने की योग्यता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे ताकतवर ओहदे की जिम्मेदारियां एक मुर्दा गवाह से अधिक होती हैं, और यही बात अमरीका अखबार ने अपने शब्दों में लिखी हैं।
मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बने रहने का सिलसिला अब खत्म होना चाहिए। हो सकता है कि यूपीए और कांग्रेस पार्टी को एक ईमानदार मुखौटे की जरूरत हो, इस देश को तो ऐसे किसी मुखौटे की कोई जरूरत नहीं है। दूसरी बात यह कि अपनी पूरी सरकार को भ्रष्ट साबित हो जाने देने के बाद अब कांग्रेस पार्टी यह भी साबित कर रही है कि उसके पास एक भी काबिल और ईमानदार नेता प्रधानमंत्री बनाने के लायक नहीं है। देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी इस कदर दीवालिया हो गई है!
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(१)
जवाब देंहटाएंअभी न्यूज चैनल पर पट्टी चलती देखी , उन्होंने आलेख के लिए माफी मांग ली है !
(२)
अमेरिकन की राय मानिये तो कई मुल्क उसकी बिना पर नेस्तनाबूद कर दिए गये !
(३)
बहरहाल देश में कोई बेहतर राजनैतिक विकल्प दिखाई भी नहीं देता !
अमेरिकन = अमेरिकन्स
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