छोटे से गांव का बड़ा सा हौसला


गरियाबंद से लौटकर गंगा सिंह ठाकुर 
सढ़ौली के पौने दो सौ नौजवान सुरक्षा बलों में

तस्वीरें- संतोष तिवारी रायपुर, 17 सितंबर। गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर स्थित सढ़ौली गांव के युवकों में देश प्रेम का जज्बा देखते ही बनता है। दो हजार की अबादी वाले इस गांव के पौने दो सौ युवा सीआरपीएफ, एसएफ, कोबरा बटालियन, आईटीबीपी, जिला पुलिस और नगर सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में गांव के तीन जवान शहीद हो गए हैं। उनकी याद में गांव में स्मारक बनवाए गए हैं। गांव के लोगों को युवाओं पर नाज है, पर उन्हें इस बात का डर हमेशा रहता है कि नक्सली लोग पुलिस वालों को अपना दुश्मन मानते हैं। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि बस्तर में चल रहा संघर्ष खत्म होना चाहिए। 


सढ़ौली गांव का इतिहास करीब 70 वर्ष पुराना है। यह गांव आजादी के पहले से बसा हुआ है। ग्राम पंचायत की जनसंख्या लगभग दो हजार है। यहां हल्बा (आदिवासी)जाति के लोग अधिक संख्या में निवास करते हैं। इसके अलावा गोंड, साहू और ब्राम्हण समाज के लोग भी यहां दशकों से हैं। गांव के कई परिवार ऐसे हैं जहां के 3 से 4 बेटे पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में गांव के जवान भृगुनंदन चौधरी जो कि कोबरा बटालियन गया (बिहार) में पदस्थ थे। 
नक्सल मुठभेड़ में गया में शहीद हो गए हैं। परिवार के लोग इस दुख से अभी तक नहीं उबर पाए हैं। इस परिवार के मुखिया नरहरराम जिला बल में आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। हरदेव के दो पुत्र चेतक कुमार बीएसएफ में और डायमंड कुमार सीआईएसएफ में है। अपने अविवाहित पुत्र भृगुनंदन की शहादत को पिता भूल नहीं पा रहे हैं। वे अभी भी छुट्टी पर चल रहे हैं। वे कहते हैं कि इस गांव के युवा पुलिस की नौकरी पसंद करते हैं। युवाओं को गांव के लोग भी प्रोत्साहित करते हैं।  
नरहर राम ने बताया कि उनके परिवार का एक और जवान कालेश्वर सिंह बीएसएफ दिल्ली में पदस्थ था। 6 दिसंबर 2000 को ट्रेनिंग के दौरान तबियत खराब हो जाने से उसकी मौत हो गई थी। कालेश्वर को पढ़ाने वाले शिक्षक दौवाराम ने उसकी याद में गांव में प्रतिमा बनाई है। यह प्रतिमा गांव के युवओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। इसके अलावा नारायणपुर में एसएफ में पदस्थ इस गांव के युवक डिगेश्वर शांडिल्य भी शहीद हो चुके हैं। यहां निवासरत लोगों की  आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, पर वे अपनी मेहनत और लगन से बेरोजगारी के कलंक को मिटा रहे हैं। इस माह 7 और युवाओं का नगर सेना में चयन हुआ है। 
गांव के 72 वर्षीय भैयाराम नाग के घर जब यह संवाददाता और छायाकार पहुंचे तो वे कुछ समय के लिए वे सहम गए। वे हमें खुफिया विभाग (दादा) के लोग समझ बैठे थे। परिचय देने के बाद उन्होंने बताया कि उनके चार बेटे पुलिस में है। दो पुत्र प्रेमलाल एवं एकेश्वर कुमार जिला बल में है। तीसरा पुत्र सदानंद असम रायफल में और चौथा पुत्र त्रिलोचन नाग बीएसएफ में तैनात है। श्री नाग ने बताया कि वे पेशे से टेलर रहे हैं। उन्होंने अपने चारों बेटों से कहा था कि उनके पास धन-दौलत नहीं है पढ़ लिख लोगे तो हमाली करने से बच जाओगे। बेटों ने उनका सपना साकार  किया।
गांव के हरदेव प्रसाद दुबे को भी दूसरे लोगों की तरह अपने दो पुत्रों पर गर्व है। उनके दो पुत्र पीताम्बर प्रसाद एसएफ और टेमन लाल जिला बल में है। उन्होंने बताया कि वे इस बात से बहुत खुश हैं कि सुविधाओं के अभाव में भी गांव के युवा इतिहास रच रहे हैं। 
गांव के शिक्षक केजूराम, अवधराम और बिंदुराम ने बताया कि गांव में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। यहां राधा कृष्ण मंदिर में हर मंगलवार को रामायण पाठ होता है। गांव वालों के सहयोग से तीन मानस भवन बनवाए गए हैं। धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भी भागीदारी होती है। इससे उन्हें सद्विचार और अच्छे कार्य करने की शिक्षा मिलती है। गांव में धान रखने के लिए दो हल्बा कोठी है जहां करीब दो सौ गाड़ा धान रखा जा सकता है। गांव के युवा पुलिस की भर्ती निकलने पर एक-दूसरे को बताते हैं। वे इसके लिए आवश्यक तैयारियां भी मिल-जुलकर करते हैं। जब किसी का चयन पुलिस में हो जाता है तो गांव-समाज के लोग उसका सम्माान करते हैं। इस गांव के युवाओं को वर्दी पर घमंड नहीं गर्व है। 
जर्जर भवन में पढ़ते हैं बच्चे
गांव के सरपंच बसंत कुमार शाडिल्य खुद 8वीं तक ही पढ़ सके इसका उन्हें दुख है। उन्होंने बताया कि गांव में हाईस्कूल तक की कक्षाएं चल रही हैं। कक्षा लगाने कमरों की कमी है। हाईस्कूल की पढ़ाई जर्जर भवन में हो रही है। उन्होंने स्कूल में एक योग शिक्षक की भी जरूरत बताई । उनका कहना है कि बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहेंगे तो अच्छे इंसान बनेंगे। 
सांसद-विधायक की घोषणाओं पर अमल नहीं
जिला मुख्यालय गरियाबंद से सढ़ौली दो किलोमीटर और खट्टी गांव 7 किलोमीटर है। खट्टी गांव तक सड़क नहीं बन पाई है। कच्ची सड़क पर इतने गड्ढ़े है कि बारिश में लोगों को सड़क किनारे खेत से होकर चलना पड़ता है। सढ़ौली गांव की सड़क बनाने सांसद चंदूलाल साहू, विधायक डमरूधर पुजारी कई बार घोषणा कर चुके हैं, उनकी घोषणा पर अमल नहीं हुआ है। इस मांग को लेकर गांव के लोग पिछले दिनों कलेक्टर दिलीप वासनिक से मिलने भी पहुंचे थे। उन्होंने बारिश के बाद सड़क निर्माण कार्य शुरू करवाने का आश्वासन दिया है। 

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