संपादकीय
इस सिलसिले की शुरुआत कहां से हुई यह याद करना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन किसी सिरे तक पहुंचने के लिए गिरिराज सिंह के बयान से शुरू करते हैं, जिसमें उन्होंने नरेन्द्र मोदी के राज में उनके आलोचकों को पाकिस्तान चले जाने की चेतावनी दी थी। बाद में मानो इन्हीं रेल टिकटों के लिए उनके घर से रहस्यमय तादाद में एक करोड़ से अधिक की अघोषित नगदी चोरी होकर बरामद हुई थी, जिसे पहले दिन उन्होंने राजनीतिक साजिश कहा था, लेकिन दो दिन बाद उन्होंने एक भाई खड़ा करके उस रकम पर दावा भी कर दिया। गिरिराज सिंह के उस बयान के बाद से अब तक भाजपा और उसके साथी दलों की ओर से बहुत से ऐसे बयान आए हैं जो हिन्दुस्तान में हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच एक तनाव और कड़वाहट पैदा कर रहे हैं। जाहिर तौर पर ऐसे हमलों के शिकार हिन्दुस्तान के वे मुस्लिम हैं, जो किसी भी हिन्दू जितने ही भारतीय हैं। चुनाव अभियान खत्म होने के बाद नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर उनसे यह उम्मीद की जाती थी कि साम्प्रदायिकता भड़काने वाली बातें उनके मातहत लोगों की तरफ से नहीं होंगी, क्योंकि अब सरकार चलाने के जिम्मेदार भी हैं। लेकिन ऐसी बातें रोज कहीं न कहीं से उठ रही हैं।पिछले दो दिनों में ही कम से कम चार ऐसी बातें सामने आई हैं, जो हिन्दुस्तान में हिन्दू और मुस्लिम के बीच तनाव खड़ा करने की सोची-समझी कोशिश साबित करती हैं, या फिर रोजा रखे हुए मुस्लिम के मुंह में एक बिल्कुल ही लापरवाही से रोटी ठूंसती है। शिवसेना के सांसदों का खड़ा किया हुआ इस साम्प्रदायिक तनाव पर प्रधानमंत्री जाहिर तौर पर तो चुप रह सकते हैं, क्योंकि अभी तक न तो पुलिस में रिपोर्ट हुई है, और न ही हिन्दुस्तान के अंधे कानून ने रोजा-रोटी में अब तक कोई खोट देखी है। लेकिन सवाल यह है कि प्रधानमंत्री ऐसी बातों को अनदेखा करते हुए क्या विविधताओं से भरे हुए इस विशाल देश पर राज कर सकेंगे? खुद उनकी पार्टी के मंत्री गोवा में घोर दकियानूसी बयान देते हैं, और उनका खंडन गोवा के ही भाजपाई मुख्यमंत्री को करना पड़ता है, अपने मंत्री के सार्वजनिक बयान के खिलाफ सरकार का रूख बताना पड़ता है। और उसी गोवा में कल भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के एक सहयोगी-दल मंत्री बयान देते हैं कि मोदी की अगुवाई में भारत एक हिन्दू राष्ट्र बनेगा। और यह बयान विधानसभा के भीतर सामने आता है।
कल की ही बात है कि हैदराबाद में भाजपा विधायक दल के नेता का एक बयान सामने आता है कि तेलंगाना राज्य सरकार का सानिया मिर्जा को प्रदेश का ब्रांड एम्बेसडर बनाना गलत है, क्योंकि अब वह पाकिस्तान की बहू है। यह बयान लोगों को याद दिलाता है कि सोनिया गांधी इटली की बेटी थीं, लेकिन उनको भारत की बहू मानने से भाजपा के नेता अभी कुछ बरस पहले तक इंकार करते थे, और सोनिया के प्रधानमंत्री बनने की नौबत आने पर सिर मुंडाने के बयान देते थे, आज उसी तरह सानिया मिर्जा एक पाकिस्तानी से शादी करने के बाद, भारतीय नागरिक बने रहने परभ भी भारत की बेटी नहीं मानी जा रही है। यह तो अच्छा हुआ कि शाम होते-होते भाजपा के केन्द्रीय मंत्री और कल तक प्रवक्ता रहे प्रकाश जावड़ेकर ने इस बयान का विरोध किया और कहा कि पार्टी ऐसा नहीं सोचती है।
और यह भी कल की ही बात है कि संसद में दिल्ली से भाजपा के एक सांसद ने रोजा-रोटी पर बहस के दौरान शिवसेना के बर्ताव का विरोध करने वाले सांसदों को पाकिस्तान जाने की नसीहत दे दी। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी की चुप्पी लोगों को कुछ तो चौंका रही है, और कुछ इस मजाक का मौका दे रही है कि पीएम की कुर्सी सबको मौनी बाबा बना देती है। लेकिन चुप रहकर भी वे अपनी पार्टी के, अपने गठबंधन के, और अपने हमखयालों के किए जा रहे हमलों के लिए संवैधानिक, राजनीतिक, और नैतिक रूप से जिम्मेदार, या जवाबदेह तो हैं ही। देश में आज अगर हिन्दू और मुस्लिम के बीच एक खाई खोदी जा रही है, तो इसका नुकसान सिर्फ सामाजिक मोर्चे पर नहीं होगा, आर्थिक मोर्चे पर भी इसका नुकसान होगा। दोनों समुदायों के बीच यह तनाव बढ़ेगा, तो घोषित साम्प्रदायिक हिंसा से जूझने में देश की बहुत सी ताकत जाएगी, और अघोषित आतंकी साजिशों से बचाव की तैयारी में भी देश की बहुत सी ताकत लगेगी, बेहिसाब खर्च लगेगा, और देश की साख दुनियाभर के कारोबारियों के बीच भी गिर जाएगी।
भाजपा को एक पार्टी के रूप में, एनडीए को एक गठबंधन के रूप में, और नरेन्द्र मोदी एक प्रधानमंत्री के रूप में ऐसी गैरजरूरी बयानबाजी पर रोक लगाने की जरूरत है, अगर इसके पीछे कोई सोची-समझी बात न हो तो।
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