7 अक्टूबर 2011
किसी कामयाब कारोबारी पर इस जगह लिखने का मौका कम ही आता है और एप्पल कम्प्यूटर के मार्फत दुनिया में अरबों घरों तक पहुंचने वाले स्टीव जॉब्स के बारे में लिखने की वजह न कामयाबी है और न ही कारोबार। उनकी जिंदगी इतनी दिलचस्प है और सामानों के बाजार में उनका योगदान इतना मौलिक है कि ये दो बातें उनके बारे में लिखने के लिए काफी है। और जिन्होंने एप्पल के बनाए सामान इस्तेमाल किए हैं उनमें से अधिकतर का यह मानना है और अनुभव है कि वे अपने किस्म के सामानों में सबसे अच्छे रहते हैं। यह क्वालिटी या उत्कृष्टता एक और बात है जो आज यहां उनके बारे में लिखने को मजबूर करती है।
एक बहुत मामूली और शायद दिक्कतों भरी हुई शुरूआत की जिंदगी कहां तक पहुंची यह देखना हो तो वैसे तो अमरीका में कुछ दूसरी कहानियां भी इस किस्म की मिल जाएंगी लेकिन स्टीव जॉब्स का मामला भी देखने और सीखने लायक है कि किस तरह कोई अभावों से ऊपर उठकर आसमान तक पहुंच सकता है और अपने काम की वजह से सितारे की तरह आसमान पर हमेशा टंगे भी रह सकता है। स्टीव जॉब्स का जन्म अमरीका में आकर बसे एक सीरियाई मुस्लिम आप्रवासी परिवार में हुआ और किन्हीं वजहों से उन्हें एक दूसरे परिवार को गोद दे दिया गया। अपनी जड़ों से उखड़ा हुआ बच्चा स्कूल और कॉलेज के वक्त दोस्तों के कमरों में फर्श पर सोता था और खाना जुटाने के लिए इधर-उधर पड़ी खाली बोतलों को इक_ा करके बेचता था। हफ्ते के हफ्ते वह हरे कृष्ण मंदिर में मुफ्त का प्रसाद पाने भी चले जाता था और बाद के बरसों में वह भारत भी आया और बौद्ध बना।
हाल के बरसों तक अगर स्टीव जॉब्स को देखें तो अमरीका की कारोबारी दुनिया के मुखिया लोगों वाला कोई भी तौर-तरीका उनका नहीं था। पूरे वक्त खेल के जूते, साधारण नीली जींस और काली टी-शर्ट को उन्होंने मानों अपनी वर्दी बना रखी थी और यह पोशाक अमरीका में छुट्टी के वक्त तो बड़े लोग पहन लेते हैं लेकिन बड़े से बड़े समारोह में भी स्टीव जॉब्स सिर्फ इन्हीं कपड़ों में दिखते रहे। अपने रहन-सहन की उनकी इस मौलिक सोच की ही एक झलक उनके बनाए हुए सामानों में भी दिखती रही। एप्पल के कम्प्यूटर, लैपटॉप, आईपॉड और आईफोन से लेकर आईपैड तक उन्होंने जो-जो बनाया उनमें से हर किसी में एक बहुत ही अनोखापन था। और यही अनोखापन दुनिया के आज के कड़े मुकाबले वाले बाजार में उन्हें एकाधिकार सा दिला गया। उनके बारे में आज यहां लिखने का एक मकसद यह है कि एक मौलिकता, अनोखापन और उत्कृष्टता मिलकर क्या कर सकते हैं यह लोगों को देखने, समझने और सीखने की जरूरत है। दो बातें सोचने की हैं। एक तो यह कि दुनिया के तौर-तरीकों के खिलाफ एक बागी के अंदाज में भी कोई अपनी मर्जी के कपड़ों में सबसे बड़ी पूंजीवादी दुनिया में रह सकता है। दूसरी बात यह कि कल्पनाशीलता और उत्कृष्टता एक शानदार बाजार-व्यवस्था के साथ कहां तक पहुंच सकती है। उनके बारे में यह माना गया कि उन्होंने ये तमाम सामान उस किस्म के और उस वक्त बनाए जब लोगों को इस बात का अहसास भी नहीं था कि उन्हें वैसे किसी सामान की जरूरत है। बहुत ही गरीबी या साधारण हालत से उठकर कोई अगर मौलिक सामानों वाली, वक्त से दस कदम आगे चलने वाली दुनिया की सबसे बड़ी, कामयाब और मशहूर कंपनी बना सकता है और ऐतिहासिक कमाई करके भी दिखा सकता है, तो ऐसी अकेली कहानी शायद स्टीव जॉब्स की ही है।
स्टीव जॉब्स को दुनिया भर में एप्पल के ग्राहक जिस तकलीफ के साथ याद कर रहे हैं और फूल चढ़ा रहे हैं, वह देखने लायक है। क्या इसके पहले किसी कारोबारी को ऐसा कुछ नसीब हुआ था? एप्पल कंपनी के सबसे बड़े मुकाबले वाली माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मुखिया बिल गेट्स के रिश्ते स्टीव जॉब्स से दोस्ती के भी रहे और गलाकाट मुकाबले के भी। लेकिन बिल गेट्स ने जिस अंदाज में दुनिया भर में समाज सेवा कर बीड़ा उठाया है और दुनिया भर के उद्योगपतियों को अपनी आधी दौलत समाज के लिए देने के लिए प्रेरित किया है, वैसा कुछ भी स्टीव जॉब्स के साथ जुड़ा हुआ नहीं है। मिट्टी से उठकर उन्होंने एप्पल जैसी कंपनी बनाई, उसे छोड़कर निकल गए, फिर दूसरी कंपनी बनाकर उसकी कमाई से एप्पल को खरीद लिया और उसे तारों से ऊपर तक ले गए, लेकिन उन्होंने समाज के लिए कोई दान किया हो ऐसा किसी को नहीं मालूम है। बल्कि एप्पल पर दुबारा कब्जा करने के बाद उन्होंने उस कंपनी के समाजसेवा के सारे कार्यक्रम बंद भी करवा दिए। इस तरह एक अच्छे कारोबारी की जो जिम्मेदारी समाज के लिए होती है उसमें स्टीव जॉब्स ने शायद अपना आधा खाया जूठा सेब भी किसी भूखे को नहीं दिया। उनकी बहुत सी खूबियों को गिनाते हुए अगर इस बात की चर्चा न की जाए तो यह अधूरी बात ही होगी। उनकी कंपनी को शेयर बाजार में दुनिया की सबसे सफल कंपनी कहा लेकिन यह कंपनी अमरीका की सबसे कम समाज सेवा करने वाली कंपनी भी कहलाई। स्टीव जॉब्स की सामानों और तकनीक, मार्केटिंग और डिजाइन की सारी मौलिकता, बिल गेट्स की समाजसेवा की मौलिकता और आधी दौलत दान देने के अभियान के सामने धरी रह गई।
किसी कामयाब कारोबारी पर इस जगह लिखने का मौका कम ही आता है और एप्पल कम्प्यूटर के मार्फत दुनिया में अरबों घरों तक पहुंचने वाले स्टीव जॉब्स के बारे में लिखने की वजह न कामयाबी है और न ही कारोबार। उनकी जिंदगी इतनी दिलचस्प है और सामानों के बाजार में उनका योगदान इतना मौलिक है कि ये दो बातें उनके बारे में लिखने के लिए काफी है। और जिन्होंने एप्पल के बनाए सामान इस्तेमाल किए हैं उनमें से अधिकतर का यह मानना है और अनुभव है कि वे अपने किस्म के सामानों में सबसे अच्छे रहते हैं। यह क्वालिटी या उत्कृष्टता एक और बात है जो आज यहां उनके बारे में लिखने को मजबूर करती है।
एक बहुत मामूली और शायद दिक्कतों भरी हुई शुरूआत की जिंदगी कहां तक पहुंची यह देखना हो तो वैसे तो अमरीका में कुछ दूसरी कहानियां भी इस किस्म की मिल जाएंगी लेकिन स्टीव जॉब्स का मामला भी देखने और सीखने लायक है कि किस तरह कोई अभावों से ऊपर उठकर आसमान तक पहुंच सकता है और अपने काम की वजह से सितारे की तरह आसमान पर हमेशा टंगे भी रह सकता है। स्टीव जॉब्स का जन्म अमरीका में आकर बसे एक सीरियाई मुस्लिम आप्रवासी परिवार में हुआ और किन्हीं वजहों से उन्हें एक दूसरे परिवार को गोद दे दिया गया। अपनी जड़ों से उखड़ा हुआ बच्चा स्कूल और कॉलेज के वक्त दोस्तों के कमरों में फर्श पर सोता था और खाना जुटाने के लिए इधर-उधर पड़ी खाली बोतलों को इक_ा करके बेचता था। हफ्ते के हफ्ते वह हरे कृष्ण मंदिर में मुफ्त का प्रसाद पाने भी चले जाता था और बाद के बरसों में वह भारत भी आया और बौद्ध बना।
हाल के बरसों तक अगर स्टीव जॉब्स को देखें तो अमरीका की कारोबारी दुनिया के मुखिया लोगों वाला कोई भी तौर-तरीका उनका नहीं था। पूरे वक्त खेल के जूते, साधारण नीली जींस और काली टी-शर्ट को उन्होंने मानों अपनी वर्दी बना रखी थी और यह पोशाक अमरीका में छुट्टी के वक्त तो बड़े लोग पहन लेते हैं लेकिन बड़े से बड़े समारोह में भी स्टीव जॉब्स सिर्फ इन्हीं कपड़ों में दिखते रहे। अपने रहन-सहन की उनकी इस मौलिक सोच की ही एक झलक उनके बनाए हुए सामानों में भी दिखती रही। एप्पल के कम्प्यूटर, लैपटॉप, आईपॉड और आईफोन से लेकर आईपैड तक उन्होंने जो-जो बनाया उनमें से हर किसी में एक बहुत ही अनोखापन था। और यही अनोखापन दुनिया के आज के कड़े मुकाबले वाले बाजार में उन्हें एकाधिकार सा दिला गया। उनके बारे में आज यहां लिखने का एक मकसद यह है कि एक मौलिकता, अनोखापन और उत्कृष्टता मिलकर क्या कर सकते हैं यह लोगों को देखने, समझने और सीखने की जरूरत है। दो बातें सोचने की हैं। एक तो यह कि दुनिया के तौर-तरीकों के खिलाफ एक बागी के अंदाज में भी कोई अपनी मर्जी के कपड़ों में सबसे बड़ी पूंजीवादी दुनिया में रह सकता है। दूसरी बात यह कि कल्पनाशीलता और उत्कृष्टता एक शानदार बाजार-व्यवस्था के साथ कहां तक पहुंच सकती है। उनके बारे में यह माना गया कि उन्होंने ये तमाम सामान उस किस्म के और उस वक्त बनाए जब लोगों को इस बात का अहसास भी नहीं था कि उन्हें वैसे किसी सामान की जरूरत है। बहुत ही गरीबी या साधारण हालत से उठकर कोई अगर मौलिक सामानों वाली, वक्त से दस कदम आगे चलने वाली दुनिया की सबसे बड़ी, कामयाब और मशहूर कंपनी बना सकता है और ऐतिहासिक कमाई करके भी दिखा सकता है, तो ऐसी अकेली कहानी शायद स्टीव जॉब्स की ही है।
स्टीव जॉब्स को दुनिया भर में एप्पल के ग्राहक जिस तकलीफ के साथ याद कर रहे हैं और फूल चढ़ा रहे हैं, वह देखने लायक है। क्या इसके पहले किसी कारोबारी को ऐसा कुछ नसीब हुआ था? एप्पल कंपनी के सबसे बड़े मुकाबले वाली माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मुखिया बिल गेट्स के रिश्ते स्टीव जॉब्स से दोस्ती के भी रहे और गलाकाट मुकाबले के भी। लेकिन बिल गेट्स ने जिस अंदाज में दुनिया भर में समाज सेवा कर बीड़ा उठाया है और दुनिया भर के उद्योगपतियों को अपनी आधी दौलत समाज के लिए देने के लिए प्रेरित किया है, वैसा कुछ भी स्टीव जॉब्स के साथ जुड़ा हुआ नहीं है। मिट्टी से उठकर उन्होंने एप्पल जैसी कंपनी बनाई, उसे छोड़कर निकल गए, फिर दूसरी कंपनी बनाकर उसकी कमाई से एप्पल को खरीद लिया और उसे तारों से ऊपर तक ले गए, लेकिन उन्होंने समाज के लिए कोई दान किया हो ऐसा किसी को नहीं मालूम है। बल्कि एप्पल पर दुबारा कब्जा करने के बाद उन्होंने उस कंपनी के समाजसेवा के सारे कार्यक्रम बंद भी करवा दिए। इस तरह एक अच्छे कारोबारी की जो जिम्मेदारी समाज के लिए होती है उसमें स्टीव जॉब्स ने शायद अपना आधा खाया जूठा सेब भी किसी भूखे को नहीं दिया। उनकी बहुत सी खूबियों को गिनाते हुए अगर इस बात की चर्चा न की जाए तो यह अधूरी बात ही होगी। उनकी कंपनी को शेयर बाजार में दुनिया की सबसे सफल कंपनी कहा लेकिन यह कंपनी अमरीका की सबसे कम समाज सेवा करने वाली कंपनी भी कहलाई। स्टीव जॉब्स की सामानों और तकनीक, मार्केटिंग और डिजाइन की सारी मौलिकता, बिल गेट्स की समाजसेवा की मौलिकता और आधी दौलत दान देने के अभियान के सामने धरी रह गई।
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