12 अक्टूबर 2011
भारत के आज के सबसे लोकप्रिय गजल गायक जगजीत सिंह के गुजर जाने से किसी तरह का कोई शून्य खड़ा नहीं हो गया है। उनका गाया हुआ इतना कुछ, इतने किस्मों का आज भारत के दसियों करोड़ घरों में होगा कि वह आने वाली कई पीढिय़ों को सुख और खुशी देने के लिए काफी है। एक इंसान का बदन इसके मुकाबले इतना छोटा होता है कि उसके जाने से जगजीत सिंह को चाहने वालों को तकलीफ के बावजूद किसी तरह का खालीपन खड़ा नहीं हो गया। जब किसी का काम उसकी जिंदगी से बढ़कर हो जाए, तो वही जिंदगी काम की होती है। जिसका जिंदा रहना जरूरी हो, उसका एक मतलब यह भी निकलता है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में अब तक दुनिया के लिए इतना कुछ जोड़ा नहीं है कि वह उनकी जिंदगी से बढ़कर हो जाए।
जगजीत सिंह पर लिखने को दिल इसलिए चाहता है कि इस गायक ने अपनी बनाई धुनों पर अपनी आवाज से उन सैकड़ों शायरों को करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जो शायद किसी किताब के मार्फत उनकी गजलों को न पढ़े होते। और आज के जमाने में जब संगीत का मतलब शोर सा हो गया है, जब शब्दों की जरूरत और अहमियत किसी भी किस्म के गाने में बहुत कम मान ली गई है, तब जगजीत सिंह ने अपनी आवाज और अपनी संगीत से लोगों को उन शब्दों पर सोचने के लिए भी मौका दिया, मजबूर किया, जो शब्द उनके खुद के लिखे हुए नहीं थे। दरअसल गाई हुई एक गजल उसे लिखने वाले शायर की ही नहीं रह जाती, उस संगीत और आवाज की भी हो जाती है। गाई हुई गजल के मायने, लिखे हुए शब्दों के मायने से कुछ बढ़ जाते हैं और उनकी अहमियत भी बढ़ जाती है। जगजीत सिंह ने अपनी गाई गजलों में कवियों और शायरों के शब्दों में एक बहुत बड़ा वैल्यू एडीशन किया और श्रोताओं के रूप में उन्हें पाठक नसीब कराए। इसलिए भारत के शायद सबसे मशहूर और चहेते, शायद सबसे सुरीले और खासा अधिक गाने वाले जगजीत सिंह उर्दू और हिंदी कविता का, कई क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों का इतना भला कर गए हैं जितना शायद किसी और गायक-संगीतकार ने न किया हो।
कानों के रास्ते दिल और दिमाग तक इतनी मिठास घोलने, गानों में रची-बसी कल्पनाओं में लोगों को डुबा देने का महत्व बहुत अधिक है। इसलिए कि आज की जिंदगी में तेज रफ्तार तकलीफें मानसून की बारिश की तरह लोगों पर बरसती हैं और हर कुछ घंटों में कोई न कोई ऐसी खबर आती है जिससे कि लोगों के दिल-दिमाग और उनकी जुबान पर कड़वाहट बिखर जाए। हताशा और नफरत में फिसलते चली जा रही हिन्दुस्तानी जिंदगी और सोच को अगर कोई एक आवाज और उसके पीछे के दिल से रचा गया संगीत मिठास से भर देता है तो यह सुनने वालों को दिमागी रूप से सेहतमंद बनाए रखने के लिए एक बड़ा काम है। और यह काम जगजीत सिंह के जाने से जरा भी कम नहीं होने जा रहा, उनका गाया हुआ इतना कुछ है कि हर किसी को उसमें अपनी पसंद की धुन, अपनी पसंद का संगीत, अपनी पसंद के लफ्ज मिल ही जाते हैं, आवाज तो हर किसी गाने में बेमिसाल है ही। जगजीत सिंह में परदे के पीछे से, और स्टेज पर बैठकर भी लोगों को बांध लेने की एक बेमिसाल खूबी थी। जिन लोगों ने उन्हें सामने बैठकर सुनने का सुख पाया है वे हमारी इस बात को कुछ और अधिक दूर तक समझ और महसूस कर पाएंगे। लेकिन पिछली चौथाई सदी से अधिक से एक से अधिक पीढिय़ों ने जगजीत सिंह के रिकॉर्ड सुने, फिर कैसेट, सीडी और फिर डीवीडी से होते हुए इंटरनेट तक जगजीत सिंह का संगीत लोगों को लुभाते रहा, मोहते रहा और अब आने वाली पीढिय़ां भी उन्हें देखे बिना, टेक्नालॉजी की मेहरबानी से, यह सुख पाते रहेंगी।
किसी एक इंसान के बारे में इसी जगह पर हमने दो-चार दिन पहले ही लिखा था जब एप्पल कंपनी के स्टीव जॉब्स गुजर गए। उस चर्चा को आज हम दो वजहों से कर रहे हैं, एक तो इसलिए कि स्टीव के आईपॉड ने संगीत को लोगों के कानों तक एक अलग ही तरह से पहुंचा दिया था और हमारे जैसे करोड़ों लोग जेब में जगजीत सिंह के लगभग तमाम संगीत को लेकर चलने के लायक हुए। लेकिन एक दूसरी खराब वजह यह भी थी कि स्टीव जॉब्स ने खरबपति होने के बावजूद समाज के लिए कुछ नहीं किया। जगजीत सिंह के बारे में ऐसा कहने की नौबत नहीं आ रही क्योंकि उन्होंने बच्चों के संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों के लिए मदद के बहुत सारे काम भी किए। लेकिन एक तकलीफदेह बात उनके साथ यह भी लगी कि उनका बेटा एक सड़क हादसे का शिकार हुआ, उनकी पत्नी की पहली शादी की बेटी ने खुदकुशी कर ली और अब वे एक ऐसे बे्रन हैमरेज का शिकार हुए जो कि बहुत अधिक लोगों की मौत की वजह नहीं बनता है, खासकर बिना किसी एक्सीडेंट के।
लोगों को इतना सुख और इतनी खुशी देने वाले जगजीत सिंह को अपनी जिंदगी में कुछ अधिक ही तकलीफें मिलीं, क्यों? इसका कोई जवाब हमें नहीं सूझता।
भारत के आज के सबसे लोकप्रिय गजल गायक जगजीत सिंह के गुजर जाने से किसी तरह का कोई शून्य खड़ा नहीं हो गया है। उनका गाया हुआ इतना कुछ, इतने किस्मों का आज भारत के दसियों करोड़ घरों में होगा कि वह आने वाली कई पीढिय़ों को सुख और खुशी देने के लिए काफी है। एक इंसान का बदन इसके मुकाबले इतना छोटा होता है कि उसके जाने से जगजीत सिंह को चाहने वालों को तकलीफ के बावजूद किसी तरह का खालीपन खड़ा नहीं हो गया। जब किसी का काम उसकी जिंदगी से बढ़कर हो जाए, तो वही जिंदगी काम की होती है। जिसका जिंदा रहना जरूरी हो, उसका एक मतलब यह भी निकलता है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में अब तक दुनिया के लिए इतना कुछ जोड़ा नहीं है कि वह उनकी जिंदगी से बढ़कर हो जाए।
जगजीत सिंह पर लिखने को दिल इसलिए चाहता है कि इस गायक ने अपनी बनाई धुनों पर अपनी आवाज से उन सैकड़ों शायरों को करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जो शायद किसी किताब के मार्फत उनकी गजलों को न पढ़े होते। और आज के जमाने में जब संगीत का मतलब शोर सा हो गया है, जब शब्दों की जरूरत और अहमियत किसी भी किस्म के गाने में बहुत कम मान ली गई है, तब जगजीत सिंह ने अपनी आवाज और अपनी संगीत से लोगों को उन शब्दों पर सोचने के लिए भी मौका दिया, मजबूर किया, जो शब्द उनके खुद के लिखे हुए नहीं थे। दरअसल गाई हुई एक गजल उसे लिखने वाले शायर की ही नहीं रह जाती, उस संगीत और आवाज की भी हो जाती है। गाई हुई गजल के मायने, लिखे हुए शब्दों के मायने से कुछ बढ़ जाते हैं और उनकी अहमियत भी बढ़ जाती है। जगजीत सिंह ने अपनी गाई गजलों में कवियों और शायरों के शब्दों में एक बहुत बड़ा वैल्यू एडीशन किया और श्रोताओं के रूप में उन्हें पाठक नसीब कराए। इसलिए भारत के शायद सबसे मशहूर और चहेते, शायद सबसे सुरीले और खासा अधिक गाने वाले जगजीत सिंह उर्दू और हिंदी कविता का, कई क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों का इतना भला कर गए हैं जितना शायद किसी और गायक-संगीतकार ने न किया हो।
कानों के रास्ते दिल और दिमाग तक इतनी मिठास घोलने, गानों में रची-बसी कल्पनाओं में लोगों को डुबा देने का महत्व बहुत अधिक है। इसलिए कि आज की जिंदगी में तेज रफ्तार तकलीफें मानसून की बारिश की तरह लोगों पर बरसती हैं और हर कुछ घंटों में कोई न कोई ऐसी खबर आती है जिससे कि लोगों के दिल-दिमाग और उनकी जुबान पर कड़वाहट बिखर जाए। हताशा और नफरत में फिसलते चली जा रही हिन्दुस्तानी जिंदगी और सोच को अगर कोई एक आवाज और उसके पीछे के दिल से रचा गया संगीत मिठास से भर देता है तो यह सुनने वालों को दिमागी रूप से सेहतमंद बनाए रखने के लिए एक बड़ा काम है। और यह काम जगजीत सिंह के जाने से जरा भी कम नहीं होने जा रहा, उनका गाया हुआ इतना कुछ है कि हर किसी को उसमें अपनी पसंद की धुन, अपनी पसंद का संगीत, अपनी पसंद के लफ्ज मिल ही जाते हैं, आवाज तो हर किसी गाने में बेमिसाल है ही। जगजीत सिंह में परदे के पीछे से, और स्टेज पर बैठकर भी लोगों को बांध लेने की एक बेमिसाल खूबी थी। जिन लोगों ने उन्हें सामने बैठकर सुनने का सुख पाया है वे हमारी इस बात को कुछ और अधिक दूर तक समझ और महसूस कर पाएंगे। लेकिन पिछली चौथाई सदी से अधिक से एक से अधिक पीढिय़ों ने जगजीत सिंह के रिकॉर्ड सुने, फिर कैसेट, सीडी और फिर डीवीडी से होते हुए इंटरनेट तक जगजीत सिंह का संगीत लोगों को लुभाते रहा, मोहते रहा और अब आने वाली पीढिय़ां भी उन्हें देखे बिना, टेक्नालॉजी की मेहरबानी से, यह सुख पाते रहेंगी।
किसी एक इंसान के बारे में इसी जगह पर हमने दो-चार दिन पहले ही लिखा था जब एप्पल कंपनी के स्टीव जॉब्स गुजर गए। उस चर्चा को आज हम दो वजहों से कर रहे हैं, एक तो इसलिए कि स्टीव के आईपॉड ने संगीत को लोगों के कानों तक एक अलग ही तरह से पहुंचा दिया था और हमारे जैसे करोड़ों लोग जेब में जगजीत सिंह के लगभग तमाम संगीत को लेकर चलने के लायक हुए। लेकिन एक दूसरी खराब वजह यह भी थी कि स्टीव जॉब्स ने खरबपति होने के बावजूद समाज के लिए कुछ नहीं किया। जगजीत सिंह के बारे में ऐसा कहने की नौबत नहीं आ रही क्योंकि उन्होंने बच्चों के संगठनों, स्कूलों और अस्पतालों के लिए मदद के बहुत सारे काम भी किए। लेकिन एक तकलीफदेह बात उनके साथ यह भी लगी कि उनका बेटा एक सड़क हादसे का शिकार हुआ, उनकी पत्नी की पहली शादी की बेटी ने खुदकुशी कर ली और अब वे एक ऐसे बे्रन हैमरेज का शिकार हुए जो कि बहुत अधिक लोगों की मौत की वजह नहीं बनता है, खासकर बिना किसी एक्सीडेंट के।
लोगों को इतना सुख और इतनी खुशी देने वाले जगजीत सिंह को अपनी जिंदगी में कुछ अधिक ही तकलीफें मिलीं, क्यों? इसका कोई जवाब हमें नहीं सूझता।
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