07 जनवरी 2015
संपादकीय
भाजपा के हमलावर-साम्प्रदायिक सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर आग लगाने की कोशिश की है, लेकिन इस बार आग वे किसी गैरहिन्दू घर या बस्ती में नहीं लगा पा रहे, सिर्फ हिन्दुओं में उन्होंने आग लगाई है, और इसका नुकसान मोदी सरकार, भाजपा की साख, के साथ-साथ हिन्दुओं को होने जा रहा है। उन्होंने यह खुली सलाह दी है कि हर हिन्दू महिला को चार बच्चे पैदा करना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों का नाम लिए बिना उनके बारे में कहा कि चार बीवियां और चालीस बच्चे यहां नहीं चल सकेंगे, और जवाब में हिन्दू औरत को चार-चार बच्चे पैदा करना चाहिए।
भाजपा अपने सांसदों और मंत्रियों की वजह से खासी शर्मिंदगी झेल चुकी है, और यह सिलसिला जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुंह खोले बिना उनकी तरफ से ऐसी खबरें बिना किसी हवाले के बाहर आती हैं कि वे साम्प्रदायिक एजेंडा से नाखुश हैं, और संघ परिवार जिस तरह अखबारी सुर्खियों और टीवी की खबरों पर छाया हुआ है, उससे वे फिक्रमंद भी हैं, क्योंकि सरकार की उपलब्धियां धरी रह जा रही हैं। कुछ ऐसी खबरें भी हैं कि विश्व हिन्दू परिषद के भीतर डॉ. प्रवीण तोगडिय़ा के प्रमोशन से भी मोदी नाखुश हैं क्योंकि उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए वहां के सारे तोगडिय़ाओं के पर कतर कर रख दिए थे, और अब तोगडिय़ा देश भर में एक बड़े हिन्दू आक्रामक नेता के रूप में फिर जगह बना रहे हैं।
दरअसल संघ परिवार और भाजपा के संबंध, संघ परिवार और प्रधानमंत्री के संबंध, देश में ये हमेशा एक अटकल का सामान रहे, और कभी भी यह खुलासा नहीं हो पाता कि इनके अंतरसंबंध क्या हैं, किस पर किसका कितना काबू है। और फिर बीते दशकों में धीरे-धीरे कई ऐसे भगवाधारी भाजपा के रास्ते संसद तक पहुंचे हैं, जो कि आरएसएस के भी नहीं हैं, और भाजपा के भी नहीं हैं, वे महज भगवा हैं, और उनका अपना एक अलग एजेंडा है। ऐसे ही लोगों में साक्षी महाराज नाम के सांसद और एक साध्वी-मंत्री निरंजन ज्योति हैं जो कि पिछले दिनों मीडिया में मोदी से अधिक जगह पाकर पूरी दुनिया में ऐसी तस्वीर बना चुके हैं कि हिन्दुस्तान 22वीं सदी की तरफ नहीं, 6वीं सदी की तरफ बढ़ रहा है।
हम हर हिन्दू औरत के चार बच्चे पैदा करने की बात पर लौटें, तो इससे अधिक भयानक सलाह हिन्दू समाज के लिए और कुछ नहीं हो सकती। आज जब लोग चार बच्चों से दो की तरफ बढ़ चुके हैं, और ऐसे दो बच्चों को बेहतर पढ़ाने, बेहतर खिलाने, और अधिक कामयाब बनाने का काम चल रहा है, तो चार बच्चों को पैदा करके मुस्लिमों का मुकाबला करने का यह फतवा मानने वाला तो कोई नहीं है, लेकिन इससे देश के भीतर एक साम्प्रदायिक तनातनी खड़ा करने का काम साक्षी महाराज जरूर कर रहे हैं। और शायद उनकी उपयोगिता भी यही है।
लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह सोचना चाहिए कि क्या वे भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने के नाम पर बहुमत पाकर प्रधानमंत्री बने हैं, या फिर एक भ्रष्ट सरकार को हटाकर एक बेहतर सरकार लाने के लिए जनता ने उन्हें वोट दिया है? भारत कई बार साम्प्रदायिकता के सैलाब झेल चुका है, और यह तरीका किसी एक चुनाव में कहीं काम आ जाए तो आ जाए, लेकिन अगर पांच बरस ऐसी ही आग लगाई जाती रही, तो जनता आज ही इससे थक चुकी है, और लोग अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस आग को मोदी की मंजूरी है? मोदी और उनके सिपहसालारों ने यह बात जरूर देखी होगी कि हिन्दी और अंग्रेजी मीडिया के जो दिग्गज लोग पिछले एक बरस से मोदी का झंडा उठाकर चल रहे थे, उनमें से एक-एक करके हर कोई आज के माहौल का और उस पर मोदी की चुप्पी का बहुत बुरा आलोचक बन चुका है। हम भाजपा और मोदी की संभावनाओं की फिक्र नहीं कर रहे, लेकिन प्रधानमंत्री को देश के माहौल को सुलगाने-जलाने की चल रही हरकतों को ऐसा अनदेखा नहीं करना चाहिए, इतिहास उनकी चुप्पी को दर्ज करते चल रहा है।

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