देश के लोगों की ताकत का इस्तेमाल तरक्की के लिए न करके, धर्मान्धता के लिए..

संपादकीय
8 दिसम्बर 2017


राजस्थान में हिन्दू धर्म और संस्कृति का तकाजा देते हुए एक मुस्लिम पर लव जेहाद का आरोप लगाते हुए उसे खुलेआम काटकर मार डालने, उसका वीडियो बनाने, और फिर उसे बाकी मुस्लिमों के लिए चेतावनी के साथ जारी करने वाले एक हिन्दू नौजवान को पुलिस ने वीडियो सुबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया है। न तो इसे हिन्दू नौजवान के परिवार में किसी ने अंतरजातीय या विधर्मी विवाह किया है, और न ही जिस मुस्लिम प्रवासी मजदूर को मारा गया है, उसने किसी दूसरे धर्म में शादी की थी। हत्यारे ने हत्या के वीडियो के अलावा दो और वीडियो शेयर किया है जिनमें से एक में वो मंदिर में है और हत्या की जिम्मेदारी ले रहा है जबकि दूसरे वीडियो में वो भगवा ध्वज के सामने बैठा है और लव जिहाद और इस्लामिक जिहाद के खिलाफ भाषण दे रहा है। ये वीडियो उसके एक नाबालिग भतीजे ने ही रिकॉर्ड किए थे, और चारों तरफ फैलाए थे। आज राजस्थान के इस इलाके में तनाव का हाल यह है कि इन चाचा-भतीजे की गिरफ्तारी के बाद भी आसपास के इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। कल से मीडिया में ये वीडियो सामने आने के बाद देश के हजारों जिम्मेदार और समझदार लोगों ने इसकी तुलना तालिबान से की है कि हिन्दुस्तान के ऐसे धर्मान्ध और हत्यारे लोग तालिबानों से पीछे नहीं हैं।
हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि हम देश में बढ़ती हुई असहिष्णुता, धर्म और जाति की नफरत, कट्टरता, और हिंसा को लेकर हर हफ्ते-दो हफ्ते में इसी जगह फिक्र लिखते आए हैं कि देश को एक ऐसी अवैज्ञानिक कट्टरता में धकेला जा रहा है कि जिससे उबरने में पता नहीं कितना वक्त लग जाएगा। भड़काऊ बातों के झांसे में आकर, उनसे प्रभावित होकर, कमअक्ल और बिनसमझ वाले बहुत से लोग हिंसक हो चले हैं, भीड़ उन्मादी हो चली है, अपने धर्म और जाति को लेकर लोगों के मन में  गौरव उन्माद की हद तक बढ़ चला है, और दूसरे धर्मों और जातियों के लिए एक हिंसक हिकारत सड़कों पर सामने आ रही है। एक उग्र राष्ट्रवाद के लिए जरूरी निशाने के रूप में पड़ोस के एक देश, अपने भीतर के कुछ धर्म, अपने भीतर की कुछ जातियां, और महिलाओं सरीखे कमजोर बनाकर रखे गए तबकों पर हमले किए जा रहे हैं, और इन सबको एक ऐसे इतिहास से जोड़कर बताया जा रहा है जो कि कभी मौजूद नहीं था। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, और हर प्रदेश के चुनाव के साथ ऐसी हिंसा में और पेट्रोल झोंक दिया जा रहा है।
धर्मान्धता, कट्टरता, और साम्प्रदायिक नफरत किस तरह हिंसक हो सकते हैं, इसे अफगानिस्तान से लेकर इराक और सीरिया तक, तालिबान और आईएसआई की शक्ल में देखा जा चुका है, उसके बावजूद महान परंपराओं वाले इस देश में आज जनता को साम्प्रदायिक सरहदों में जिस तरह बांटा जा रहा है, जिस तरह पहले दर्जे के नागरिक और दूसरे दर्जे के नागरिक तय किए जा रहे हैं, वह बहुत भयानक है। देश में कुछ राज्यों में जिस तरह से बहुसंख्यक हिन्दू धर्म के धर्मराज की स्थापना का माहौल बनाया जा रहा है, उससे भी बाकी दुनिया में हिन्दुस्तान की इज्जत मटियामेट हो रही है, इस देश का अमन-चैन तो खत्म हो ही रहा है। आज नफरत भरे हुए दिल-दिमाग लेकर एक अकेला इंसान जिस परले दर्जे की हिंसा कर रहा है, उसे रिकॉर्ड करवा रहा है, उसे धमकी और चेतावनी की पहले से की गई रिकॉर्डिंग के साथ जोड़कर बांट रहा है, वह नौबत भयानक है। ऐसी एक-एक हिंसा देश के लोगों को बांटने और काटने की ताकत रखती है, वैसी तबाही फैला भी रही है। आज इस देश को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए धार्मिक और सामाजिक सद्भाव कायम रखना चाहिए, और देश के लोगों की ताकत का इस्तेमाल तरक्की के लिए करना चाहिए। लेकिन महज वोटों की चाहत में देश की संभावनाओं को जिस तरह से खत्म किया जा रहा है, वह इतिहास में अच्छी तरह दर्ज हो रहा है। प्रधानमंत्री को इस मामले पर देश भर के हजारों समझदार लोगों की सामने आई प्रतिक्रिया को देखना चाहिए, समझना चाहिए, और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करते हुए देश में साम्प्रदायिकता की आग को फैलने से रोकना चाहिए। लव जिहाद का नारा लगाते हुए उसके खिलाफ की गई इस हिंसा का हत्यारा तो कमअक्ल हो सकता है, लेकिन देश भर में लव जिहाद का आरोप लगाते हुए जो बड़े-बड़े मंत्री-मुख्यमंत्री नफरत फैला रहे हैं, वे तो कमअक्ल नहीं हैं। उनकी साजिशों के शिकार होकर आम लोग ऐसी हत्यारी और आत्मघाती हिंसा पर उतारू हो रहे हैं। (Daily Chhattisgarh)

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