नए साल का मौका नए इरादों और नए संकल्पों का बनाएं

संपादकीय
29 दिसम्बर 2017


नए साल का मौका अपने आपसे बहुत सी नई बातें तय करने का होता है। लोग इसे नए बरस के संकल्प कहते हैं, और यह भी मानते हैं कि ये संकल्प टिकते नहीं क्योंकि इन्हें नए साल के मौके पर महज एक औपचारिकता के लिए लिया जाता है। लेकिन फिर भी कैलेंडर बदलने का यह मौका इस काम में लाया जा सकता है कि लोग पिछले बरस तय की गई बातों को एक बार फिर गौर कर लें कि उनमें से कौन-कौन सी बातों पर वे कायम रह पाए हैं, और कौन सी बातों पर वे नहीं टिक सके। अभी दो-चार दिन पहले ही विख्यात फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने यह लिखा है कि लोगों को दिन में कुछ वक्त बिना कुछ किए हुए अकेले और शांत गुजारना चाहिए, अपने आपसे मिलना चाहिए। हर दिन तो पता नहीं कितने लोगों के लिए यह मुमकिन हो पाएगा, लेकिन नए साल के पहले हर किसी को इसके लिए जरा सा वक्त निकालना चाहिए, साल भर की अपनी चूक के बारे में भी सोच लेना चाहिए, और अगले बरस के लिए सावधानी की बात भी तय कर लेनी चाहिए।
हर किसी की जिंदगी में कोई न कोई खामी दूर करने, और कोई न कोई खूबी बढ़ाने की गुंजाइश तो रहती ही है। इसलिए बहुत सी ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं जिनका जरा सा जिक्र हम यहां कर रहे हैं, और लोग उनमें से जो बातें उन पर लागू होती हों, उनके बारे में सोच-विचार सकते हैं, और अपने आपसे कुछ वायदे भी कर सकते हैं। हम यहां पर यह याद दिलाना चाहेंगे कि मन के भीतर के वायदे तोडऩा बड़ा आसान होता है, और लोगों को यह सोचना चाहिए कि वे अपने आपको आसानी से धोखा न दे पाएं, इसके लिए उन्हें अपने नए साल के वायदों को अपने आसपास के लोगों को जरूर बताना चाहिए, ताकि उनसे फिरने पर वे लोग रोक-टोक सकें। घर-परिवार के लोग, दफ्तर या स्कूल-कॉलेज के लोग, दोस्तों की टोली, इन सबके बीच अगर लोग अपने फैसले बता देते हैं, तो उन पर कायम रहने की संभावना बढ़ जाती है।
हममें से कई लोग सिगरेट-बीड़ी, तम्बाखू खाते-चबाते या पीते हैं, और कैंसर से इसका बड़ा सीधा-सीधा रिश्ता सबकी जानकारी में हैं। छोडऩे के लिए यह एक सबसे जरूरी चीज है जो कि जिंदगी और मौत का फर्क ला सकती है। ऐसी ही एक दूसरी बात कोई नशा करना है, और नशा करके किसी भी तरह की गाड़ी चलाना है। इन दोनों ही बातों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। बहुत सी बातें संपन्नता से जुड़ी हुई हैं, लोगों का खान-पान ऐसा हो गया है कि वह उनके बाहर चर्बी बढ़ाते चलता है, और उनके भीतर दिल की धमनियों को संकरा बनाते चलता है। खून में शक्कर बढ़ाते चलता है, कोलेस्ट्राल बढ़ाता है, कई लोगों का बीपी भी बढ़ा देता है। नया साल अपने खानपान के बारे में सोचने का एक अच्छा मौका है, लोगों को यह तय करना चाहिए कि वे बेहतर सेहत के लिए खानपान पर कैसा काबू करें। सेहत से ही जुड़ी हुई एक दूसरी बात कसरत की है। सुबह या शाम की सैर, हल्की-फुल्की कसरत, थोड़ा-बहुत योग या प्राणायाम लोगों की सेहत को अच्छा बनाकर रखने में मददगार होता है, इसमें कोई शक नहीं है। और इनमें से किसी भी बात पर एक धेला भी खर्च नहीं होता। इसलिए लोगों को इस बारे में जरूर-जरूर सोचना चाहिए, और यह भी याद रखना चाहिए कि परिवार के भीतर अगर एक सदस्य भी ऐसी मिसाल पेश करते हैं, तो वह मिसाल बाकी लोगों को भी एक बेहतर जिंदगी की तरफ ले जाती है। इससे इलाज पर होने वाले खर्च की बचत भी होती है, उत्पादकता भी बढ़ती है, और परिवार के भीतर दुख-तकलीफ का खतरा भी घटता है।
सड़कों पर कुछ और किस्म की सावधानी जरूरी होती है, नशे से बचने के अलावा भी। दुपहिया चलाते हुए लोगों को हेलमेट का इस्तेमाल करना चाहिए, और अगर चारपहियों की गाड़ी में बैठे हैं, तो हर सीट पर मौजूद सीट बेल्ट का इस्तेमाल बहुत से हादसों में जिंदगी बचा सकता है। इन दो बातों के अलावा किसी भी तरह के वाहन पर महिलाओं और बच्चों को लेकर चलने में एक अतिरिक्त सावधानी की जरूरत रहती है, और हम अपने आसपास हर दिन हादसों में कई मौतों को देखते हुए भी ऐसी सावधानी अगर नहीं बरतते हैं, तो हम ऐसी गैरजिम्मेदारी अपनी अगली पीढ़ी को भी विरासत में दे जाते हैं। यहां पर हम कुछ ही बातों को लिख पा रहे हैं कि लोगों को नए साल को बेहतर बनाने के लिए, जिंदगी को सुरक्षित और सेहतमंद बनाने के लिए क्या-क्या करना चाहिए, और लोग अपने हिसाब से ऐसी लिस्ट बना सकते हैं, पूरे परिवार के साथ बैठ सकते हैं, और नए साल को एक बेहतर तरीके से मना सकते हैं। कोई भी बात अगर मुश्किल लगती है तो यह याद रखने की जरूरत है कि हजार मील का सफर भी पहले कदम के बाद ही शुरू होता है। (Daily Chhattisgarh)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें