शहरी विकास में बेदखल ठीक तरह से बसाए जाएं

संपादकीय
26 दिसम्बर 2017


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज सुबह कई दर्जन छोटी दुकानें गिराकर शहर के बीच बनने जा रहे एक बड़े जंगल के लिए जगह बनाई गई। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां की पिछले डेढ़ दशक में शहरों का बड़ा विकास हुआ है, वहां इस तरह की बात कभी आ सकती है कि लोगों को बेदखल करके एक बड़ी योजना के लिए जगह बनाई जाए। शहर के बीच से 70 छोटी दुकानों को हटाया गया है और शासन-प्रशासन से यह उम्मीद की जाती है कि इन छोटे कारोबारियों को नुकसान न होने देकर इन्हें कहीं ऐसी जगह फिर से बसाया जाए, जहां कि इनका काम चल सके। हमने शहर के कई दूसरों हिस्सों से लोगों के घर हटाए जाते देखे हैं जहां पर तालाब था और उसे फिर से तालाब कायम करने के लिए लोगों को हटाया गया, और बेहतर मकान बनाकर दिए गए।
रायपुर में नया रायपुर तो एक नियोजित शहर है, जो कि पूरी योजना के साथ अगले सौ बरस की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। लेकिन पुराना रायपुर तो बिना किसी योजना के टुकड़े-टुकड़े में बना और बसा है। ऐसे में यह दिक्कत ऐसे किसी भी दूसरे शहर की तरह इस शहर पर भी आ रही है कि नई योजनाओं के लिए सरकार के ही बसाये गए दूसरे हिस्सों को तोड़ा जा रहा है। इस एक पहलू को देखते हुए हमको लगता है कि न सिर्फ इस शहर में, बल्कि राज्य के दूसरे शहरों में भी सरकार को किसी भी तरह का खर्च करने के पहले यह देख लेना चाहिए कि अगले पच्चीस-पचास बरस की कौन सी जरूरतें हो सकती हैं। इसी तरह सड़क-फुटपाथ, डिवाइडर और चौक बनाते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि क्या कुछ बरस के भीतर उनको फिर हटाने या तोडऩे की जरूरत पड़ेगी? यह सोचना इसलिए जरूरी है कि यह सब इस राज्य की उस आधी आबादी के पैसों से भी हो रहा है जो कि गरीबी की रेखा के नीचे जी रही है। आज भी प्रदेश में जरूरतें कम नहीं हैं, लेकिन वे जरूरतें लगातार बढ़ रहे, विकसित हो रहे ढांचे को देखते हुए दिखाई नहीं पड़ती हैं। हम पिछले बरसों में रायपुर में ही लगातार सड़कों और डिवाइडरों को टूटते हुए देख रहे हैं, और कांक्रीट का मलबा पहाड़ सरीखा इकट्ठा हो जाता है। यह एक बड़ा नुकसान है, और बिना योजना के तेज रफ्तार से खर्च का यह सिलसिला खत्म होना चाहिए।
रायपुर शहर के बीच जिस तरह से सरकार अपनी खुद की कॉलोनी को हटाकर एक बड़ा जंगल बना रही है, जिस तरह से शहर में एक से अधिक जगहों पर हरियाली के बीच लाइब्रेरी विकसित हो रही है, उससे पूरे शहर का नक्शा बदलेगा, और लोगों की जरूरतें पूरी होंगी। लोगों ने शहर में ऐसी सहूलियत अभी तक देखी नहीं है, इसलिए आज बहुत से लोगों को यह अंदाज नहीं है कि आबादी के बीच हरियाली का इतना बड़ा इलाका विकसित होना क्या मायने रखता है। ऐसे में जिन लोगों को बेदखल किया जा रहा है, उन लोगों को बसाने के लिए प्रशासन को पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें