संपादकीय
16 दिसम्बर 2017

कांग्रेस पार्टी मोतीलाल नेहरू से जवाहर, इंदिरा, राजीव, सोनिया से होते हुए आज राहुल गांधी के हवाले हो गई है। कुनबापरस्त राजनीति की यह एक बड़ी लंबी मिसाल इसलिए है कि देश में बाकी कोई भी कुनबापरस्त राजनीतिक दल इतना पुराना नहीं है। नेहरू कुनबा 1919 से लेकर अब तक बीच-बीच में खासा अरसा इस पार्टी का अध्यक्ष रहा, यह एक और बात है कि बीच-बीच में दर्जनों दूसरे लोग भी इसके अध्यक्ष रहे। आजादी के पहले का एक दौर ऐसा था जब पार्टी नेहरू के कब्जे में नहीं थी, वे अकेले उसके सर्वेसर्वा नहीं थे, और कई दूसरे लोग भी अध्यक्ष बनते रहे। लेकिन नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद कांग्रेस पार्टी मोटे तौर पर उनके परिवार के भीतर रही, या फिर परिवार की मर्जी से उसमें समय-समय पर कुछ दूसरे अध्यक्ष बनाए गए। लेकिन यहां पर हम आजाद भारत के एक ऐसे दौर का जिक्र करना चाहते हैं जब यह कुनबा पार्टी पर कब्जे से पूरी तरह बाहर था, और प्रधानमंत्री की कुर्सी से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक दूसरे लोग रहे, और चुनावी शिकस्त के बाद पार्टी के अधिकतर लोग लौटकर सोनिया गांधी के चरणों में पहुंचे कि वे कमान सम्हालें और पार्टी को उबारें।
चूंकि राहुल गांधी आज पार्टी की अध्यक्षता नेहरू-गांधी कुनबे का होने की वजह से शुरू कर रहे हैं, इसलिए कुनबे की शोहरत या उसकी तोहमत, ये दोनों उनके साथ अंत तक चलने वाली बातें रहेंगी, और इससे उनका उबर पाना मुमकिन नहीं रहेगा। लेकिन कांग्रेस इस देश की अकेली कुनबापरस्त पार्टी नहीं है, यह चूंकि सबसे पुरानी है इसलिए इसके कुनबे के नाम अधिक लंबी लिस्ट बनाते हैं। वैसे तो मुम्बई में शिवसेना को देखें, शरद पवार की पार्टी को देखें, आन्ध्र में एनटीआर और चन्द्राबाबू को देखें, तेलंगाना में चन्द्रशेखर राव, तमिलनाडू में एमजीआर से लेकर जयललिता और शशिकला तक, कर्नाटक में देवेगौड़ा और उनका बेटा, छत्तीसगढ़ में शुक्ल परिवार, ओडिशा में पटनायक परिवार, मध्यप्रदेश से राजस्थान तक सिंधिया परिवार, उत्तरप्रदेश में मुलायम परिवार, बिहार में लालू परिवार, पंजाब में बादल परिवार, कश्मीर में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार, हरियाणा में कुनबे ही कुनबे, और दूसरे कई इलाकों में इसी तरह की राजनीतिक वंशावली अच्छी तरह कायम हैं। ऐसे देश में कांग्रेस को कोसने के लिए तो यह ठीक है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों ने यह हिसाब लगाया है कि करीब साढ़े पांच सौ परिवार ही ऐसे हैं जो कि देश की संसद और विधानसभाओं पर हावी हैं, वहां काबिज हैं, या वहां के फैसले लेते हैं।
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| कांग्रेस के तीन अध्यक्ष- इंदिरा, सोनिया, राहुल गांधी |

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