आज एक अकेला जिद्दी चना भी टेक्नालॉजी साथ लेकर भाड़ को फोड़ सकता है...

संपादकीय
14 दिसम्बर 2017


भारत के कानून और दुनिया की टेक्नालॉजी ने मिलकर इस देश में सच और झूठ को बड़ी रफ्तार से उजागर कर देने का दिन ला दिया है। एक तरफ तो पिछली मनमोहन सिंह सरकार के वक्त देश में लागू हुआ सूचना के अधिकार का कानून लोगों के हाथ में एक अभूतपूर्व और बेमिसाल ताकत दे चुका है, दूसरी ओर टेक्नालॉजी ने सब कुछ इतना आसान कर दिया है कि गुजरात चुनाव में जब मोदी ने समुद्री विमान में सफर करके सुर्खियां बटोरीं, तो कुछ घंटों के भीतर ही लोगों ने ये सुबूत जुटाकर सामने रख दिए कि अमरीका का यह समुद्री विमान पाकिस्तान होते हुए भारत पहुंचा, और प्रधानमंत्री ने उसमें सफर किया। अब यहां पर कई बातें उठना अभी बाकी है कि ऐसे विदेशी, और पाकिस्तान से होते हुए आए समुद्री विमान पर एक व्यवसायिक विदेशी पायलट के साथ भारतीय प्रधानमंत्री का यूं सफर करना क्या उनकी सुरक्षा के नियमों को तोडऩा नहीं हुआ? दूसरी बात आनन-फानन में यह सामने आई कि यह भारत का पहला समुद्री विमान सफर नहीं था, और इस देश में अंडमान के इलाके में बरसों से समुद्री विमान आम लोगों के लिए चल रहे हैं। केरल के मुख्यमंत्री ने तुरंत वहां चलने वाले समुद्री विमानों की तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की कि किस तरह केरल से लक्षद्वीप के लिए 2015 से समुद्री विमान सेवा चल रही है। कुछ लोगों ने यह भी ढूंढकर निकाला कि अंग्रेजों के वक्त ग्वालियर रियासत में एक झील में समुद्री विमान उतरते थे। अब अंग्रेजों के वक्त की यह जानकारी सही हो चाहे न हो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की वेबसाइटों से इस सुर्खी को तुरंत हटा दिया गया कि वे समुद्री विमान से भारत में सफर करने वाले पहले व्यक्ति हैं।
आज दुनिया की वेबसाइटों पर किसी भी विमान के नंबर से यह जानकारी निकालना आसान है कि वह किस-किस रास्ते किस-किस तारीख को कब उड़कर कहां पहुंचा। और उत्साही लोगों ने आनन-फानन मोदी के इस्तेमाल वाले इस समुद्री विमान के बारे में जानकारी निकालकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। अभी दो दिन पहले ही कांग्रेस पार्टी ने अपने एक बयान में यह याद दिलाया कि देश में भ्रष्टाचार के बहुत से मामले इसलिए उजागर हो पाए हैं कि कांग्रेस ने देश में सूचना का अधिकार लागू किया है। इन दो बातों को देखते हुए ऐसा लगता है कि पिछली पीढ़ी के लोगों को आज भारत के नए कानून, और दुनिया की नई टेक्नालॉजी के बीच सांस लेना सीखना होगा। वे दिन अब हवा हुए जब लोगों के बड़े-बड़े स्कैंडल छुप जाते थे। आज तो हिन्दुस्तान में आबादी के इलाकों में औसतन हर सौ वर्गफीट पर कोई न कोई एक मोबाइल कैमरा जीता होगा। ऐसे में कोई भी बात छुपना भी थोड़ा मुश्किल है, और लोगों के किसी भी तरह के बेबुनियाद दावों के पांवोंतले से भी दरी या कालीन पल भर में खींच ली जाती है।
हमारा ख्याल है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक समझ और सीख जिस रफ्तार से बढ़ती है, उससे कई गुना अधिक रफ्तार से टेक्नालॉजी आगे बढ़ जा रही है। इसके साथ-साथ लोगों में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर जागरूकता और समझ भी बढ़ती जा रही है। भारत में अपने अनगिनत भांडाफोड़ में यह देखा है कि उसके लिए किसी बहुत बड़े बहुमत की जरूरत नहीं होती, किसी बहुत बड़े संगठन की जरूरत नहीं होती, हवाला डायरियां एक अकेले आदमी ने उजागर की थी, इसी तरह पिछले दस-बीस बरस में भारत में सामने आए अधिकतर स्कैंडल अकेले लोगों ने ही उजागर किए हैं। इसलिए ताकतवर लोगों, और ताकतवर संगठनों को यह समझने की जरूरत है कि आज एक अकेला जिद्दी चना भी टेक्नालॉजी साथ लेकर भाड़ को फोड़ सकता है। वे दिन इतिहास हो गए हैं जब कहा जाता था कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता। इस देश में एक अकेले राजनारायण ने करीब आधी सदी पहले नेहरू की बेटी की सरकार फोड़कर रख दी थी जिसकी कि भारत में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।
आज भारत के बड़े-बड़े नेताओं के कुछ बरस पहले के वीडियो, उनकी तस्वीरें, और उनकी कही और लिखी हुई बातें निकाल-निकालकर लोग उनके सामने पोस्टर बनाकर रखते आ रहे हैं। लेकिन भारत के नेताओं में इस बात की फिक्र अभी कम ही दिख रही है कि उनके अतीत के कंकाल कब्र से निकलकर, सड़कों पर आकर, उनकी ताजपोशी की राह के रोड़े बन सकते हैं। हमारा ख्याल है कि भारत जैसे लोकतंत्र के नेताओं के लिए सावधानी का एक ऐसा कोर्स शुरू किया जाना चाहिए जो कि उन्हें झूठ और फरेब की शर्मिंदगी से बचाने में मददगार हो। (Daily Chhattisgarh)

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