पाक फौजी जनरल की ओर से समझदारी की एक बात

संपादकीय
23 दिसम्बर 2017


बहुत दिनों बाद पाकिस्तान की फौज के किसी अफसर से एक समझदारी की बात सामने आई है जो कि युद्धोन्माद से परे की है, और दोनों देशों के ताकतवर लोगों के लिए एक संदेश भी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने भारत से रिश्ते सुधारने की वकालत की है। उन्होंने पाकिस्तान के सांसदों को आश्वासन दिया है कि पाकिस्तानी सेना उनके प्रयासों का समर्थन करेगी। मंगलवार को पाकिस्तान की सीनेट कमेटी की बैठक में दिए अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा, सेना भारत के साथ संबंध सामान्य करने के तहत उठाए गए राजनीतिक कदमों का समर्थन करती है। पाकिस्तानी सेना को लेकर आम तौर पर माना जाता है कि वह भारत के खिलाफ रहती है। इसलिए उसके मौजूदा मुखिया के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि इस मौके पर जनरल बाजवा ने कुछ बातें भारत के खिलाफ भी कही हैं, लेकिन हम उन पर जाना नहीं चाहते। तनाव बढ़ाने के लिए तो किसी की भी कुछ बातों को पकड़ा ही जा सकता है, लेकिन तनाव घटाने के लिए जब कभी कोई बात सामने आती है तो उसका इस्तेमाल करना चाहिए। हमारा यह मानना है कि किसी भी देश की फौज को बहुत सारे मुद्दों का इलाज जंग में दिखता है क्योंकि उनकी पूरी ट्रेनिंग और उनकी पूरी सोच उसी किस्म से बनी रहती है। इसके साथ-साथ फौज का अस्तित्व भी जंग के समय ही लोगों को दिखता है, इसलिए भी भारत और पाकिस्तान के बहुत से मौजूदा फौजी अफसर, और अधिकतर रिटायर्ड फौजी अफसर टीवी के चैनलों पर जंग के फतवे देते दिखते हैं। हमारा मानना है कि ऐसी बकवास से दोनों ही देश अपने गरीबों को अनदेखा करते हुए फौज पर अंधाधुंध खर्च करते हैं जो कि इन दोनों ही देशों के लिए आत्मघाती है, लेकिन उसे आत्मगौरव से और राष्ट्रवाद से इस तरह जोड़ दिया गया है कि देश के लोगों को भूखे रहकर भी सरहद के लिए फौजी सामान खरीदना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के बीच कई जंग हो चुकी हैं, लेकिन उससे न तो कोई नतीजा निकला है, और न ही निकलेगा। इन दोनों ही देशों ने परमाणु हथियार बना रखे हैं, लेकिन आज के अंतरराष्ट्रीय माहौल में किसी भी लोकतांत्रिक देश के फौजी हथियार उसके अपने अहंकार की सेवा करने के अलावा और किसी काम के हैं नहीं। भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह की परमाणु जंग न चीन होने देगा, और न अमरीका, और न ही रूस। ऐसे में इन दोनों देशों को सरहद पर तनाव घटाना चाहिए, दोनों देशों के बीच आम लोगों के रिश्ते लगातार बढ़ाना चाहिए, कारोबार लगातार बढ़ाना चाहिए, खेलकूद से लेकर संगीत और कला तक का आना-जाना बढ़ाना चाहिए। यहां पर हम एक खास जिक्र भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का करना चाहेंगे जो कि लगातार ट्विटर पर दिखती हैं और पाकिस्तान के लोगों को इलाज के लिए भारत आने का वीजा मंजूर करते हुए उन्हें बेहतर सेहत के लिए शुभकामनाएं भी देती हैं। हमारा मानना है कि ऐसी ही सद्भावना से हम सरहद के दोनों तरफ के सबसे गरीब लोगों को उनका बेहतर हक दे पाएंगे। इसके अलावा और कोई जरिया आज दुनिया में नहीं है। फौजी तनाव किसी के काम का नहीं है। और भारत और पाकिस्तान के बीच तो कारोबार की इतनी गुंजाइश है कि दोनों तरफ के बहुत से लोगों को इससे फायदा होगा।
जनरल बाजवा ने जो कहा वह पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय बात नहीं मानी जाएगी, लेकिन वह बात बहुत महत्वपूर्ण है, और भारत की तरफ से उसका कोई फौजी जवाब न जाकर, लोकतांत्रिक जवाब जाना चाहिए। जब-जब कोई देश अपनी विदेश नीति को, पड़ोसियों से अपने रिश्तों को फौजी अफसरों पर छोड़ते हैं, तो वे आमतौर पर जंग की बातें करने लगते हैं। भारत एक अधिक मजबूत लोकतंत्र है, और उसे ऐसी बातों से बचना चाहिए। किसी भी तरफ से एक सकारात्मक पहल हुई है, और उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। (Daily Chhattisgarh)

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