संपादकीय
17 जुलाई 2018

पश्चिम के जिन देशों में स्कूली बच्चों को यौन शिक्षा दी जाती है, वहां की एक शिक्षिका ने कमउम्र बच्चों के पूछे गए सवालों की एक लिस्ट तैयार की है। उनके सवाल बताते हैं कि जिन समाजों में बच्चों को सेक्स की वैज्ञानिक जानकारी देने से परहेज नहीं किया जाता, वहां भी बच्चों के मन में कितने किस्म की अधूरी या गलत जानकारी रहती है, और इस बारे में क्लास में पढ़ाना थोड़ा अटपटा होते हुए भी उन बच्चों के लिए इसे समझना कितना जरूरी होता है। भारत में पिछली आधी सदी से यह चर्चा ही चर्चा है कि बच्चों को यौन शिक्षा दी जाए, और इसके लिए स्कूल की बड़ी कक्षाओं के बच्चों से लेकर कॉलेज पहुंचे बच्चों तक के बारे में सोचा जाता रहा है, लेकिन समाज के एक दकियानूसी तबके के हमलावर तेवरों के चलते हुए यह कभी मुमकिन नहीं हो पाया। यहां तक कि जीव विज्ञान की कक्षा में बच्चों को मानवीय देहविज्ञान के बारे में पढ़ाने पर लोग झंडा-डंडा लेकर उसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए सड़कों पर उतर आते हैं। भारत पिछले बरसों में ऐसे भी बहुत से आंदोलन देखे जिसमें सिर्फ लड़कियों की क्लास को सेनेटरी पैड के बारे में बताने को भी भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया गया और स्कूलों पर प्रदर्शन किया गया।
इस विषय पर आज लिखने की जरूरत इसलिए लग रही है कि पश्चिम के जिन बच्चों की चर्चा से आज यहां लिखा जा रहा है, उनके मन में भी सेक्स को लेकर, बच्चे पैदा करने को लेकर कई किस्म की ऐसी उत्सुकता है जिसे सुनकर शिक्षक-शिक्षिका पहले तो हँसते हैं, फिर उन्हें अच्छी तरह वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर समझाते हैं। जाहिर है कि भारत जैसे देश में भी बच्चों के मन में बहुत किस्म की उत्सुकता-जिज्ञासा रहती है, लेकिन सेक्स के बारे में कुछ भी जानने-समझने के लिए उनके पास गैरकानूनी रूप से भारत में लाए गए विदेशी अश्लील साहित्य या इंटरनेट पर मौजूद बहुत ही कू्रर और हिंसक पोर्नो ही रहते हैं। इससे परे सेक्स की पहली और आखिरी जो चर्चा बच्चों को सुनाई पड़ती है, वह बलात्कार की रहती है, और ऐसे अप्राकृतिक और हिंसक सेक्स की चर्चा से उनके दिल-दिमाग पर जाहिर तौर पर बुरा असर पड़ता है।
भारत को अपने पाखंड से बाहर निकलना चाहिए कि बच्चों को या किशोरों को सेक्स की बातें समझाना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। हकीकत तो यह है कि यह देश दुनिया के कुछ सबसे पुराने सेक्स-ग्रंथों का जन्मदाता है, यहां पर किशोरों को सेक्स की बातों को समझने के लिए नगरवधुओं के पास भेजा जाता था, और इसे इसी किस्म से वर्जित विषय नहीं माना जाता था। आज हिंदुस्तान में नाबालिग बच्चे गिरोह बनाकर किसी नाबालिग लड़की से बलात्कार करते पकड़ा रहे हैं। हर दिन कहीं न कहीं से ऐसी खबर आती है। निर्भया सहित कई ऐसे चर्चित बलात्कार कांड हुए हैं जिनमें बालिगों के साथ-साथ नाबालिग बलात्कारी भी हिस्सेदार थे, और देश की अदालतों से लेकर संसद तक को यह सोचना पड़ रहा है कि क्या ऐसे जुर्म में हिस्सेदार नाबालिगों को सजा के मामले में बालिग ही माना जाए? जब समाज लगातार छोटे-छोटे बच्चों के साथ बलात्कार देख रहा है, और नाबालिग बच्चों को बलात्कार करते भी देख रहा है, तो अब हिंदुस्तानी समाज को अपने बच्चों को सावधान करने के लिए, और वैज्ञानिक जानकारी देने के लिए कम से कम स्कूल की बड़ी कक्षाओं से तो सेक्स-शिक्षा, यौन-शिक्षा, या देह-शिक्षा शुरू करनी चाहिए। इसके बिना अज्ञान में कई बच्चे सेक्स-अपराध के शिकार हो रहे हैं, और सेक्स-अपराध कर भी रहे हैं। यह देश जागने में जितनी देर करेगा, उसके बच्चों पर उतना ही अधिक जुल्म होगा। (Daily Chhattisgarh)

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