छत्तीसगढ़ी जनता को मिला इक्कीसवीं सदी का एक बुनियादी हक

संपादकीय
31 जुलाई 2018


छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जहां हर हाथ में मोबाइल फोन होगा, और वह भी महज कॉल करने के लिए नहीं, सभी तरह के इंटरनेट-डिजिटल कामों के लिए भी। सवा दो करोड़ आबादी के इस राज्य में पचास लाख लोगों को मुफ्त डेटा के साथ स्मार्टफोन देना शुरू हो गया है। कल के एक जलसे में छत्तीसगढ़ के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह ने इस मुफ्त फोन के बारे में अपनी और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सोच बताई कि कैसे इससे गांव-गांव में महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा। यह योजना रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल की आखिरी योजना है, और एक सबसे बड़ी योजना भी। मोबाइल फोन, खासकर स्मार्टफोन शहरों में तो हर हाथों में दिखता है लेकिन गांवों में, और खासकर महिलाओं में इस तक पहुंच कम है।
अब यह समझने की जरूरत है कि सरकार की तरफ से एक चौथाई आबादी को ऐसे तोहफे की क्या जरूरत थी। इस शब्द, तोहफे, के पीछे ही पूरी कहानी छिपी हुई है। इस प्रदेश में रमन सरकार ने पिछले तीन कार्यकाल में हर इंसान के पेट भर खाने का पुख्ता इंतजाम करके एक बड़ा काम किया जिसकी दुनिया भर में वाहवाही हुई और छत्तीसगढ़ में कुपोषण घटा, भूख से मौतें अब इतिहास बन गईं। इसके बाद केन्द्र सरकार की कई योजनाओं के चलते, और राज्य की अपनी योजनाओं से भी गरीबों को मकान मिलना शुरू हुआ जो कि जारी है। इन दो बड़ी बुनियादी जरूरतों के बाद यह इक्कीसवीं सदी की बुनियादी जरूरत है, फोन-इंटरनेट। आटा के बाद अब डाटा।
योरप के कुछ सबसे जिम्मेदार लोकतंत्रों ने इंटरनेट के इस्तेमाल को नागरिकों का मूल अधिकार मान लिया है। इसे संवैधानिक दर्जा भी दे दिया है। योरप से दूर, कल तक का पिछड़ा, गरीब राज्य आज उसी दिशा में आगे बढ़ा है। अब यहां के सबसे विपन्न लोग भी डाटा-सम्पन्न हो रहे हैं। इंटरनेट तक पहुंच लोगों की जागरूकता, सम्पन्नता और आत्मनिर्भरता, इन सबको बढ़ाने का काम है। जो शहरी संपन्न और शिक्षित लोग हैं, उन्हें यह गरीबों को दिया जा रहा एक तोहफा लगेगा, वे इस बात को नहीं समझ पाएंगे कि यह तोहफा नहीं, हक है। यह इस जमीन के हर इंसान का इक्कीसवीं सदी का हक है जिसकी जल, जंगल, जमीन, और खदानों से शहरी लोग संपन्न हुए हैं, हो रहे हैं। यह राज्य के प्राकृतिक साधनों से उपजी संपन्नता के एक बड़े-छोटे हिस्से का सामाजिक बंटवारा है। जिन लोगों के घर-दफ्तर वाई-फाई से लैस हैं, वे आम लोगों के लिए इस बात का महत्व नहीं समझ पाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे कि उन्होंने कई बरस पहले रमन सिंह के लागू किए एक रूपये किलो चावल का महत्व नहीं समझा था?
अब छत्तीसगढ़ सरकार को इस फोन के रास्ते महिलाओं की जागरूकता, बच्चों की पढ़ाई जैसे कामों को आगे बढ़ाना चाहिए। इस मोड़ पर सरकार को कुछ ऐसे कल्पनाशील लोगों को साथ लेना चाहिए जो गरीब तबकों की इस नई डिजिटल संपन्नता से उनका ज्ञान समृद्ध भी कर सके। फिलहाल इस बहुत बड़ी पहल के लिए रमन सिंह-अमन सिंह को बधाई। (Daily Chhattisgarh)

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