नाउम्मीदी के बीच भी इमरान की संभावनाएं

संपादकीय
27 जुलाई 2018


इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं, तो हिन्दुस्तान के साथ जुड़ी उनकी कई किस्म की यादें सामने आ रही हैं। उनके साथ क्रिकेट खेलने वाले लोगों की यादें तो सबसे अधिक हैं, लेकिन उससे परे भी फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया से जुड़े हुए लोग भी उनके बारे में लिख रहे हैं। उनकी एक पुरानी तस्वीर भी सामने आई है जिसमें चौथाई सदी से भी पहले जब वे भारत में क्रिकेट खेलने पाकिस्तानी टीम की तरफ से आए थे और उस वक्त भारत की एक बड़ी साबुन कंपनी, गोदरेज के एक इश्तहार में वे मॉडल थे। अपने चेहरे और दस्तखत के साथ वे हिन्दुस्तान की इस कंपनी का साबुन हिन्दुस्तान में बेच रहे थे। अब इस बात को देखकर याद पड़ता है कि एक वक्त ऐसा था। और आज का वक्त इन्हीं दोनों देशों के बीच एक ऐसे गैरजरूरी और नाजायज तनाव से भरा हुआ है जिसमें दोनों देशों के बीच क्रिकेट भी बंद हो चुका है, एक-दूसरे की फिल्में, एक-दूसरे के टीवी सीरियल, रियलिटी शो में काम करना बंद हो गया है, और हिन्दुस्तान में पाकिस्तान के मशहूर गायकों के कार्यक्रम भी बंद हो गए हैं। 
दोनों देशों की राजनीति और फौज से जुड़े हुए लोगों ने आपसी बातचीत में नाकामयाबी से ऐसी नौबत लाकर खड़ी की है कि आज एक-दूसरे देश में खिलाड़ी और कलाकार कुछ कर भी नहीं सकते। अगर दूसरे देश में जाकर दोस्ती की बात करके आते हैं, तो ऐसे बहुत से लोगों को हिन्दुस्तान में गद्दार कहना एक आम बात हो गई है, और कांग्रेस के लोगों से लेकर भाजपा के लालकृष्ण अडवानी तक ऐसे हमलों का शिकार हुए हैं। लेकिन दूसरी तरफ हकीकत यह है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच इन दोनों देशों की सबसे बड़ी संख्या की रिश्तेदारियां एक-दूसरे देश में ही हैं। इन दोनों की सरहद एक-दूसरे से ऐसी मिली हुई है कि दोनों तरफ की आबादी में आपस में रिश्तेदारियां हैं, जुबान एक है, खानपान, लोककला, और कपड़ों के परंपरागत फैशन भी एक ही हैं। लोक संगीत सुनें, तो वह भी सरहद के दोनों तरफ के गांवों में एक सरीखा ही है। दोनों के कारोबारी हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और तनातनी से परे की हकीकत यह है कि दोनों के बीच सामानों की खरीदी-बिक्री खासी होती है। शक्कर से लेकर प्याज तक की आवाजाही चलती ही रहती है। हिन्दुस्तान में जो लोग पाकिस्तान के बारे में कड़वी बातें कहते हैं, उनकी चाय को भी पाकिस्तानी शक्कर मीठा करती है। 
ऐसे में इमरान खान अगर प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उनको भारत के बारे में ऐसी तमाम बातों को याद रखना चाहिए, और क्रिकेट से लेकर संगीत तक, फिल्म और साहित्य तक, कारोबार और इलाज तक, इन तमाम चीजों में सरहद को धुंधला करने की कोशिश करनी चाहिए, दोस्ताना रिश्ते बढ़ाने चाहिए। उनके साथ आज यह तोहमत जुड़ी हुई है कि वे फौज के जिताए जीतकर आए हैं, और वे फौज की जेब में रहेंगे। हो सकता है कि यह बात सच भी है, लेकिन दुनिया का इतिहास बताता है कि बहुत से लोग सत्ता में चाहे किन्हीं हालात में आते हों, उसके बाद उन्हें अपना एक नया रूख तय करने का हक तो रहता ही है। इमरान खान प्रधानमंत्री की हैसियत से भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखेंगे, इसमें बहुत से लोगों को शक है। हमने भी इसी जगह कल इसी आशंका को लिखा भी है। लेकिन फिर भी एक इश्तहार की पुरानी तस्वीर ने आज एक उम्मीद जगाई है कि उस वक्त भी हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच 1965 और 1971 की दो बड़ी जंग हो चुकी थीं, लेकिन उसके बाद के बरसों में पाकिस्तानी चेहरा हिन्दुस्तान में सामान बेचने के लायक माना गया था, और बरसों तक इमरान का वह इश्तहार चलते रहा। तमाम आशंकाओं के बीच भी उम्मीदों को जगाए रखना चाहिए, और तमाम तनाव के बीच भी दोस्ती की कोशिश जारी रखनी चाहिए। इमरान खान का आज पाकिस्तान के भीतर दांव पर कुछ नहीं लगा है। वे आज जिस ओहदे तक पहुंच रहे हैं, उससे अधिक उन्हें और कुछ हासिल नहीं हो सकता, सिवाय इतिहास में एक महान नेता की जगह पाने की संभावना के। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान इन दोनों के सबसे गरीब, सबसे जरूरतमंद लोगों को देखते हुए दोनों ही देशों के हुक्मरानों को तनाव खत्म करना चाहिए जिससे सिर्फ और सिर्फ एक का भला होता है, जंग के हथियार बनाने वाले कारखानेदारों का। इमरान खान को एक क्लीन स्लेट के साथ एक सकारात्मक पारी खेलना शुरू करना चाहिए, यही एक बात उन्हें और आगे ले जा सकती है। और यही तमाम बात हम हिन्दुस्तान के हुक्मरानों से भी कहना चाहते हैं। (Daily Chhattisgarh)

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