संपादकीय
8 जुलाई 2018

केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा आमतौर पर कभी हिंसक और साम्प्रदायिक बयान देते नहीं देखे जाते जो कि कई केन्द्रीय मंत्रियों की अकेली पहचान बन चुकी है। लेकिन अब उन्होंने जो काम किया है उसने न सिर्फ भारत सरकार को शर्मनाक साबित किया है, बल्कि समूचे हिंदुस्तान का सिर झुका दिया है कि यह जनता के पैसों पर ताकत और ऐशोआराम करने वाले, संविधान की शपथ लेकर काम करने वाले इंसान की ऐसी हरकत झेलने के लिए मजबूर है। और ऐसे इंसान का खर्च ढोते रहना भी इस देश की जनता की मजबूरी है, इस देश का संविधान इतना लचीला हो गया है कि जिनके हाथ ताकत हो, वे उसे चुइंगगम की तरह चबा सकते हैं, और चबाकर थूक भी सकते हैं। दुनिया के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय हार्वर्ड से पढ़कर आए जयंत सिन्हा से बेहतर तो देश के वे अनपढ़ आम लोग हैं जो बेकसूरों के कत्ल के हिमायती नहीं है।
झारखंड में कुछ वक्त पहले एक मुस्लिम मांस व्यापारी की गाड़ी रोकी गई और उसमें गोमांस होने की तोहमत लगाकर भीड़ ने गाड़ी जला दी थी, और उस मुस्लिम को दिनदहाड़े खुली सड़क पर पीट-पीटकर मार डाला था। कातिल भीड़ के चेहरों सहित इस कत्ल की तस्वीरें और वीडियो चारों ओर फैले थे जिन्होंने पूरे देश को बाकी दुनिया में बदनाम किया था। इससे परे ऐसी भीड़ हत्या ने देश के भीतर अल्पसंख्यकों में दहशत भर दी थी, जो कि शायद इस कत्ल का मकसद ही था। जिला अदालत ने इस भीड़-हत्या के दर्जन भर लोगों को उम्रकैद सुनाई थी और वे जेल में थे। झारखंड हाईकोर्ट ने इन लोगों की अपील पर इनकी सजा स्थगित कर दी और इन्हें जमानत दे दी। ये लोग जब जमानत पर छूटकर आए तो केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने अपने बंगले पर इनका स्वागत किया, इन्हें मालाएं पहनाईं और इन्हें बधाई देते हुए तस्वीरें खिंचवाईं, इस पर देश के जिम्मेदार और अमनपसंद लोग हक्का-बक्का रह गए। जयंत सिन्हा के पिता और निराशा में भाजपा छोड़ चुके पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस पर खुद ही ट्वीट करते हुए लिखा कि कल तक वे एक लायक बेटे के नालायक पिता थे लेकिन आज हालत उल्टी हो गई है। झारखंड के इस जिले के जिला भाजपा अध्यक्ष ने जमानत पर इस रिहाई पर खुशी मनाते हुए पार्टी दफ्तर में प्रेंस कांफ्रेंस की।
अब सवाल यह उठता है कि ऐसे किसी जुर्म के लोगों को जमानत मिलने पर अगर केन्द्र और राज्य की सत्ता में बैठी पार्टी और उसके नेता-मंत्री सार्वजनिक खुशी मनाते हैं तो यह इस धर्मनिरपेक्ष देश की आत्मा पर जोरों की एक लात है और तकलीफ यह है कि ऐसी लात का खर्च देश की जनता उठा रही है। चारों तरफ से धिक्कार के बाद जयंत सिन्हा ने एक ढुलमुल सा बयान दिया है कि उन्हें देश के कानून पर पूरा भरोसा है।
अब अगर देश के कानून पर इतना ही भरोसा है, तो इस कानून ने आज की तारीख तक तो इन दर्जन भर लोगों को कातिल करार देकर इन्हें उम्रकैद दी है। इस सजा पर कुछ कहे बिना अदालत ने इनकी अपील पर महज सजा स्थगित करके उन्हें जमानत दी है,जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीदें अभी बाकी हैं। ऐसे में भीड़-हत्या के कातिलों की जमानत पर माला पहनाकर उनका स्वागत करना क्या भारत के संविधान की शपथ है? जयंत सिन्हा अकेले नहीं हैं, उनकी तरह के बहुत से और मंत्री और दिग्गज नेता हैं लेकिन दिक्कत यह है कि जयंत सिन्हा तो ऐसे नहीं थे। तो अब क्या वे भी देश के ताजा माहौल में इसे जायज और जरूरत मान रहे हैं कि गैरगुंडों द्वारा की गई भीड़-हत्या की खुशी में हत्यारों को मालाएं पहनाएं? (Daily Chhattisgarh)

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