कारोबारी मुकाबले से ग्राहकों का मुनाफा...

संपादकीय
9 जुलाई 2018


भारत में मुकेश अंबानी की कंपनी, रिलायंस जियो ने अपने आने के बाद से भारत के दूरसंचार उद्योग में जिस तरह की खलबली मचाई है, वह देखने लायक है। किसी कंपनी की कारोबारी-कामयाबी पर आमतौर पर यहां लिखने की कोई वजह नहीं बनती, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले से देश की जनता को सस्ते रेट में टेलीफोन और डेटा सेवाएं मिल रही हैं, इसलिए यह मायने रखता है। रिलायंस ने लोगों को मुफ्त में बात करना सिखाया, और केवल डेटा इस्तेमाल करने का भुगतान लिया। इससे गरीब और मध्यमवर्ग तक के लोगों पर बहुत बड़ा असर पड़ा, और बाकी लोगों को भी एक बेहतर कनेक्टिविटी वाली सेवा मिली। अब हो सकता है कि बाजार में अपने दैत्याकार एकाधिकार को कायम करने के बाद मुकेश अंबानी भी लोगों से अपनी कमाई बढ़ाना शुरू करे, लेकिन तब तक हो सकता है कि बाजार में कोई और भी आ जाए, कोई और नई तकनीक भी आ जाए। आज का कारोबार समझ के साथ-साथ कल्पनाशीलता और तकनीक के इस्तेमाल दोनों से जुड़ा रहता है, और इसके साथ-साथ मार्केटिंग की जरूरत तो हर किसी को रहती ही है। 
अब रिलायंस ने घरों तक टीवी के सिग्नल पहुंचाने के कारोबार की घोषणा की है, और इन सिग्नलों के साथ-साथ लोगों को लैंडलाईन से फोन और इंटरनेट की सहूलियत भी मिलेगी। यह सब कुछ एक साथ घरों तक पहुंचाने का काम बाजार के तौर-तरीकों को बदलकर रख देगा। आज घरों तक टीवी सिग्नल पहुंचाने के लिए या तो स्थानीय केबल ऑपरेटरों का आमतौर पर स्तरहीन काम रहता है, या फिर जिन डीटीएच ऑपरेटरों का बाजार पर कब्जा है, उन्होंने ये सेवाएं बहुत ही महंगी कर रखी हैं। रिलायंस अपने आकार, अपनी तकनीक, और अपनी मार्केटिंग, इन तीनों की वजह से अब डीटीएच के कारोबार को उसी तरह झकझोरने जा रहा है जिस तरह उसने मोबाइल बाजार को हिलाया था। कुल मिलाकर यह ग्राहक के हित की बात है कि बाजार आपसी मुकाबले में अपना मुनाफा घटाए, और लोगों को कम दाम पर सामान या सेवा दे। इस हिसाब से अभी बाजार का यह मुकाबला लोगों को बेहतर और अच्छी सेवा देने जा रहा है। 
लेकिन इसके साथ-साथ एक बात और समझने की जरूरत है कि कारोबारी अगर अपने काम को नहीं सुधारेंगे, अपने सामान और अपनी सेवा को नहीं सुधारेंगे, तो वे किसी भी दिन बाजार से बाहर हो सकते हैं। भारत में अलग-अलग इलाकों में काम करने के लिए कितनी ही दूरसंचार कंपनियों ने लाइसेंस हासिल किए थे, लेकिन उनमें से एक-एक कर अधिकतर कंपनियों को अपना धंधा समेटना पड़ा, और दूसरी बड़ी कंपनियों को बेचना पड़ा। उन बड़ी-बड़ी बाकी बची कंपनियों को आज जब रिलायंस से मुकाबला करना पड़ रहा है, तो उनका भी पसीना निकल रहा है। इस मिसाल से सबक लेकर हर किस्म के कारोबारी को चाहिए कि वे किसी भी अनदेखे, अनसोचे मुकाबले के लिए भी तैयार रहें, और अपने काम को लगातार बेहतर बनाते रहें। आज रिलायंस को एक अच्छी सेवा लेकर आने के एवज में रातोंरात करोड़ों ग्राहक इसलिए मिले कि बाजार में मौजूद अधिकतर दूसरी कंपनियों ने ग्राहकों की सेवा इतनी खराब कर रखी थी कि लोग उनसे दूर जाने के चक्कर में थे। कुछ दूसरे कारोबार अगर देखें तो कुछ ब्रांड अगर अपनी साख और सेवा अच्छी रखते हैं, तो नया दैत्याकार मुकाबला भी उनको कुचल नहीं पाता। 
आज लोगों को घर पर टीवी का मनोरंजन जिंदगी की बाकी जरूरी सहूलियतों की तरह का एक अनिवार्य खर्च हो चुका है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने पिछले कई बरस से लगातार हिन्दुस्तान और दुनिया की दूसरी फिल्म और टीवी कंपनियों से कार्यक्रम खरीदने का सिलसिला चला रखा था। और अब हो सकता है कि इस कंपनी की घोषणा के मुताबिक 11 सौ शहरों में घर-घर तक केबल पहुंचाकर टीवी-इंटरनेट के जरिये रिलायंस इन तमाम कार्यक्रमों की बिक्री भी शुरू करेगा, और उससे भी बाजार के आज के टीवी-इंटरनेट सेवा देने वाले कारोबारियों के सामने एक कड़ा मुकाबला खड़ा होगा। लेकिन मुकेश अंबानी मीडिया के कारोबार में एक सबसे बड़े मालिक बन जाने के बाद अब मनोरंजन, इंटरनेट, और दूरसंचार के कारोबार में सबसे बड़ा कारोबारी बनने की ओर चल पड़े हैं। ऐसे में मीडिया-मोनोपोली का भारत के लोकतंत्र पर कैसा असर होगा, इस पर इस देश में कोई चर्चा भी नहीं हो रही है। लेकिन इस मुद्दे के उस पहलू पर फिर कभी, और फिलहाल सस्ते टीवी सिग्नल की उम्मीद रखें। (Daily Chhattisgarh)

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