आज लोहिया शर्म से डूबकर एक बार फिर मर गए होंगे...

11 अप्रैल 2014
संपादकीय

समाजवाद की खाल ओढ़कर परिवारवाद चलाते हुए मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार पर कहा है कि लड़कों से गलतियां हो जाती हैं, इस पर फांसी की सजा नहीं देनी चाहिए, और सपा की सरकार आएगी तो कानून बदल दिया जाएगा। दूसरी तरफ उनकी पार्टी के महाराष्ट्र के अध्यक्ष अबू आजमी ने बयान दिया है कि बलात्कार करने वाले, और बलात्कार की शिकार लड़की, दोनों को फांसी देनी चाहिए। 
अगर चुनाव आयोग के तहत राजनीतिक दलों का दर्जा पाने के लिए कोई लोकतांत्रिक शर्तें हो सकती हैं, और चुनाव लडऩे के हक का इस्तेमाल करने के साथ कोई प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, तो समाजवादी पार्टी पर इस लोकतंत्र में आज एक कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन लचीला भारतीय लोकतंत्र बकवास को खुली छूट देता है, और इस हद तक देता है कि इस लोकतंत्र को कुचल दिया जाए, कमजोर तबकों के हक छीन लिए जाएं। यह नौबत बहुत ही खराब है, और आज जब इस देश में बलात्कार एक बड़ा मुद्दा है, बहुत ही शर्मनाक और खतरनाक मुद्दा है, तब भारतीय लड़कियों और महिलाओं के साथ होती हुई इस ज्यादती, बेइंसाफी को लेकर इस कदर गंदी जुबान बोलना, और खतरनाक राजनीतिक वायदे करना, इस देश को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। हमारा यह मानना है कि मुलायम सिंह यादव जैसे लोग जैसे फर्जी समाजवाद और जैसी फर्जी धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करते हैं, उसे पूरी तरह खारिज करना चाहिए। धर्मनिरपेक्षता तो धर्म के बाद आया हुआ एक मुद्दा है। लेकिन औरत और मर्द के बनने के साथ ही औरत के साथ जो गैरबराबरी और नाइंसाफी शुरू हुई है, उसे पहले खत्म करना चाहिए। यह नहीं हो सकता कि जो लोग महिलाओं के साथ गैरबराबरी की बात करें, वे धर्मों के साथ बराबरी की बात कर सकेंगे। सोच में इंसाफ, कतरे-कतरे में नहीं आ सकता, उसके लिए सोच या तो पूरी तरह इंसाफपसंद हो सकती है, या फिर वह नाइंसाफ ही रहेगी। 
आज समाजवादी पार्टी के साथ कहीं वामपंथी जुड़े रहते हैं, तो कहीं कांग्रेस पार्टी। आज यह मौका है कि लोगों को, मीडिया को, और जनसंगठनों को मुलायम और उनकी पार्टी से उसी तल्ख जुबान में सवाल करने चाहिए जिस जुबान में भाजपा और मोदी से गुजरात दंगों को लेकर सवाल किए जाते हैं, कांग्रेस से 1984 के दंगों को लेकर सवाल किए जाते हैं, और यूपीए से उसके अभूतपूर्व-ऐतिहासिक भ्रष्टाचार को लेकर सवाल किए जाते हैं। मुलायम सिंह की पार्टी के नेता पहले भी महिलाओं को लेकर, उन पर होने वाले मर्दाना जुर्मों को लेकर गंदी जुबान में बात करते आए हैं, और उनकी पार्टी के नेता और तो कोई हैं नहीं, उन्हीं के घर के ही हैं, उन्हीं के कुनबे के ही हैं। इसलिए इस पार्टी के नाम पर एक कुनबे की जो हिंसक और घटिया सोच है, उसके बारे में इस पार्टी के साथी दलों को सोचना चाहिए। 
आज हो सकता है कि देश और महाराष्ट्र प्रदेश, इन दोनों में कांग्रेस पार्टी के बनाए हुए महिला आयोग इन बातों का नोटिस न लें, क्योंकि ये आयोग उन्हें बनाने वाले सत्तारूढ़ दल के ही एक प्रकोष्ठ की तरह काम करते हैं। लेकिन अदालत को ऐसे लोगों को नोटिस देना चाहिए, और ऐसी पार्टियों के चुनाव लडऩे पर रोक लगनी चाहिए, ऐसे लोगों के चुनाव लडऩे पर कड़ाई से कानूनी रोक लगनी चाहिए। इस देश की संसद और प्रदेशों की विधानसभाओं को ऐसी गंदगी की जरूरत नहीं है। 
आज ऊपर बैठे हुए राम मनोहर लोहिया शर्म से डूबकर एक बार फिर मर गए होंगे। 

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