12 अप्रैल 2014
संपादकीय
नरेन्द्र मोदी की बीवी की फिक्र में आज कांग्रेस पार्टी इस कदर डूबी हुई है, कि अपने खुद के डूबने का खतरा उसे इसके मुकाबले कम अहमियत का लग रहा है। किसी बेनीप्रसाद वर्मा ने नहीं, खुद राहुल गांधी ने कल एक चुनावी सभा में मोदी की बीवी को लेकर यह फिक्र जाहिर की, कि वे चुनाव घोषणापत्र में पत्नी का जिक्र क्यों नहीं करते थे, और अब उन्होंने जिक्र क्यों किया है? दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जैसे सोनिया गांधी के निजी सिपहसालार लगातार मोदी की बीवी के मामले को कुरेदते रहते थे, और पिछले बरसों में उनके मुंह से किसी महिला के लिए सबसे अधिक फिक्र सुनाई पड़ी, तो वह मोदी की बीवी जशोदा बेन ही थीं।
इस चर्चा में कोई हर्ज इसलिए नहीं है कि जो सार्वजनिक जीवन में आते हैं, उनको चुनाव आयोग के नियमों से परे, जनता के मन में उठते सवालों के कॉलम में भी जवाब भरने पड़ते हैं, और नरेन्द्र मोदी ने पिछले चुनावों में जीवन-साथी का कॉलम खाली छोड़ा था, इस बार उन्होंने उसे भरा है, और पिछले चुनाव से इस चुनाव के बीच जशोदा बेन ने कुछ इंटरव्यू देकर यह धुंध साफ भी की थी कि नरेन्द्र मोदी से उनके शादी के कैसे संबंध थे, और उसके बाद से वे किस तरह अलग रहती हैं, मोदी से उनका कोई नाता नहीं बचा है, वे एक स्कूल में पढ़ाती हैं, और मोदी के प्रधानमंत्री बनने की कामना में उन्होंने बहुत सी मनौतियां मानी हुई हैं। वे एक मध्यम वर्ग की जिंदगी जी रही हैं, और पति के जीवन से अलग रहते हुए भी वे लगातार पति की शुभकामना करती हैं।
नरेन्द्र मोदी और उनकी बीवी के मामले को आंकते हुए इन तमाम बातों पर गौर करना जरूरी है। चूंकि कांग्रेस के सबसे बड़े उम्मीदवार राहुल गांधी ने खुद होकर मोदी के इस निजी जीवन पर सार्वजनिक सवाल आमसभा में उठाए हैं, इसलिए मोदी की निजी जिंदगी का यह पहलू अब न सिर्फ सार्वजनिक जवाबदेही का हो गया है, बल्कि ऐसी ही जवाबदेही अब सार्वजनिक राजनीति के बाकी लोगों की भी बन गई है, खासकर उन लोगों की, जो लोग इन सवालों को उठा रहे हैं। कांग्रेस जब मोदी की बीवी की फिक्र कर रही है, और बार-बार यह कह रही है कि जो अपनी बीवी का ख्याल नहीं रख सका, वह देश की बाकी महिलाओं का, और बाकी देश का ख्याल कैसे रखेगा। इसके साथ-साथ कांग्रेस एक और बात को जोड़ रही है कि नरेन्द्र मोदी के राज में गुजरात में एक महिला का जिस तरह से टेलीफोन-टैपिंग और खुफिया पुलिस का इस्तेमाल करके पीछा किया गया, उससे यह सवाल उठता है कि मोदी अपनी बीवी को तो बरसों से अलग रख रहे हैं, या उससे अलग रह रहे हैं, और एक दूसरी महिला के पीछे पड़े हैं। मोदी की निजी जिंदगी और उसमें बीवी या दूसरी महिला का कोई इतना ही जिक्र बाजार में है। इसलिए हम इससे परे जाकर और किसी अटकलबाजी को जायज नहीं समझते।
नरेन्द्र मोदी पर लगी इस सिलसिले की सबसे बुरी तोहमत यही है कि उन्होंने अपनी गृहमंत्री का इस्तेमाल करके एक महिला की निजी जिंदगी के पल-पल पर निगरानी रखवाई। अब इस मामले में कानूनी हालत यह है कि पहली नजर में यह काम गैरकानूनी दिखता है, लेकिन महीनों की मशक्कत के बावजूद केन्द्र की यूपीए सरकार देश में एक भी रिटायर्ड जज को इस बात के लिए तैयार नहीं कर पाई कि वह मोदी के खिलाफ इस जासूसी कांड की जांच के लिए बने आयोग का जिम्मा सम्हाले। केन्द्र सरकार ऐसे आयोग कम ही बनाती है, लेकिन ऐसा आयोग बना, केन्द्रीय मंत्रिमंडल के फैसले से बना, और उसकी जांच को कोई नहीं मिला। इसलिए जो कुछ खबरों में पहले आ चुका है, उसमें एक ही बात और जुड़ी है कि इस खुफिया निगरानी की शिकार महिला, और उसके पिता, दोनों ने इसे लेकर मोदी के खिलाफ कोई आरोप लगाने से इंकार कर दिया है, और उन्हें एक क्लीन चिट दी है। दूसरी तरफ मोदी की बीवी जशोदा बेन का मामला है जिन्होंने मोदी से कोई भी शिकायत न रखते हुए बार-बार उनके लिए मनौती, व्रत, और तीर्थयात्रा करने की बात कही है, और अगर कोई बीवी अपने आदमी के लिए प्रधानमंत्री बनने तक नंगे पैर रहने की बात करती है, उस पर अमल करती है, तो हमारे पास यह सोचने की कोई वजह नहीं है कि उस बीवी को मोदी से कोई शिकायत है, या प्रधानमंत्री बनने के बाद कोई उम्मीद है।
अब सवाल पूछने वाली, तोहमत लगाने वाली कांग्रेस पार्टी अपने आपको इन सवालों के साथ, अपनी खुद की जिंदगी को लेकर जवाबों की जवाबदेही ढो लेती हैं। और अगर कांग्रेस के नेताओं के चाल-चलन की बात की जाए, तो मोदी की निजी जिंदगी के चाल-चलन के मुकाबले कांग्रेस नेताओं के कुकर्म भयानक है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी की बीवी उनकी मंगलकामना करते हुए नंगे पैर जी रही हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता ऐसे भी हैं जिनकी औलाद अदालतों में डीएनए जांच से खून का रिश्ता साबित करती है, और ऐसे नेताओं के सेक्स वीडियो इंटरनेट पर लोगों को हक्का-बक्का कर देते हैं, दवा कंपनियां बुढ़ापे में ताकत बढ़ाने के लिए अपनी दवाओं की मॉडलिंग उनसे करवाने की सोचने लगती हैं। आज कांग्रेस के जो फूहड़ और बेसमझ नेता मोदी की घरेलू जिंदगी के इस बहुत मामूली पहलू को एक चुनावी मुद्दा बना रहे हैं, उनकी हरकत का जवाब देने के लिए हम कांग्रेस के गुजर चुके बड़े नेताओं की मिसालों का इस्तेमाल करना नहीं चाहते, क्योंकि उन लोगों ने शायद अपनी निजी जिंदगी भी दिल खोलकर जी थी, और दूसरों की निजी जिंदगी को चुनावी माइक्रोफोन से इस तरह उछाला भी नहीं था। इसलिए कांग्रेस के आज के कमसमझ नेताओं की बातों का इस्तेमाल हम उन्हीं के गुजर चुके बड़े और भले नेताओं के खिलाफ नहीं होने देना चाहते।
नरेन्द्र मोदी महिला की जासूसी में जांच और अदालत के लिए खुले हुए हैं। लेकिन उनके और उनकी बीवी के बीच कैसे रिश्ते हैं, इसे लेकर इन दोनों के अलावा किसी तीसरे को तब तक बकवास का हक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि इन दोनों में से कोई एक, या दोनों ही, कानून या समाज के सामने कोई शिकायत लेकर न जाएं। राजनीति को इतना घटिया बनाना नाजायज है कि जिससे बिना शिकायत की निजी जिंदगी को कुरेदने वाले बेवकूफ मोदी के सार्वजनिक जिंदगी के लहूलुहान ताजा इतिहास की तरफ से भी लोगों का ध्यान बंटाए। हमारा ख्याल है कि मोदी की जाती जिंदगी को लेकर ऐसे हमले से कांग्रेस न सिर्फ मोदी की सबसे बड़ी गलतियों, और गलत कामों को रियायत दे रही है, बल्कि हिन्दुस्तान के ताजा इतिहास कीकई तरह की प्रेम और सेक्स कहानियों को एक बार फिर खबरों में ला रही है। राजनीति में अगर कोई जनता को इतना बेवकूफ बना रहा है कि बीवी से अलग रहने वाला, देश का ख्याल कैसे रख सकेगा, तो जनता इतनी बेवकूफ नहीं है, और शायद चुनावी नतीजे जनता को समझदार साबित भी करेंगे।
नरेन्द्र मोदी जैसे घिरे हुए नेता को चुनाव घोषणापत्र में लिखे गए एक नाम को लेकर अगर अब तक चले आ रहे बदनाम से दूर खिसक जाने का मौका कांग्रेस दे रही है, तो फिर कांग्रेस आत्ममंथन के लिए लंबे बनवास की हकदार रखती है।

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