पोलियो मुक्त हिन्दुस्तान, बड़ी कामयाबी का मौका

13 जनवरी 2014
संपादकीय
रोजाना बुरी बातों पर लिखते हुए और बुराई के खिलाफ लिखते हुए हमको कई बार इस वक्त इस जगह पर थकान होने लगती है। आज का दिन थोड़ा सा अलग है कि हिन्दुस्तान की एक बहुत बड़ी उपलब्धि को लेकर लिखने का मौका मिला है। पिछले कुछ महीनों में कम से कम दो ऐसे मौके आए जब हिन्दुस्तान ने अंतरिक्ष अभियानों में बड़ा मुकाम तय किया, बड़ी कामयाबी पाई, और आज एक दूसरी मुनादी विश्व स्वास्थ्य संगठन करने जा रहा है कि भारत पोलियो मुक्त हो गया। पिछले तीन बरसों में इस देश में पोलियो का एक भी नया केस सामने नहीं आया, और इस वजह से भारत को यह दर्जा मिल रहा है। 
यह बात इसलिए भी बहुत अधिक मायने रखती है कि हिन्दुस्तान में सरकार इस पूरे अभियान के पीछे थी, और केन्द्र और राज्य सरकारों की साख अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं में भारी भ्रष्टाचार है, सरकारी कामकाज में बड़ा निकम्मापन है, लापरवाही है, नसबंदी शिविरों में इसी देश में महिलाएं फर्श पर धूल की तरह पड़ी रहती हैं, ऐसे हालात के बावजूद अगर पोलियो इस देश में खत्म हो पाया है, तो यह एक बड़ी खुशी, राहत, और कामयाबी के फख्र का मौका है। इस देश में इस कामयाबी का एक दूसरा महत्व इसलिए भी है कि अभी तीन बरस पहले तक दुनिया के आधे पोलियोग्रस्त लोग हिन्दुस्तान में ही थे। पड़ोस के पाकिस्तान में अमरीका में बने पोलियो ड्रॉप्स को लेकर जनता के मन में जो शक है, उसे लेकर वहां लोग इस टीके से अपने बच्चों को दूर भी रख रहे हैं, और तालिबानी आतंकी पोलियो-कार्यकर्ताओं को मार भी रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान और भारत के बीच की हर तरह की आवाजाही के चलते हुए भारत को अलग-थलग रख पाना भी भारत के लिए मुुश्किल काम था। और भारत के भीतर भी कुछ बरस पहले मुश्किल बिरादरी में अमरीका के खिलाफ एक ऐसा शक फैला था, और लोग पोलियो ड्रॉप्स से परे रहने लगे थे क्योंकि अफवाह की अमरीकी दवा लेने वालों की आगे की पीढिय़ां पैदा नहीं हो पाएंगी। ऐसी सामाजिक अफवाह से उबर पाना भी एक कामयाबी है। फिर दूसरी तरफ बांग्लादेश से दसियों लाख गरीब लोगों का भारत में आना-जाना लगा ही रहता है, भारत में शायद करोड़ से अधिक बांग्लादेशी बसे हुए हैं, इनमें से अधिकतर बहुत गरीब हैं, पढ़े-लिखे नहीं हैं। भारत के भीतर भी गरीब और अनपढ़ लोगों की आबादी बहुत है, जंगलों में बसे हुए लोग हैं। ऐसे देश में एक-एक बच्चे को कई-कई बार पोलियो ड्रॉप्स देना कोई मामूली कामयाबी नहीं है। 
लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि यह बड़ी कामयाबी सिर्फ सरकार के अकेले दम पर नहीं हुई है। रोटरी जैसी एक बड़ी संस्था ने पूरे देश में पोलियो ड्रॉप्स के अभियान में बड़ी हिस्सेदारी की थी, और देश भर में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने, गांव-गांव तक फैले सरकारी कर्मचारियों ने, और दूसरी कई संस्थाओं के लोगों ने इस राष्ट्रीय अभियान में हिस्सा लिया था। मुश्किल सरकारी ढांचे के भीतर भी देश के हर बच्चे तक पहुंचना आसान नहीं था, और हर बच्चे तक पहुंचे बिना यह कामयाबी पाना मुमकिन भी नहीं था। भारत अपने पड़ोसी देशों के बीच एक सबसे बड़ा देश होने की वजह से बाकी देशों के लिए एक मिसाल भी बनता है, और यह एक अच्छी मिसाल है। भारत को पड़ोसियों को भी इस मिसाल के साथ-साथ हर किस्म की मदद करनी चाहिए, क्योंकि पोलियो को सिर्फ नक्शे पर सरहद से परे रखना मुमकिन नहीं है। जब तक पड़ोसी देशों की सरहदों के भी बाहर पोलियो को नहीं निकाल दिया जाएगा, तब तक भारत अकेले चैन से नहीं रह पाएगा। एक बड़े देश होने के नाते भारत पड़ोस से यहां कानूनी और गैरकानूनी तरीके से आने वाले लोगों को भी बहुत कड़ाई से नहीं रोक पाता, और ऐसे में पड़ोस की सेहत के बिना हिन्दुस्तान की सेहत अच्छी नहीं रह सकती। 
पोलियो मुक्त हिन्दुस्तान एक बड़ी कामयाबी है, और इस अभियान से जुड़े हर किसी को हमारी बहुत बधाई। 

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