अय्यर का घटिया-हिंसक बयान चाय बेचना न जुर्म है, न शर्म

17 जनवरी 2014
संपादकीय
कांग्रेस पार्टी के साथ पता नहीं ऐसा क्यों होता है कि जब उसके कुछ नेता समझदारी का काम करते रहते हैं, कुछ दूसरे नेता अपने बड़बोलेपन में, और बेदिमाग तरीके से ऐसी फूहड़ बातें करते हैं, कि बैठे-ठाले पार्टी की फजीहत होती है। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान उसके एक बड़े नेता मणिशंकर अय्यर ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी के बारे में कहा कि वे 21वीं सदी में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, और वे चाहें तो कांग्रेस के इस अधिवेशन में आकर चाय बांट सकते हैं। मणिशंकर अय्यर इस बात पर हमला कर रहे थे कि नरेन्द्र मोदी ने अपना जीवन चाय बेचते हुए भी आगे बढ़ाया है। 
यह बात न सिर्फ नरेन्द्र मोदी के खिलाफ, न सिर्फ भाजपा और एनडीए के खिलाफ, बल्कि यह बात हिन्दुस्तान के मेहनतकश गरीबों के भी खिलाफ है। जो पार्टी चाय बेचने को बेइज्जती समझती है, उसके लिए सिर्फ भाजपा के मन में यह बात नहीं आएगी कि चाय बेचना देश बेचने से बेहतर है, बल्कि देश के हर मेहनतकश इंसान यह सोचेंगे कि ईमानदारी और मेहनत के किसी काम को गाली की तरह इस्तेमाल करने वाले कांग्रेस के ये नेता क्या उसी गांधी की पार्टी के हैं, जो कि अपना पखाना खुद साफ करते थे, अपने कपड़ों के लिए धागा खुद कातते थे, अपनी चप्पलें खुद बनाते थे? जाहिर है कि यह पार्टी अपने घमंड में चूर-चूर हो चुकी है, और उसके भीतर ऐसी फूहड़ बातों के खिलाफ कोई सोच भी नहीं रह गई है। हर कुछ हफ्तों में कांग्रेस के नेता आत्मघाती बातें करते हैं, और कांग्रेस पार्टी अधिक से अधिक उनमें से कुछ बयानों से अपने आपको अलग करती है, और फूहड़ बयानों का सिलसिला आगे बढ़ते रहता है। 
आज जब कांग्रेस पार्टी के इस बड़े कार्यक्रम के मौके पर हमको इस पार्टी के फैसलों और घोषणाओं को लेकर यहां लिखना था, तो हमको उसके एक नेता की कही एक गंदी और हिंसक बात पर लिखना पड़ रहा है, क्योंकि यह हमला देश के मेहनतकश और ईमानदार लोगों पर है। भाजपा या मोदी हमारी फिक्र का सामान नहीं है, लेकिन अगर गांधी-नेहरू की पार्टी, देश की सबसे बड़ी पार्टियों में से एक, देश की सबसे पुरानी पार्टी, अगर पसीना बहाकर ईमानदार जिंदगी जीने वाले लोगों के खिलाफ ऐसी सोच जाहिर करती है, या कम से कम बर्दाश्त करती है, ऐसी हिंसक बातों को जगह देती है, तो यह देश के लिए बहुत ही फिक्र की बात है। और यह बात एक ऐसे वक्त पर आई है जब कांग्रेस पार्टी और उसकी अगुवाई वाली यूपीए की सरकार पिछले दस बरसों के अपने कामकाज को लेकर अनगिनत अदालतों के कटघरों में खड़ी है, देश में जगह-जगह खारिज की जा रही है, भ्रष्टाचार और घोटाले के आसमान छूते आदर्श खड़े कर रही है। ऐसे में अगर इसके पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी होने का दावा करने वाले, लेखक के रूप में संसद में मनोनीत किए जाने वाले मणिशंकर अय्यर चाय बेचने को एक जुर्म समझते हैं, घटिया काम समझते हैं, और इस बयान के घंटों बाद तक कोई निंदा कांग्रेस की तरफ से नहीं आई है, तो हम इसे लोकतंत्र में एक बहुत लापरवाह, खतरनाक, और अपमानजनक सोच मानते हैं। और इस पार्टी को अपने ऐसे रूख के लिए दाम भी चुकाना होगा। हमको पक्का भरोसा है कि नेहरू और गांधी ऊपर बैठे हुए कांग्रेस के ऐसे बयान, ऐसे रूख, और उस पर पार्टी की चुप्पी को देखकर हक्का-बक्का होंगे। 

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