13 जून 2014
संपादकीय
एशिया के सबसे बड़े फौलाद कारखाने भिलाई इस्पात संयंत्र में कल शाम हुए एक औद्योगिक हादसे में आधा दर्जन से अधिक लोग अब तक गुजर चुके हैं, और दर्जनों लोग अस्पताल में हैं। एक गैस के रिस जाने से यह हादसा हुआ है, और जांच से पता लगेगा कि यह पूरी तरह एक तकनीकी दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई इंसानी लापरवाही जिम्मेदार थी। इस बारे में हम अभी अपना कोई निष्कर्ष निकालना नहीं चाहते, क्योंकि न तो वह मुमकिन है, और न ही हमारे पास ऐसी तकनीकी काबिलीयत है। लेकिन कल शाम से जो खबरें अब तक आ रही हैं वे बताती हैं कि भिलाई इस्पात संयंत्र का मैनेजमेंट ऐसे किसी हादसे की नौबत पर बचाव के लिए ठीक से तैयार नहीं था। उसके पास ऐसे मौके के लिए गैस-मास्क नहीं थे, जरूरत के लायक एंबुलेंस नहीं थीं, और भी कुछ कमियां जांच में सामने आ सकती हैं। हम इसी पहलू पर आगे लिखना चाहते हैं।
दरअसल पूरा छत्तीसगढ़ भिलाई इस्पात संयंत्र की तरफ एक आदर्श की तरह देखता है। नेहरू के वक्त के इस औद्योगिक तीर्थ से छत्तीसगढ़ की शक्ल जितनी बनी और बदली है, उतनी किसी भी दूसरे किसी एक संस्थान से नहीं। इसलिए इस ऐतिहासिक और बेमिसाल योगदान की वजह से यह राज्य और इसके लोग हर मौके-बेमौके बीएसपी की तरफ देखते हैं। छत्तीसगढ़ के लोगों को अच्छी तरह याद होगा कि पिछली करीब आधी सदी में जब-जब लोगों को किसी गंभीर इलाज की जरूरत पड़ी, तो बीएसपी का अस्पताल ही इस विशाल छत्तीसगढ़ के पास था, और राज्य बनने के बाद ही इस अस्पताल से परे सरकारी और निजी अस्पताल विकसित हो पाए। इसलिए बीएसपी की सामाजिक जिम्मेदारी कम नहीं रही। दूसरी तरफ हम कल के औद्योगिक हादसे को अनुपात से बढ़ाकर भी देखना नहीं चाहते। जिस कारखाने में दसियों हजार लोग काम करते हैं, और हर बरस लाखों टन फौलाद जहां बनता है, वहां पर औद्योगिक दुर्घटना कभी भी न हो, ऐसा सिर्फ एक काल्पनिक आदर्श में हो सकता है। इसलिए इस हादसे की वजह से बीएसपी को एक पूरी तरह लापरवाह मान लेना भी ठीक नहीं है। औद्योगिक सुरक्षा जब लागू होती है, तो वह खबर नहीं बनती। और जब वह नाकामयाब होती है, तभी वह खबर बनती है। इसलिए बीएसपी के औद्योगिक आकार को देखते हुए ही वहां की दुर्घटना के आकार को तौलना चाहिए।
लेकिन यह लिखते हुए भी हम बीएसपी को यह याद दिलाना चाहते हैं कि हर इंसानी जिंदगी पर से खतरा टालने के लिए जो-जो किया जाना चाहिए था, उसमें जो कमी रही हो, उससे तुरंत सीख लेने की जरूरत है। दूसरी तरफ न सिर्फ छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए बीएसपी को औद्योगिक सुरक्षा और बचाव की एक मिसाल पेश करनी चाहिए। इसलिए कल के हादसे के बाद जो-जो कमियां और खामियां सामने आई हों, उन पर तुरंत ही कार्रवाई करने की जरूरत है। लेकिन इस मौके पर केंद्र और राज्य सरकारों के औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े हुए विभागों के सामने यह एक चुनौती भी सामने आई है कि बाकी छत्तीसगढ़, और बाकी देश में औद्योगिक सुरक्षा को ठोक-बजा लिया जाए। ऐसे ही मौकों पर बाकी जगहों के इंतजाम परख लेने चाहिए, और किसी हादसे के बाद ऐसी नसीहत खुद होकर लेनी चाहिए। भिलाई छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है, और इस मौके पर हम किसी भी तरह की राजनीतिक-राजनीति या मजदूर-राजनीति के बजाय सबक और सुधार पर जोर देंगे।

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