घटिया बीज से होता नुकसान सिर्फ बीज की लागत का नहीं

28 जून 2014
संपादकीय
हिन्दुस्तान में मानसून कमजोर दिख रहा है इसलिए पूरे देश में जगह-जगह फिक्र खड़ी हो रही है। अभी जब हम यह लिख रहे हैं, तब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जिलों के साथ खेती-किसानी पर बात कर रहे हैं कि कैसे इस हालत से निपटा जा सकता है। बारिश तो हाथ में नहीं है, लेकिन बीज, खाद और खेती की दवा सही समय पर और सही किस्म की लोगों को मिल जाए इतना तो जरूरी है। और इस वीडियो कांफ्रेंस के दौरान ही यह बात सामने आई कि कई बीज कंपनियों ने घटिया बीज सप्लाई किए और उसकी वजह से फसल तबाह हुई। इन कंपनियों को काली सूची में डालने का आदेश दिया गया, लेकिन पिछले बरसों में इस भ्रष्टाचार के चलते जो फसल तबाह हुई है, उसकी कोई भरपाई मुमकिन नहीं है। पिछले पांच बरसों में जगह-जगह यह बात सामने आई थी कि कृषि विभाग ने, और बीज निगम ने जो बीज दिए थे, वे घटिया थे। इसके अलावा इस विभाग में भ्रष्टाचार की बहुत सी खबरें सामने आई थीं। दूसरे विभागों से अलग कृषि विभाग में बीज, खाद, और दवा के घटिया होने का नुकसान महीनों बाद जाकर गरीब किसान को पता लगता है। इसलिए यह धोखाधड़ी सिर्फ बीज की लागत के नुकसान की नहीं रहती, यह धोखाधड़ी उससे कई गुना अधिक, किसान की जिंदगी के पूरे एक बरस की रहती है। 
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने कुछ विभागों के कामकाज पर कसावट से वहां सुधार लाया है। ऐसे में दूसरे विभागों में सुधार क्यों नहीं हो सकता, यह हैरानी की बात है। फिर बहुत से विभागों से जुड़े हुए ऐसे निगम और मंडल हैं, जहां पर सरकार नेताओं को मनोनीत करती है, और फिर मानो उन नेताओं के खर्च निकालने के लिए, या फिर उनके चुनाव के लिए, इन निगम मंडलों में भारी गड़बड़ी चलती है। ऐसा अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से लगातार देखने में आया है, और जो निगम मंडल अपनी स्वायत्तता से बेहतर काम कर सकते हैं, वे भ्रष्टाचार से घिरे, राजनीतिक पुनर्वास केन्द्र, या शिविर बनकर रह जाते हैं। खेती-किसानी से जुड़े हुए निगम मंडलों का हाल ऐसा ही रहा, और वे राजनीतिक खर्च का सामान बनता रह गया। 
छत्तीसगढ़ में एक तरफ तो धान की खरीदी, और रियायती अनाज को पहुंचाने के मामले में राज्य सरकार की कामयाबी को देखकर पड़ोस के ओडिशा से सरकारी लोगों के यहां आने की खबर आज ही आई है। लेकिन बाकी कई मामलों में छत्तीसगढ़ को अपनी ही कुछ कामयाब मिसालों से सीखने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने जनता की शिकायतों के तेजी से असरदार निपटारे में कड़ाई बरतना शुरू किया है, लेकिन इसका असर कितना होता है यह आने वाले दिन बताएंगे, और उसकी एक मिसाल खेतों में बीज की कामयाबी भी हो सकती है, जिसके बिना किसान कर्ज से लद सकते हैं। 

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