संपादकीय
23 जून 14
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में मंत्री के स्तर पर, और शायद मुख्यमंत्री और उनके परिवार के स्तर पर भी जो धांधली हुई है, उससे भाजपा के साफ-सुथरे कामकाज का नारा गंदा हुआ है। मंत्री तो हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही विशेष जांच के दौरान गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं, और सैकड़ों दूसरे लोग गिरफ्तारी के अलग-अलग दौर में हैं। कांग्रेस के आरोप हैं कि मुख्यमंत्री का घर-दफ्तर, उनका निजी स्टॉफ और परिवार सैकड़ों नियुक्तियों की धांधली के पीछे है। हम अभी जांच के बीच अपना कोई नतीजा निकालना नहीं चाहते, लेकिन यह बात जगजाहिर है कि सरकारी नियुक्तियों में एक-एक के लिए दसियों लाख का लेन-देन होता है, और विपक्ष का यह आरोप बहुत ही सनसनीखेज भी है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ससुराल के शहर गोंदिया के कोई डेढ़ दर्जन लोग आरटीओ में नियुक्त किए गए हैं।
अधिक मांग वाले कॉलेजों के दाखिले में मध्यप्रदेश में भारी धांधली पहले ही सामने आ चुकी है और मेडिकल कॉलेज की भर्ती पुलिस की जांच और अदालत तक है, और उसमें भी बड़ी संख्या में लोग जेल पहुंच चुके हैं। करोड़ों-अरबों के ऐसे दाखिले-नियुक्ति के घोटाले से जनता का भरोसा लोकतंत्र पर से पूरी तरह खत्म हो जाता है। एक तो यह कि जो काबिल लोग हैं, वे न पढ़ाई का मौका पाते, और न नौकरी। जो रिश्वत देने के लायक हैं, या जिनकी राजनीतिक पहुंच है, वैसे ही लोग अगर सरकारी कुर्सियों पर काबिज होते हैं, वैसे ही लोग अगर मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, तो देश और प्रदेश का भविष्य साफ दिखता है। ऐसे लोग अपने पूंजीनिवेश की वसूली के लिए आगे जाकर कैसा काम करेंगे यह जाहिर है। दूसरी तरफ गरीब और बेबस छात्र-छात्राएं, या बेरोजगार जब कॉलेज में सीट या सरकारी नौकरी की कुर्सी नहीं पाते, और वे जब इन जगहों को बिकते और नीलाम होते देखते हैं, तो उन्हें सरकार से उसी तरह की नफरत होती है, जैसी नफरत के चलते पूरे देश में लोगों ने यूपीए और कांग्रेस का सफाया कर दिया। मध्यप्रदेश में जिस तरह भाजपा का एक मंत्री इस सिलसिले में गिरफ्तार हुआ है, और बड़े-बड़े भाजपा-संबंधी जांच और शक के घेरे में हैं, उसका भुगतान मध्यप्रदेश में भाजपा को आज नहीं तो कल करना पड़ेगा।
न सिर्फ मध्यप्रदेश और न सिर्फ भाजपा की सरकार वाला राज्य, जहां कहीं भी सीटों और कुर्सियों की ऐसी बिक्री और नीलामी होगी, वहां-वहां सरकारें जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के अच्छे दिन आने का नारा लगा-लगाकर सत्ता पर आए हैं, और भाजपा पूरी जिंदगी से शुचिता और सुशासन का नारा लगाते आई है। अब मध्यप्रदेश में भ्रष्ट लोगों के अगर अच्छे दिन आए हैं, और सरकार का ऐसा हाल दिखाई पड़ रहा है, तो यह आने वाले बरसों के लिए भाजपा के लिए खतरे की घंटी से कम कुछ नहीं है। और बाकी प्रदेशों में भी चाहे जिस पार्टी की सरकार हो, अगर गरीबों के हक के साथ, काबिल लोगों के हक के साथ ऐसी बेइंसाफी होगी, तो वह आगे-पीछे पकड़ में भी आएगी, और ऐसा करने वाली सरकार सत्ता से भी जाएगी। यह सिलसिला खत्म होना चाहिए, और इसके पीछे जिम्मेदार जो लोग भी हैं, जिस प्रदेश में भी हैं, जिस सरकार और पार्टी में हैं, उन सबको जेल जाना चाहिए। हम अभी कांग्रेस के आरोप या भाजपा की सफाई पर नहीं जा रहे, लेकिन हम यह मानते हैं कि मध्यप्रदेश का हाईकोर्ट जब अपनी निगरानी पुलिस के एक विशेष जांच दल से जांच करवा रहा है, तो वहां पर गरीबों के लूटे हुए हक के लुटेरों को सजा जरूर मिलेगी, और बाकी प्रदेशों के लोगों को उससे एक नसीहत मिलेगी।
23 जून 14
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में मंत्री के स्तर पर, और शायद मुख्यमंत्री और उनके परिवार के स्तर पर भी जो धांधली हुई है, उससे भाजपा के साफ-सुथरे कामकाज का नारा गंदा हुआ है। मंत्री तो हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही विशेष जांच के दौरान गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं, और सैकड़ों दूसरे लोग गिरफ्तारी के अलग-अलग दौर में हैं। कांग्रेस के आरोप हैं कि मुख्यमंत्री का घर-दफ्तर, उनका निजी स्टॉफ और परिवार सैकड़ों नियुक्तियों की धांधली के पीछे है। हम अभी जांच के बीच अपना कोई नतीजा निकालना नहीं चाहते, लेकिन यह बात जगजाहिर है कि सरकारी नियुक्तियों में एक-एक के लिए दसियों लाख का लेन-देन होता है, और विपक्ष का यह आरोप बहुत ही सनसनीखेज भी है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ससुराल के शहर गोंदिया के कोई डेढ़ दर्जन लोग आरटीओ में नियुक्त किए गए हैं।
अधिक मांग वाले कॉलेजों के दाखिले में मध्यप्रदेश में भारी धांधली पहले ही सामने आ चुकी है और मेडिकल कॉलेज की भर्ती पुलिस की जांच और अदालत तक है, और उसमें भी बड़ी संख्या में लोग जेल पहुंच चुके हैं। करोड़ों-अरबों के ऐसे दाखिले-नियुक्ति के घोटाले से जनता का भरोसा लोकतंत्र पर से पूरी तरह खत्म हो जाता है। एक तो यह कि जो काबिल लोग हैं, वे न पढ़ाई का मौका पाते, और न नौकरी। जो रिश्वत देने के लायक हैं, या जिनकी राजनीतिक पहुंच है, वैसे ही लोग अगर सरकारी कुर्सियों पर काबिज होते हैं, वैसे ही लोग अगर मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, तो देश और प्रदेश का भविष्य साफ दिखता है। ऐसे लोग अपने पूंजीनिवेश की वसूली के लिए आगे जाकर कैसा काम करेंगे यह जाहिर है। दूसरी तरफ गरीब और बेबस छात्र-छात्राएं, या बेरोजगार जब कॉलेज में सीट या सरकारी नौकरी की कुर्सी नहीं पाते, और वे जब इन जगहों को बिकते और नीलाम होते देखते हैं, तो उन्हें सरकार से उसी तरह की नफरत होती है, जैसी नफरत के चलते पूरे देश में लोगों ने यूपीए और कांग्रेस का सफाया कर दिया। मध्यप्रदेश में जिस तरह भाजपा का एक मंत्री इस सिलसिले में गिरफ्तार हुआ है, और बड़े-बड़े भाजपा-संबंधी जांच और शक के घेरे में हैं, उसका भुगतान मध्यप्रदेश में भाजपा को आज नहीं तो कल करना पड़ेगा।
न सिर्फ मध्यप्रदेश और न सिर्फ भाजपा की सरकार वाला राज्य, जहां कहीं भी सीटों और कुर्सियों की ऐसी बिक्री और नीलामी होगी, वहां-वहां सरकारें जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के अच्छे दिन आने का नारा लगा-लगाकर सत्ता पर आए हैं, और भाजपा पूरी जिंदगी से शुचिता और सुशासन का नारा लगाते आई है। अब मध्यप्रदेश में भ्रष्ट लोगों के अगर अच्छे दिन आए हैं, और सरकार का ऐसा हाल दिखाई पड़ रहा है, तो यह आने वाले बरसों के लिए भाजपा के लिए खतरे की घंटी से कम कुछ नहीं है। और बाकी प्रदेशों में भी चाहे जिस पार्टी की सरकार हो, अगर गरीबों के हक के साथ, काबिल लोगों के हक के साथ ऐसी बेइंसाफी होगी, तो वह आगे-पीछे पकड़ में भी आएगी, और ऐसा करने वाली सरकार सत्ता से भी जाएगी। यह सिलसिला खत्म होना चाहिए, और इसके पीछे जिम्मेदार जो लोग भी हैं, जिस प्रदेश में भी हैं, जिस सरकार और पार्टी में हैं, उन सबको जेल जाना चाहिए। हम अभी कांग्रेस के आरोप या भाजपा की सफाई पर नहीं जा रहे, लेकिन हम यह मानते हैं कि मध्यप्रदेश का हाईकोर्ट जब अपनी निगरानी पुलिस के एक विशेष जांच दल से जांच करवा रहा है, तो वहां पर गरीबों के लूटे हुए हक के लुटेरों को सजा जरूर मिलेगी, और बाकी प्रदेशों के लोगों को उससे एक नसीहत मिलेगी।

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