बच्ची से बलात्कार के बाद सरकारी व्यवस्था द्वारा रेप

5 जून 2014
संपादकीय

एक तरफ उत्तरप्रदेश बलात्कार की खबरों से खौल रहा है, और पूरी दुनिया में समाजवादी होने का दावा करने वाले बाप-बेटे का राज हैवानियत सा दिख रहा है, उसी वक्त छत्तीसगढ़ में तीन बरस की एक बच्ची बलात्कार के बाद अलग-अलग कस्बों और शहरों के सरकारी अस्पतालों में धक्के खा रही थी, और एक के बाद दूसरा अस्पताल उसे दूसरी तरफ धकेल रहा था। ऐसी कौन सी कानूनी औपचारिकता हो सकती है, जिसकी इज्जत करने के लिए तीन बरस की इस घायल बच्ची को सुबह से रात तक इलाज न मिल सके? और यह मामला छत्तीसगढ़ के उस बालोद जिले का है जहां से राज्य की महिला और बाल विकास मंत्री रमशीला साहू विधायक है, जहां से भाजपा की महिला मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज पांडेय अभी कल तक सांसद थी। और इस बच्ची का बिना इलाज धक्के खाना राजधानी के मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक जारी रहा, जहां पर उससे सरकारी कागजात की मांग पहले की गई, इलाज की फिक्र बाद में। 
यह सरकारी हैवानियत छत्तीसगढ़ में नई नहीं है। खुद मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र राजनांदगांव से कुछ महीने पहले ऐसा ही एक मामला रायपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक पहुंचा था, और बलात्कार की तीन बरस उम्र की शिकार के साथ सरकारी कागजात न होने से उसकी जांच और इलाज से डॉक्टरों ने इंकार किया था, और बाद में सीधे मुख्यमंत्री के दखल के बाद उसका इलाज हो पाया था, और शायद किसी डॉक्टर को निलंबित भी किया गया था। 
बलात्कार की शिकार छोटी सी बच्ची को लेकर अगर उसके मां-बाप अलग-अलग कस्बों और शहरों में सरकारी अस्पतालों में धक्के खाते घूम रहे हैं, और उसे इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो यह एक अकेले बलात्कारी के बाद सरकारी इंतजाम और लोकतंत्र का उस बच्ची पर सामूहिक बलात्कार है। ऐसे में अगर उस बच्ची के मां-बाप हिंसक नहीं होते हैं, तो यह उनकी बहुत ही बड़ी बेजुबानी और बेबसी है, और उनका अहिंसक बने रहना एक बहुत ही बड़ी बात है। फिल्मों में जिस तरह प्रताडऩा के बाद हिंसा दिखाई देती है, वैसा कोई खतरा किसी दिन ऐसे बेबस मां-बाप की तरफ से खड़ा हो जाए, तो हमको उसमें हैरानी नहीं होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार को अपने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज को लेकर इसलिए भी आंखें खोलनी चाहिए क्योंकि राज्य के बहुत से अखबारों में रोजाना अनगिनत खबरें सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों की ऐसी छपती हैं, जो कि छपने के पहले ही सरकार की नजर में आ जानी चाहिए थी। लेकिन आठ महीने पहले की राजनांदगांव जिले की घटना के बाद, आज अगर राजधानी का मेडिकल कॉलेज अस्पताल बलात्कार की शिकार बच्ची को लेकर उसी हाल में है, तो यह बात सरकार के लिए बहुत शर्मनाक है। छत्तीसगढ़ के चुनावों में भाजपा की लगातार जीत की वजह से राज्य में एक ऐसा माहौल दिखता है कि सरकार का काम बहुत अच्छा है। यह काम चुनाव जीतने के लिए तो अच्छा हो सकता है, लेकिन ऐसी जीत की वजह से अगर सत्तारूढ़ लोग आत्मसंतुष्टि के शिकार होकर अखबारों में रोज छपती गड़बड़ी की तरफ भी नहीं देखेंगे, तो यह सरकार की बहुत बड़ी खामी रहेगी। आज पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का हाल हर दिन इसी तरह का दिखता है, और मुख्यमंत्री को इस बारे में सोचना चाहिए।

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