राशन कार्डों की जांच होने तक गरीबों का राशन रूकना गलत

9 जून 2014
संपादकीय
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट से आए दिन हमारे सामने ऐसी तस्वीरें आती हैं जिनमें राशन कार्ड लिए हुए सैकड़ों गरीब इस तपती धूप में वहां पहुंचे रहते हैं, क्योंकि उनके राशन कार्ड का सत्यापन हुए बिना उस पर उन्हें राशन नहीं मिल रहा। छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के तीन-तीन बार चुनाव जीतने के पीछे सबसे हाथ उनकी रियायती अनाज की योजना का माना जाता है, और साथ-साथ यह भी कि छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सबसे कम चोरी, और सबसे अधिक कामयाबी भी बरसों से दर्ज होते आई है। ऐसे में आज अगर राशन कार्ड की जांच के दौरान अगर बड़ी संख्या में लोगों को महीनों से राशन नहीं मिल रहा है, तो ऐसे में गरीबों का हाल खराब होना तय है।
यह एक अलग बात है कि इस राज्य में लाखों लोग रियायत के हकदार न रहते हुए भी रियायती अनाज पा रहे थे, और उसका बोझ सरकार पर बरसों से पड़ रहा था। पहले तो गरीबी की रेखा के नीचे के लोगों की शिनाख्त के पैमाने एक से अधिक चल रहे थे, और छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला सही था कि इन पैमानों में से किसी पर भी जो गरीब साबित होता है, उसे रियायती अनाज मिलना चाहिए। हम आज भी यही सोच रखते हैं कि सरकार अगर शिनाख्त करने में कमजोर है, अगर राशन कार्ड की जांच होने में किसी वजह से देर हो रही है, तो ऐसी नौबत में गरीबों का राशन जारी रहना चाहिए, और जब तक सरकार के पास ठोस वजह न आ जाए, तब तक गरीब का राशन बंद नहीं होना चाहिए। सरकार की नाकामयाबी, उसकी सीमित क्षमता, उसके चुनाव जैसे कई तरह के अतिरिक्त बोझ, इन सबके चलते हुए भी इस मामले में संदेह का लाभ गरीब को उसी तरह मिलना चाहिए जिस तरह भारतीय न्यायपालिका में सुबूत न मिलने पर संदेह का लाभ आरोपी को मिलता है। यह तय करना और साबित करना सरकारी जांच का काम है, कि कौन-कौन से अपात्र लोग राशन पा रहे हैं। और फिर अगर उनमें गैरगरीब तबके के लोग जालसाजी से रियायती राशन कार्ड बनवाकर राशन पा रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई का हक और जिम्मा भी सरकार का है। लेकिन जब तक सरकार ऐसी कार्रवाई नहीं कर पाती, तब तक राशन बंद होने के बजाय जारी रहना चाहिए।
सरकार की योजनाओं में से जो भी योजनाएं गरीबी की रेखा के नीचे के लोगों के लिए हैं, जो योजनाएं बीमार, बूढ़े, अकेली रह गई महिलाओं, विकलांगों के लिए हैं, उन सबमें सरकार देर का नुकसान सरकार खुद झेले। ऐसे तबकों की ऐसी हालत नहीं होती कि वे सरकार की देर का नुकसान झेल सकें। छत्तीसगढ़ में राशन इस सरकार की लगातार कामयाबी का एक बड़ा मुद्दा रहा है। कई मंत्री और कई सचिव इस विभाग में आकर चले गए, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी निजी दिलचस्पी से और अपनी निगरानी में रियायती राशन को सफल बनाकर रखा। आज इस मोर्चे पर गरीबों को अगर ऐसी दिक्कत हो रही है, तो उनका अनुपात गरीब आबादी के भीतर कितना भी हो, उनकी जांच में समय कितना भी लगे, यह नुकसान सरकार को ही झेलना चाहिए। आज बहुत बूढ़े-बूढ़े लोग जिस तरह लाठियां टेकते हुए झुलसाती हुई गर्मी में दिन भर सरकारी दफ्तरों में डेरा डाले हुए हैं, वे तस्वीरें छत्तीसगढ़ सरकार के जनकल्याण के दावों, और उसके पिछले रिकॉर्ड के साथ मेल नहीं खातीं। राज्य सरकार को अपने सर्वोच्च स्तर पर बिना देर किए यह आदेश करना चाहिए कि राशन कार्ड की जांच चलने तक किसी भी गरीब का राशन न रूके।

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