एक अफसर की तारीफ में


9 फरवरी 12
संपादकीय



छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव सुनील कुमार से इस राज्य के लोगों की उम्मीदें, संभावनाओं के मुकाबले बहुत अधिक हैं, और ऐसे में किसी के नाकामयाब हो जाने का खतरा अधिक रहता है। एक अफसर के बदल जाने से उम्मीदों में इतना बदलाव आना तो नहीं चाहिए लेकिन असलियत यही है कि एक इंसान और दूसरे इंसान में बहुत फर्क भी हो सकता है, ओहदा एक ही रहते हुए।
एक अफसर के बारे में इस जगह लिखना कुछ अटपटा भी लग सकता है लेकिन पिछले करीब तीस बरस में छत्तीसगढ़ के लोगों ने जब-जब सुनील कुमार का काम देखा, उनसे बिना रूबरू हुए भी उनके बारे में पढ़ा, सुना, उनके बारे में एक अलग तस्वीर लोगों के मन में बनी। उनकी ही आईएएस विरादरी में उनके जितने ईमानदार और लोग भी जरूर होंगे, उनके जितने काबिल लोग भी और होंगे, कुछ लोगों में उनके जितनी दूर की सोच भी होगी, कई और लोग भी उनके जितनी मेहनत करते होंगे, उनके जैसी सादगी, किफायत और गांधीवादी सोच भी कुछ दूसरे लोगों में होगी, लेकिन इतनी तमाम खूबियां जब किसी एक पैकिंग में एक साथ रहती हैं, तो फिर लोग उस सामान के रामबाण दवा होने की उम्मीद भी लगा लेते हैं। इनमें  से कई बातों पर सुनील कुमार असंभव किंतु सत्य दर्जे के कट्टर हैं, और उनके साथ काम करना बहुत से लोगों के लिए दिक्कत का काम भी होता है। लेकिन ऐसे में वे इस राज्य के प्रशासनिक मुखिया के तौर पर एक बड़े चुनौती ढोकर आए हैं। 
भारतीय लोकतंत्र में पिछले एक-दो बरस, एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक पारदर्शिता के रहे। देश की सबसे बड़ी अदालत, सबसे बड़ी पंचायत से परे भी कुछ और संवैधानिक संस्थाओं ने जनहित के काम किए और सूचना के अधिकार ने सरकार के भीतर गंदगी से धुंधले पानी को साफ किया। अन्ना हजारे के आंदोलन से देश का कोई दीर्घकालीन भला हुआ हो या नहीं, सरकारी भ्रष्टाचार खबरों में आया और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग सड़कों पर आए, सरकारें बेचैन हुईं। बहुत से अदालती फैसलों से देशभर में सरकारी अधिकारी-कर्मचारी घेरों में आए, और हमारा अंदाज है कि गलत काम के पहले सरकारी कलम अब कुछ हिचकाने लगी है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सुनील कुमार को मुख्य सचिव बनाकर यह बात भी साफ कर दी है कि वे प्रशासन के इस स्तर पर सिर्फ ईमानदारी के काम की उम्मीद करेंगे। इस अफसर की नौकरी पूरी होने के पहले राज्य में चुनाव हो चुके होंगे, इसलिए अब से चुनाव तक ऐसे अफसर को मुख्य सचिव बनाना एक कड़ा राजनीतिक फैसला भी है क्योंकि नीतियों, नियमों और सिद्धांतों का मामले में सुनील कुमार बेमिसाल अफसर हैं। हमारा मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार में अच्छा काम करने वाले, ईमानदार और मेहनती तमाम लोग इस नए प्रशासनिक मुखिया के आने से खुश भी होंगे।
मौजूदा राज्यपाल शेखर दत्त जब रायपुर संभाग के कमिश्नर थे, तब सुनील कुमार रायपुर में कलेक्टर थे। उन्होंने साथ में लंबा कामकाज किया है और वे शेखर दत्त के पसंदीदा अफसरों में से एक थे। मुख्यमंत्री रमन सिंह अपने कार्यकाल के शुरू से ही इस कोशिश में थे कि सुनील कुमार प्रतिनियुक्ति पर केन्द्र सरकार में न जाएं, और बाद में भी वे लगातार यह चाहते रहे कि वे लौटकर राज्य में काम करें। अर्जुनसिंह से लेकर रमन सिंह तक वे मप्र और छत्तीसगढ़ के सभी मुख्यमंत्रियों की पसंद के बेदाग, निष्पक्ष और काबिल अफसर बने रहे। अजीत जोगी के सचिव रहते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की ईंटें ढोई हैं और वे इसके हर पहलू से किसी भी दूसरे के मुकाबिले अधिक वाकिफ हैं।
मुख्यमंत्री रहते हुए अजीत जोगी ने एक से अधिक बार यह कहा था कि उनकी किस्मत थी कि वे इस राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी किस्मत थी कि उन्हें सुनील कुमार जैसा सचिव मिला। ऐसी ही उम्मीदें आज छत्तीसगढ़ में उन तमाम लोगों की हैं जो कि इस अफसर के काम और/या इसकी साख से वाकिफ हैं। इतने करिश्मों की उम्मीदें अधूरी होने के खतरे ही अधिक रहते हैं,  लेकिन सुनील कुमार और इस राज्य को हमारी शुभकामनाएं।

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