17 फरवरी
छोटी सी बात
सुनील कुमार
किसी बात को बिना दिमाग का इस्तेमाल किए ज्यों का त्यों मान लेने का मतलब आत्मविश्वास की कमी। अपने तर्कों को ना छोड़ें, दूसरों की बात को सच्चाई के कसौटी पर परखें तभी उस पर भरोसा करें। विज्ञान का तरीका तर्कसंगत होता है। आपने विज्ञान चाहे न पढ़ा हो, उसके तरीकों को आजमाना तो सीख ही सकते हैं। और विज्ञान किसी इंसान का बनाया हुआ नहीं है, पूरी कुदरत ही वैज्ञानिक है। कुदरत की मिसालें देखें, तो आपको समझ आएगा कि हर बात के पीछे ठोस वजहें होती हैं।
बहुत से लोग अंधविश्वास के चलते किसी की कही बात पर आँखें बंद करके भरोसा कर लेते हैं। ऐसा करना ना आपके लिए ठीक है, ना ही उसके लिए जिस पर आपका अंधविश्वास है। सच्चा गुरु आपको तर्कों के साथ समझाता है, ना कि भभूत देकर। आपका जो लोग सम्मान करते हैं, उनको भी अपने अंधविश्वास तले ना दबाएँ। अपने बच्चों को भी अपनी आस्थाएं तय करने की छूट दें। हो सकता है कि उनके फैसले आपके मुकाबले बेहतर हों। उनके लिए पसंद को ख़त्म ना कर दें। अगर आपके बच्चे आपकी कही बात को अपने दिमाग के इस्तेमाल के बिना मान लेते हैं, तो यह उनके अपने विकास के लिए, फैसले लेने की क्षमता के लिए ठीक नहीं होगा। पूरी जिन्दगी आप ही तो उनको राह दिखाने को नहीं रहेंगे, इसलिए उनको राह तय करना आना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी होती है। तर्क करने वाले गलतियां कम करते हैं। बच्चों के साथ कभी इस भाषा का इस्तेमाल ना करें कि वे बहस बहुत करते हैं। चुप रहकर बात को मान लेने वाले जिन्दगी में अधिक गलतियाँ करते हैं, अधिक धोखे खाते हैं।
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