ट्रेनी आईपीएस सहकर्मी के यौन शोषण की नौबत कैसे?

20 जुलाई 2026  

 

देश में पुलिस अफसरों के शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए सबसे बड़े संस्थान, सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से एक भयानक समाचार आया है। वहां पर एक महिला आईपीएस अधिकारी प्रशिक्षण के लिए गई हुई थीं, और उनके साथ ही प्रशिक्षण पा रहे एक दूसरे आईपीएस ने उनके साथ कई तरह का गलत बर्ताव किया। अभी ये सारी बातें इस महिला द्वारा हैदराबाद के स्थानीय पुलिस थाने में की गई एफआईआर के आरोपों की शक्ल में हैं, और अभी मामला अदालत तक नहीं पहुंचा है, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। उदयकृष्ण रेड्डी नाम का यह आईपीएस एक दूसरी वजह से भी चर्चा में था कि उसने अपने कॅरियर की शुरूआत आंध्र के पुलिस सिपाही से की थी। फिर एक वरिष्ठ अफसर से अपमान की शिकायत करते हुए उसने नौकरी छोड़ दी थी, और यूपीएससी की तैयारी शुरू की। यूपीएससी में 350वीं रैंक पाकर उदयकृष्ण आईपीएस बना, और अभी नेशनल पुलिस एकेडमी में प्रशिक्षण पा रहा था। इसी दौरान साथी महिला आईपीएस ने यह रिपोर्ट लिखाई है। 

30 बरस की इस महिला आईपीएस का कहना है कि उदयकृष्ण उन्हें वॉट्सऐप पर अश्लील और अभद्र मैसेज भी भेज रहा था, और एकेडमी के अन्य सहयोगियों के सामने उनके चरित्र पर कीचड़ भी उछाल रहा था। उनकी निजी जिंदगी को लेकर झूठी अफवाहें फैला रहा था, और एक अन्य ट्रेनी के साथ उनका नाम जोडक़र मानसिक दबाव बना रहा था। रिपोर्ट में लिखाया गया है कि उसने इस महिला अफसर का मोबाइल छीनकर, पासवर्ड पूछकर उनकी पर्सनल चैट खंगाली, और उसका एक निजी वीडियो भी चोरी-छिपे रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल करने की नीयत से उसके पति को भेज दिया। महिला ने शिकायत की है कि अभी 9 जुलाई की रात उदयकृष्ण उसे जबरन खींचकर अपने कमरे में ले गया, वहां गर्दन पर चाकू अड़ा दिया, अश्लील हरकत की, और उस पर कंडोम के पैकेट फेंके। अगले दिन 10 जुलाई को भी उसने इस महिला के साथ हिंसा की। पुलिस में रिपोर्ट के साथ-साथ यह मामला सोशल मीडिया पर भी आया, और तेलंगाना की एक महिला नेता के.कविता की तेलंगाना रक्षा सेना नाम की पार्टी ने इसे संस्थागत विफलता बताया है। 

यह मामला भयानक इसलिए लगता है कि यह दो आईपीएस अफसरों के बीच की घटना बताई जा रही है, जिनकी आगे की पूरी नौकरी ही जुर्म को रोकने, मुजरिमों को पकडऩे की रहने वाली हैं। आईपीएस होकर जो लोग अकादमी तक पहुंचते हैं, उनसे उम्मीद की जाती है कि देश के कानून की जानकारी और लोगों से कुछ अधिक होगी। इसके बाद भी अगर दो अफसरों के बीच यह नौबत आ रही है, तो यह बहुत भयानक है। हम महिला अफसर के साथ होने वाली ऐसी ज्यादती पर भी उसके तुरंत रिपोर्ट न लिखाने को समझ सकते हैं। कोई महिला चाहे आईपीएस हो गई हो, यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग की रिपोर्ट लिखाना उसके लिए आसान नहीं रहता। पुलिस और अदालत का पूरा सिलसिला इस देश में मर्दों के दबदबे से लदा हुआ है, और महिला जुर्म का शिकार होने पर भी जुर्म के लिए जिम्मेदार मान ली जाती है, इसलिए उसे रिपोर्ट लिखाने में कुछ समय लग सकता है। कुछेक ऐसे मामले भी देश में होते हैं जिनमें कुछ महिलाएं झूठी रिपोर्ट भी लिखाती हैं, लेकिन हम उस तरह की कोई अटकल लगाने के बजाय उसे तय करने का काम अदालत पर छोडऩा बेहतर समझते हैं, और आज यहां पर लिखने के लिए हम महिला की कही बात को ही सही मानकर लिख रहे हैं। 

एक तरफ तो इस पुरूष अफसर की कामयाबी यह थी कि पुलिस सिपाही से नौकरी शुरू करके वह देश की सबसे कठिन इम्तिहान देकर आईपीएस बना, और प्रशिक्षण के लिए इस अकादमी तक पहुंचा। यह कामयाबी दसियों हजार उम्मीदवारों में से किसी एक को ही मिलती है। लेकिन इसके बाद इस तरह के अप्रिय विवाद में फंस जाना, एक बड़ी निराशा की बात है। जिसने इतने अभावों से शुरू करके यहां तक की सफलता पाई, उससे तो उम्मीद यह की जाती है कि वह इस कामयाबी को संभालकर भी रखेगा। लेकिन अगर उसने ऐसा जुर्म किया है, और उसके सुबूत भी छोड़े हैं, तो यह मर्दाना जुल्म और जुर्म के साथ-साथ कमअक्ली की बात भी है। आज किसी को फोन पर एक गलत संदेश भेजने का मतलब अपने खिलाफ एक बहुत पुख्ता डिजिटल-साइबर सुबूत खड़ा करना होता है। आज की जांच इतनी तकनीकी-वैज्ञानिक हो चुकी है कि वह ऐसे किसी भी जुर्म को संदेह से परे स्थापित कर सकती है, सजा दिला सकती है। ऐसे में यह वक्त रोमांचक रिश्तों को बनाने का नहीं है, हर दिन तो खबरों में ढेर सारे ऐसे मामले आते हैं जिनमें बरसों के अंतरंग संबंधों के बाद भी बलात्कार की रिपोर्ट लिखाई जाती है, इसलिए अखबारों के मामूली पाठक को भी कोई खतरनाक रिश्ते बनाने के पहले सावधानी बरतनी चाहिए। कोई अगर अपनी सहकर्मी महिला से लगातार कई दिनों तक इस दर्जे की हरकतें कर रहा है, तो यह कड़ी सजा के लायक मामला बनता है। इसके साथ-साथ यह आईपीएस जैसी बड़ी सरकारी सेवा के लिए भी एक शर्मिंदगी की बात है कि उसके अफसरों के बीच आपस में इस तरह की घटना हुई है। यह एक अलग बात है कि इंसानी मिजाज औरत-मर्द के बीच कई बार ऐसी हरकतें करवाता है, लेकिन ऐसा ही मिजाज अगर वर्दी में आगे जारी रहे, तो वह मातहत महिला कर्मचारियों का क्या हाल करेगा, यह देश में कई जगह देखा जा चुका है। 

लोग देश की सबसे महत्वपूर्ण नौकरी पाने के बाद भी महज देहसुख के चक्कर में अगर इस तरह के जुर्म करते हैं, तो इनका जल्द से जल्द, ऐसी किसी पहली घटना में ही पकड़ा जाना बेहतर है। अगर इनकी हरकतें दबी-छुपी रह जाती हैं, तो ये सीरियल रेपिस्ट की तरह काम करने लगते हैं, और न सिर्फ आईपीएस, बल्कि दूसरी ताकतवर नौकरियों में भी कभी-कभार ऐसे कुछ अफसर चर्चा में आते रहते हैं। देश का कानून तो बड़ा कड़ा है, लेकिन सरकारों के भीतर जुल्म और जुर्म की शिकार महिला के साथ खड़े रहने की राजनीतिक इच्छाशक्ति सरकारों में कम रहती है। हमारा यह देखा हुआ है कि सत्ता की ताकत मिजाज को हमलावर और मर्दाना कर ही देती है। सबसे अधिक ताकत की जगहों पर बैठे हुए लोग आमतौर पर महिलाओं को हिकारत से देखने लगते हैं, और वे किसी भी विवाद में महिलाओं के चाल-चलन पर संदेह करते हुए उनके भीतर ही जुर्म की जिम्मेदारी तलाशने लगते हैं, तय करने लगते हैं। यह सिलसिला सरकारी नौकरियों की महिलाओं को अपने शोषण के खिलाफ खड़े होने और लडऩे का हौसला नहीं दे पाता। देश में जो महिला आयोग, या दूसरे किस्म के आयोग बने हुए हैं, वे अपनी राजनीतिक नियुक्तियों की वजह से कभी जुर्म के शिकार लोगों का साथ नहीं दे पाते, अगर मुजरिम पर राजनीतिक मेहरबानी रहती है। इसलिए देश में एक संवैधानिक बहस की भी जरूरत है कि अलग-अलग तबकों के संरक्षण के लिए बनी संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक दबाव से कैसे मुक्त रखा जाए। हम पहले भी कई बार लिख चुके हैं कि संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियां राज्य स्तर पर नहीं होनी चाहिए, और न ही राजनीतिक फैसले से होनी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियुक्ति-समिति जैसी कोई संवैधानिक व्यवस्था जब तक नहीं होगी, तब तक ऐसे कोई भी आयोग अपना मकसद पूरा नहीं कर सकेंगे, और महिलाओं जैसे कमजोर तबके कभी बराबरी का हक नहीं पा सकेंगे। फिलहाल हम उम्मीद करते हैं कि पुलिस जांच, और अदालत में इस महिला आईपीएस की शिकायत खड़ी हो सकेगी, और सच होने पर वह सजा दिलवा सकेगी। देश भर में सरकारी और निजी संस्थानों में, कामकाज की जगहों पर महिलाओं के शोषण के खिलाफ एक कानूनी जागरूकता, और जिम्मेदारी की बहुत जरूरत है।

(Daily Chhattisgarh)   

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