28 अप्रैल
निजी बातें न पूछें
भारत में यह आम बात है कि नए लोगों से मिलने पर बातचीत के दौरान लोग उनकी जात, उनके शादीशुदा होने या न होने, बच्चे होने या न होने की जानकारी लेने लगते हैं। लेकिन सभ्य दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में इसे बदतमीजी माना जाता है कि आप शुरुआती कुछ मुलाकातों में ही किसी से उनकी निजी जानकारी लेने लगें। सार्वजनिक जीवन का शिष्टाचार भी इसके खिलाफ है।
भारत में लोग किसी महिला से सीधे यह पूछने पर उतर आते हैं कि उनके मिस्टर क्या करते हैं? अपने निजी जीवन का सम्मान करने वाले बहुत से लोग ऐसे सवालों पर रूखा जवाब देते हुए झिड़क सकते हैं। इसलिए किसी से अंतरंगता के बिना इस तरह के सवाल कभी न करें। किसी से सीधे-सीधे उनका मोबाइल नंबर मांगने के बजाय अपना मोबाइल नंबर लिखकर उन्हें देना बेहतर होता है, ताकि उनको ठीक लगे, और जरूरत हो तो वे ही आपको फोन लगा लें।
ऐसी छोटी-छोटी बातें कुछ जगहों पर आपको ऊपर ले जाने में मदद कर सकती हैं, या आपको रोकने का काम कर सकती है। इसलिए शिष्टाचार को सीखने में कोई बुराई नहीं होती, और आप अपनी बेइज्जती करवाने से बचते हैं।
-सुनील कुमार