21 मार्च 2013
आज भी हिज्जों का महत्व है
इन दिनों इंटरनेट की मेहरबानी से बहुत से देशों में लोग एक-दूसरे के दोस्त बन जाते हैं और फेसबुक या ट्विटर जैसी वेबसाईटों पर एक-दूसरे से बातचीत भी करते हैं। इनमें अंग्रेजी वाले बहुत से लोग रहते हैं, लेकिन बहुत से ऐसे भी रहते हैं जो गैरअंग्रेजी जुबान वाले हैं, लेकिन इंटरनेट पर अनुवाद की आसान और मुफ्त सहूलियत के चलते वे एक-दूसरे से बात कर लेते हैं। लेकिन इंटरनेट ने अंग्रेजी जुबान के हिज्जे बदलकर रख दिए हैं। लोग शब्दों को अलग तरीके से लिखने लगे हैं। लेकिन ऐसा करते हुए यह याद रखने की जरूरत है कि नेट पर अनुवाद करने वाले सॉफ्टवेयर इस तरह की नई स्पेलिंग का सही अनुवाद नहीं कर पाते। उनकी डिक्शनरी में परंपरागत स्पेलिंग ही रहती है। इसलिए यह याद रखें कि अगर आपका संपर्क बहुत से ऐसे लोगों से है, जो कि मशीनी अनुवाद से ही आपकी बात पढ़ पाते हैं, और अपनी बात अंग्रेजी में बदलकर लिख पाते हैं, तो ऐसे लोगों से संपर्क करते हुए हिज्जे पूरे-पूरे लिखें।
और एक दूसरी बात जो हम पहले भी कई बार सुझाते आए हैं कि दुनिया की ऐसी कोई बात नहीं है जिसे कि बिना गाली-गलौज न लिखा जा सके। इसलिए ऐसे ही शब्द लिखें जिन्हें आपके बुजुर्ग भी पढ़ सकें, और आपके बच्चे भी। गालियां या गंदे शब्द आपकी साख को इस हद तक नुकसान पहुंचाते हैं कि आपको अंदाज भी नहीं होगा।
-सुनील कुमार
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